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मेरी और बहन की चुदाई फैजान और उसके मुस्लिम दोस्त से
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कहानी का शीर्षक – मेरी बीवी को किराने दुकान वाले ने चोदा नमस्कार दोस्तों ये मेरी अंतर्वासना पर पहली और बिल्कुल सच्ची कहानी है जो की अभी कुछ दिन पहले ही ये घटना हुई है तो मैंने सोचा क्यों ना इसे आप लोगो तक पहुचाऊँ और आप सबके लंड भी गर्म करूँ ! दोस्तों मेरा नाम आदित्य है मैं 35 साल का हूँ और मेरी बीवी जिसका नाम रजनी है उसकी उम्र अभी 28 साल है हम दोनों बिलासपुर में रहते हैं ! हमारी शादी को 7 साल हो चुके हैं हम दोनों की लव मैरिज हुई है और हम दोनों बहुत ख़ुश हैं , इस कहानी का तीसरा पात्र है अनिल जिसकी उम्र 39 साल है दिखने में ठरकी है ! रजनी बहुत खूबसूरत और हॉट है पूरे मोहल्ले में ऐसी जबरदस्त माल कोई नहीं उसका फिगर का साइज 36-34-38 है उसकी गांड इतनी जोरदार है की बुड्ढे भी उसे देखकर अपना लंड हिलाने पे मजबूर हो जाएं , अब आते हैं कहानी पर तो दोस्तों ये बात एक हफ़्ते पहले की है जब हमारे मोहल्ले के एक किराने की दुकान पर मेरी बीवी जाती है वो हमेशा जींस टॉप या सलवार सूट में होती है और हल्का मेकप करके बन ठन कर रहती है जोकि उसे और मुझे बहुत अच्छा लगता है साथ में वो योगा भी करती है तो बिल्कुल फिट है उसके बड़े बड़े दूध और निकली हुई गांड किसी को भी पागल कर सकती है , हमेशा की तरह मेरी बीवी किराने की दुकान पर गई थी और वो किराने की दुकान का मालिक जिसका नाम अनिल है उम्र करीब 38-39 की है वो उसे हवस भरी नजरों से देखता था ये बात उसने मुझे कई बार बतायी थी इस बार उसने मेरी बीवी रजनी से कहा की भाभी आप बहुत सुंदर लगती हैं और बहुत सेक्सी हैं , ये सुनकर मेरी बीवी एकदम से अकबका गई और उसने शर्म से कुछ नहीं कहा फिर ये बात उसने मुझे बतायी तो मैंने कहा अच्छी बात है ये तो तारीफ़ है ना इसमें कोई बुरी बात नहीं है , फिर उसने कहा की उसकी नज़रें हमेशा मेरे दूध पर होती हैं और मेरी गांड पर और वो अपने हाथ को अपने लंड पर रखा होता है मुझे देखते हुए , मैंने कहा जान कोई बात नहीं उसका इरादा जो भी हो तुम मजे लो और फ़िकर करने की कोई बात नहीं ! अक्सर जब हम दोनों चुदाई करते है तो उस टाइम हम दोनों एक दूसरे को बहुत गंदी गंदी गाली देते है, और रोलप्ले भी करते है। और मैं उससे पूछता हूँ की किससे चुदवाना चाहती है तू रंडी ?बोल मैं चुदवाऊँगा तुझे किसी ग़ैर मर्द से , ऐसी बातों से सेक्स करने में और भी ज़्यादा मजा आता है तो वो बोलती है आप जिससे चाहो मुझे चुदवा दो जान मैं आपको कभी मना नहीं करूँगी , तो अब हुआ यूँ की जब उसने किराने वाले की ये सब बात मुझे बतायी तो मेरे दिमाग़ में एक योजना आई की क्यों ना इससे ही अपनी बीवी को अपने सामने चुदवाया जाये और मजे लिए जायें ! मैंने इस बारे में रजनी से कहा तो पहले उसने मना किया फिर बोली की मुझे डर लगता है कहीं किसी को पता चल गया तो क्या बोलेंगे , मैंने कहा तुम उसकी चिंता मत करो और उसे लाइन दो और घर आने को कहना चाय पर और हाँ आगे से उसकी दुकान जाओ तो और सेक्सी कपड़े पहन कर जाना उसने कहा ओके ! फिर अगले दिन वो उसकी दुकान गई एक शोर्ट टॉप और शॉर्ट्स पहन कर और खुले बाल करके , उफ़ मैं बता नहीं सकता की वो कितनी बड़ी क़ातिल राँड लग रही थी बड़े बड़े दूध और निकली हुई बड़ी गांड और उस पर उसकी नाभि बहुत सेक्सी लग रही थी! अब आगे .मेरी बीवी की ज़ुबानी … किराने दुकान पर जाते ही उस आदमी ने मुझे देखा तो उठ खड़ा हुआ और एकदम खा जाने वाली नज़रों से देखते हुए बोला भाभी आइये आइये आज तो लगता है कि जान ही ले लोगी आप मेरी , मैंने शर्मा कर कहा अरे भैया आप भी क्या बात करते हैं ऐसा क्या ख़ास है आज ? तो उसने कहा आज तो आप किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही और सच कहूँ तो मैं पागल हो रहा हूँ आपको इस ड्रेस में देखकर , मैंने कहा अच्छा ऐसा है थैंक यू भैया , मैं उसको भैया कह कर ही बोलती आई हूँ फिर उसने कहा आज कहीं बाहर जा रही हैं क्या भाभी जी मैंने कहा नहीं बस मन हुआ आज ये पहनने के तो पहन लिया , वो बोला क़सम से भाभी जी आज मैं बता नहीं सकता की आप कितनी हॉट और सेक्सी लग रही हो , मैंने कहा अच्छा अच्छा बस करिए और ये सामान दे दीजिए और कितने पैसे हुए बताइए उसने झट से सारा सामान दिया और पैसे लेने से मना करने लगा मैंने जिद की तो वो अनिल बोला अरे आपसे कैसे पैसे ले सकता हूँ। तो मैंने कहा फिर क्या लेने का इरादा है , तो वो बोला की अगर बुरा ना मानों तो एक बार आपको हग करना है और एक किस बस , मैंने कहा अच्छा ठीक है तो आज शाम को घर आ जाना इतना सुनकर वो पागल हो गया और बोला क्या भाभी सच में ? मैंने कहा हाँ भैया सच में फिर वो बोला ठीक है मैं शाम को आता हूँ लेकिन घर पर भैया भी होंगे ना तो मैंने कहा उसकी चिंता मत करो मैं उनको काम से बाहर भेजने वाली हूँ शाम को तो वो ख़ुश होकर बोला वह भाभी जी कमाल है ठीक है मैं शाम को 7 बजे आता हूँ फिर शाम को 7 बजे – मैंने अपनी पति आदित्य को सब बता दिया था तो वो बोले की मैं यहीं दूसरे रूम पर छुप कर बैठूँगा तुम आज उसके आने के बाद उसके साथ खेलना शुरू कर देना फिर मैं धीरे से बीच में आ जाऊँगा और हम थ्रिसम का मजा लेंगे तो रजनी बोली जान ये सब ठीक तो है ना मैंने कहा हाँ जान सब ठीक है जिंदगी का मजा लेना जरूरी है तो वो बोली ठीक है ! अब आगे – ठीक शाम को 7 बजे अनिल ने घंटी बजाई मैंने दरवाजा खोला तो अनिल बोला भाभी जी नमस्ते , मैंने कहा अरे आइये भैया नमस्ते वो अंदर आते हुए बोला भाभी जी प्लीज मुझे भैया कहना बंद कर दीजिए तो मैंने कहा अरे आप उम्र में इतने बड़े हैं मुझसे और क्या कहूँ , अनिल बोला आप सिर्फ अनिल कहिए ना बहुत अच्छा लगेगा मुझे और सोफे पर बैठ गया मैंने अभी भी वही टॉप और शॉर्ट्स पहना हुआ था , फिर मैंने कहा अच्छा ठीक है जैसी आपकी मर्जी अनिल , बोलो क्या पियोगे चाय या कोल्ड्रिंग , तो बोला भाभी जी बुरा ना मानो तो बस आज दूध ही पीना चाहता हूँ ऐसा बोलते हुए उसकी नज़रें मेरे चूचि पर थी , मैंने शर्माते हुए बोला अरे अनिल तुम तो किस और हग करने की बात किए थे अचानक से दूध की बात कहा से आ गई तो एकदम से वो मेरे पास आकर बोला इतने बड़े दूध जिसके सामने होंगे वो कैसे इन्हें बिना पिए छोड़ सकता है भाभी जी मैंने हंसते हुए कहा अच्छा ठीक है अनिल जैसी मर्जी तुम्हारी इतना सुनते ही उसने कस कर अपनी बाहों में भर लिया और मेरे लिप्स चूसने लगा मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी बहुत देर तक मेरे लिप्स चूसने के बाद वो मेरे चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और मुझे पहली बार किसी ग़ैर मर्द का हाथ अपनी छाती में पाकर अलग ही रोमांच महसूस हो रहा था , वो पागलों की तरह मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरे दोनों बूब्स को दबा रहा था और अपने मुंह को दबा कर उन्हें मसल रहा था मैंने कहा अरे थोड़ा आराम से मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ तो वो मेरे टॉप को निकाल कर फ़ेक दिया और मैं इसके सामने ब्लैक ब्रा में आ गई तुरंत उसने ब्रा का हुक खोला तो मेरे दोनों बड़े बड़े दूध उछल कर बाहर आ गए और अनिल की आंखे फटी की फटी रह गई वो बोला रजनी आज तो मैंने इनको खा जाऊँगा मैंने बोला खा जाओ चूसो इन्हें आज एक पराये मर्द का मजा दो इतना सुनते ही अनिल भूखे शेर की तरह मेरे दूध को चूसने लगा दोनों निप्पल जो एकदम कड़क हो चुके थे उन्हें अपनी जीभ से चाटने लगा और चूस चूस कर दोनों निप्पल लाल कर दिए , तभी अनिल बोला भाभी आज मैं तुम्हें चोदे बिना नहीं जाने वाला मैंने कहा जो मन करे करो अब तड़पाओ नहीं इतना कहते ही अनिल ने मुझे पूरी नंगी कर दिया और बेडरूम में जाने को कहा मैंने उसे कहा अपनी गोद में उठा कर ले चलो अनिल तो उसने तुरंत ही मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मुझे अनिल का लंड बिल्कुल ताना हुआ महसूस हुआ शायद उसका लंड एकदम खड़ा होकर निकलने को मचल रहा था हम लोग रूम में आ गए ! उसने मुझे बेड पर पटक दिया और अपने कपड़े उतारने लगा उसने अपनी शर्ट पेंट उतारी और अंडरवियर में आ गया मैंने कहा अनिल इसे भी उतारो तो वो बोला इसे तुम उतारो रजनी तो मैं ने एक झटके में ही उसका अंडरवियर उतार दिया और उसका लंड मेरे सामने सलामी देने लगा उसका लंड बहुत मस्त था मोटा और लंबा करीब 7 इंच लंबा ये देख कर मेरी चुत गीली होने लगी मैंने कहा अनिल वाह क्या लंड है तुम्हारा उसने कहा भाभी आपके लिए ही है इसे चूसो मैंने तुरंत उसके लंड को मुंह में ले लिया और मजे से चूसने लगी बिल्कुल किसी रांड की तरह और वो सिसकारी लेने लगा आह आह भाभी मेरी जान मेरी रंडी और चूस साली कुतिया मादरचोद कब से तुझे चोदने की मन में ठान रखी थी आज तेरी चुत को चोद चोद कर फाड़ दूँगा , ये सब सुनकर मुझे बहुत मजा आ रहा था और तभी आदित्य कमरे में आ गए और उनको देख कर अनिल की गांड फट गई उसका खड़ा हुआ लंड तुरंत मुरझा गया और वो सकपका कर बोला अरे भैया आप यहाँ वो बहुत डर गया था तो आदित्य ने बोला अरे अनिल भैया डरो नहीं ये सब मैंने कहा था करने को रजनी से क्युकी तुम बहुत दिनों से उसको पटाने की कोसिश में लगे थे मुझे सब बातों का पता है इतना सुनकर अनिल की जान में जान आई और वो बोला अरे भैया आपने तो डरा ही दिया था चलो अब साथ में मजे करते हैं और फिर मेरे पति भी नंगे हो गए और मोबाइल से वीडियो बनाने लगे वो बोले चलो अनिल अब मजे से चोदो रजनी को जितना मर्जी करे जैसे मन करे फिर क्या इतना सुनते ही अनिल को जोश आ गया और वो मेरे मुंह में वापस से अपना लंड देकर बोला चूस इसे रंडी साली डर से सो गया था ये अब इसे चूस ज़ोर ज़ोर से और मैं मस्ती में आ कर उसका लंड चूसने लगी तुरंत ही उसका लंड एकदम कड़क हो गया और वो मेरे मुंह में ही धक्के देने लगा मैंने पूरे गले तक उसका मोटा लंड लिया उधर आदित्य अपना लंड अपने हाथ में लेकर हिला रहे थे जो बहुत मजेदार नजारा था फिर कुछ देर तक अनिल का लंड चूसने के बाद उसने लंड निकाला और मैंने कहा अब मेरी चुत और गांड चाटो अनिल बोला अरे इतनी प्यारी चुत और इतनी सेक्सी गांड को कोई बिना चाटे छोड़ भी नहीं सकता , इतना कह कर वो मेरी चुत में अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा मुझे सच में पराए मर्द का ऐसा करना बहुत मजा दे रहा था और मैं अनिल के सर को अपनी चूत में दबाने लगी आह आआआ बह उर मजा आ रहा है अनिल और चाटों मेरी इस चुत को खा जाओ फिर अनिल अपनी एक उँगली मेरी गांड में डाल कर अंदर बाहर करते हुए मेरी चूत चूसने लगा और बोला वह साली रांड क्या मजेदार चुत है तेरी मजा आ गया इसका रस पीकर और तेरी गांड का तो मैं दीवाना हो गया हूँ आज तेरी चूत और गांड दोनों चोद कर फाड़ दूँगा तेरे पति के सामने , इतना कह कर वो मेरी गांड के छेद को चाटने लगा और बीच बीच में एक उँगली उसमे डाल कर उसे चूसने लगा मुझे जन्नत का मजा आ रहा था सच में ऐसा मजा की मैं बता नहीं सकती फिर आदित्य ने मोबाइल एक जगह सेट कर दिया और मेरे पास आकर बोले कैसा लग रहा है मेरी जान मेरी रंडी आज दो दो लंड एक साथ मिल रहे हैं तुझे , मैंने कहा आह मजा आ रहा है जान इतना मजा कभी नहीं आया सच में , फिर आदित्य ने अपना लंड मेरे मू में दिया और मैं मजे से चूसने लगी। इधर अनिल मेरी गांड चाट रहा था और मेरी चुत में उँगली कर रहा था मैं पागलों की तरह सिसकारिया ले रही थी आह मजा आ रहा है उफ्फ आआह और चाटो मेरी गांड अनिल बहुत मजा आ रहा है , अब अनिल ने मुझे कुतिया बनने को कहा और तुरंत मैं झुक कर कुतिया बन गई पीछे से अनिल ने अपना लंबा लंड एक झटके में मेरी चुत में उतार दिया मेरी चिंख निकल गई थोड़ा दर्द हुआ क्युकी अनिल का लंड आदित्य से थोड़ा मोटा था पर मुझे।बहुत मजा आ रहा था इधर मैं आदित्य का लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी उधर अनिल मेरी चुत में गपागप अपना लंड पेल रहा रहा था और मेरी गांड में भी एक उँगली डाल कर अंदर बाहर कर रहा था मैं आह आहा आ आ yessss आआह और जोर से चोदो अनिल मुझे बहुत मजा आ रहा है आज मेरी चूत फाड़ दो अनिल कह रही थी अब अनिल ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बहुत जोर जोर से मेरी चुत चोदने लगा मैं भी अपनी गांड उछाल उछाल कर उसका पूरा लंड अंदर तक ले रही थी फिर करीब 15 मिनट तक ताबड़तोड़ चोदने के बाद अनिल बोला मैं झड़ने वाला हूँ रजनी बताओ कहा निकालूँ अपना पानी मैंने बोला मेरे मुंह में गिराओ मुझे पसंद है बहुत तो उसने तुरंत अपना लंड निकाल कर मेरे चेहरे के सामने अपने हाथ से हिला कर अपना सारा पानी मेरे चेहरे पर गिरा दिया इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी उसका गर्म गाढ़ा पानी मेरे पूरे चेहरे हो नहला दिया कुछ मेरे लिप्स पर गिरा तो मैंने उसे चाट लिया मुझे टेस्ट अच्छा लगा अक्सर मैं अपने पति का पानी पूरा पी जाती हूँ मुझे बहुत अच्छा लगता है फिर अनिल वही बिस्तर पर एक साइड लेट गया और अब मेरे हब्बी जो बहुत देर से मजे ले रहे थे वो मेरी गांड चोदने की तैयार थे मैंने कहा जान मैं मुंह धोकर आती हूँ मैं तुरंत बाथरूम से अपना चेहरा साफ़ करके आई और अपने पति का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और पाँच मिनट में वो एकदम कड़क हो गया फिर मैंने झुक गई और आदित्य ने थोड़ा सा तेल अपने लंड पर लगाया और अपने लंड को मेरी गांड की छेद पर रख कर एक झटके में पूरा लंड मेरी गांड में उतार दिया अब वो मेरी गांड में लगा तार धक्के दे रहे थे कमर पकड़ कर और बीच बीच में मेरी गांड़ में थप्पड़ मार रहे थे मुझे गाली देते हुए साली राँड आज तूने मेरी इक्षा पूरी कर दी पराए मर्द से मेरे सामने चुदवा कर मुझे बहुत मजा आया तुम दोनों की चुदाई देख कर और जोर जोर से मेरी गांड चोदने लगे मैंने कहा आह आदित्य आज तुमने मुझे सच में रंडी बना दिया आह aaaaah upsssss बहुत मजा आया आज और जोर से चोदो अपनी रंडी को आज मैं बहुत ख़ुश हूँ फिर क़रीब 10 मिनट तक चोदने के बाद मैं झाड़ने वाला था तो मैंने सारा माल उसकी गांड़ में ही निकाल दिया और वो बह कर बाहर आ रहा था तो मैंने थोड़ा हाथ में लेकर उसे रजनी को दिया मुंह में उसने पी लिया और बहुत टेस्टी है जान हमेशा की तरह ऐसा बोला ! इधर हम दोनों की चुदाई देख कर अनिल का लौड़ा भी दुबरे तन कर मेरी चुदाई करने के लिए एकदम तैयार था इधर चुत गांड़ दोनो चुदवा कर मैं थक गई थी फिर मैंने बोला चलो सब पहले शावर ले लेते हैं फिर कुछ खा कर फिर अगले राउंड के लिए रेडी होते हैं तो अनिल बोला साली रंडी तेरे जैसे माल हो तो कोई दूसरा कोई काम ना करे दिन रात तुझे चोदे बस और हसने लगा ये सुनकर मैं और आदित्य भी हसने लगे , फिर हम तीनों ने एक साथ बाथरूम में शावर लिया और बाथरूम में दोनों ने मेरी चुत खूब चाटी और मैंने दोनों के लंड को चूस चूस कर उनका पानी निकाल दिया सब थक गए थे फिर हमने साथ में पिज़्ज़ा मंगाया और बियर के साथ खूब एंजॉय किया हम तीनो अभी भी नंगे ही थे हॉल में एक साथ बैठे हुए और बियर पी रहे थे इतने में आदित्य बोले की अनिल यार तुम्हारी बीवी अंजलि भाभी बहुत हॉट है यार मुझे अंजलि को चोदना है तुम्हारे सामने तो क्यों ना किसी दिन हम चारों ग्रुप चुदाई का कार्यक्रम करें ? तो अनिल बोला हाँ आईडिया अच्छा है तुम मेरी बीवी को रण्डी बना कर चोदना और मेरी रजनी को रण्डी बनाऊँगा मैंने कहा रजनी तो रंडी बन गई है अब अंजलि की बारी है हम सब हसने लगे फोई आर मैंने अनिल से कहा अब तुम रजनी की गांड चोदना और मैं इसकी चूत चोदूँगा वो भी एक साथ तो अनिल तुरंत खुश होकर बोला बिल्कुल भैया आज भाभी जी के दोनों छेद चोद चोद कर बड़े कर देने हैं , और हसने लगा उनकी ये सब बात सुनकर मेरी चुत और गांड़ में खुजली सी होने लगी और मैं बोली आज तो सच में मजेदार यादगार दिन है मजा आ जाएगा फिर इतना कह कर मैंने दोनों को एक साथ सोफे पर बैठा कर उनके सामने फर्श पर बैठ कर दोनों के लंड पारी पारी से चूस कर खड़े किए और उसके बाद दोनों ने मेरी चुत और गांड़ में एक साथ लंड घुसा कर चोदने लगे मुझे बहुत ज़्यादा मजा आ रहा था थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर इस मजे के सामने वो दर्द कुछ नहीं ! क़रीब १ घंटे की ताबड़तोड़ चुत गांड़ चुदाई के बाद दोनों का पानी मैंने सारा अपने जिस्म पर दूध पर चेहरे पर निकलवाया और फिर थक कर सब पस्त होकर वही लेट गए , और काफ़ी देर ऐसे ही रहने के बाद सब नहा कर आए और अनिल ने विदा ली ! दोस्तों ये थी मेरी बीवी रजनी की पराए मर्द से चुदाई की बिल्कुल असली सच्ची कहानी ! दोस्तों जल्दी ही मैं एक और सच्ची कहानी लेकर आऊंगा जिसमे मैं रजनी अनिल और अनिल की सेक्सी बीवी अंजलि शामिल है ! मुझे मेल करके जरूर बतायें दोस्तों की ये कहानी आप सब को कैसी लगी मुझे आपके मेल का इंतेजार रहेगा और दूसरी कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा ! मेरी मेल आईडी है – aaditya03agr@gmail.com
Hindi Sex Stories

कमरे में घुसते ही राम Hindi Sex Stories ने कहा, “सिमरन ये मैं क्या देख रहा हूँ?”

“ओह गॉड! मेरे पति कि आवाज़ है! मुझे जाने दो”, सिमरन अपने आपको जय से छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

“चुप हो जाओ रानी, मैं तुम्हें तभी जाने दूँगा जब मेरा काम हो जायेगा”, जय ने हँसते हुए अपने लंड की रफ़्तार और तेज कर दी।

“राम मुझे जाने दो! नहीं…. मैं तुम्हें नहीं करने दूँगी!” अंजू ने विरोध करते हुए कहा, लेकिन ज़मीन पर कार्पेट पे लेट कर अपनी टाँगें फैला दी।

“अंजू तुम्हें क्या हुआ?” जय ने पूछा।

“आहहहह!!! राम ने अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया है और मुझे चोद रहा है”, अंजू ने जवाब दिया।

“चोदने दो! मैं भी तो उसकी बीवी की गाँड मार रहा हूँ”, जय ने हँसते हुए कहा।

“ओहहहहहहह नहीं!!! मुझे नंगा मत करो प्लीज़, नहीं…. तुमने तो अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया है”, मंजू सिसकी।

“अब तुम क्यों चिल्ला रही हो?” विजय ने पूछा।

“श्याम मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोद रहा है”, मंजू ने जवाब दिया।

“चढ़ा रहने दे, मैं भी तो उसकी बीवी पर चढ़ा हुआ हूँ, मजे लो!” विजय ने साक्षी की गाँड में धक्का मारते हुए कहा।

चारों जोड़े चुदाई में मस्त थे। दो बिस्तर पर और दो ज़मीन पर। ऐसा सामुहिक चुदाई का नज़ारा देखने लायक था। थोड़ी देर बाद सब थक कर चूर हो चुके थे। जय और विजय खड़े होने लगे।

“तुम कहाँ जा रहे हो? अभी मुझे और चुदाना है!” साक्षी ने विजय का हाथ पकड़ते हुए कहा।

“नहीं, मैं थक चुका हूँ! अब मुझसे नहीं होगा”, विजय ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“तुम्हें अब मैं चोदूँगा”, राम ने कहा।

“हाँ राम! तुम मुझे चोदो”, साक्षी बोली।

“चोदूँगा जरूर! लेकिन तुम्हें नहीं सिमरन को, तुम्हें श्याम चोदेगा”, राम ने कहा।

“हाँ राम! मुझे चोदो प्लीज़….!” फिर दोनों ने अपने-अपने पति के लंड को मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया।

“अब चलो यहाँ से….. मुझसे सहा नहीं जा रहा है, देखो मेरी चूत कितनी गीली हो गयी है”, प्रीती मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बेडरूम में ले आयी।

वहाँ वो चुदाई में मस्त थे और मैं अपनी प्रीती की जम कर चुदाई कर रहा था। उसके मुँह से सिसकरियाँ फूट रही थीं, “ओहहहहहह हाँ!!!! जोर से!!! ओहहहह तुम्हारे लंड की तो मैं दीवानी हो गयी हूँ!!!! कितने लौड़ों से चुदवा चुकी हूँ पर तुम्हारे लंड का जवाब नहीं।”

थोड़ी देर में हम झड़ कर अलग हुए ही थे कि चुदाई पार्टी हमारे कमरे में आ गयी।

“कैसे रहा तुम लोगों के साथ?” प्रीती ने पूछा।

“बहुत अच्छा रहा! सिमरन और साक्षी की चूत और गाँड सही में लाजवाब हैं”, जय बोला।

“और तुम दोनों की चूत की खुजलाहट कैसी है?”

“पहले से ठीक है पर अब भी खुजला रही है”, सिमरन ने जवाब दिया।

“जाओ जा कर स्नान कर लो….. ठीक हो जायेगी”, प्रीती ने कहा, “सब लोग तैयार हो जाओ… फिर पिक्चर देखने चलते हैं।”

हम सब लोग तैयार होकर पिक्चर देखने गये और एक अच्छे रेस्तोरां में खाना खाया। घर पहुँचते हुए काफी देर हो चुकी थी। घर पहुँच कर हम सब ड्रिंक्स पीने बैठ गये। बाद में जब सब सोने की तैयारी करने लगे तो प्रीती बोली, “सिमरन और साक्षी तुम आज रात सुनील के साथ सोओगी, और राम और श्याम, अंजू और मंजू के साथ!” प्रीती ने कहा।

“तो हम लोग किसके साथ सोयेंगे?” जय ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“तुम दोनों आज मेरे साथ सोओगे”, प्रीती बोली। प्रीती की आँखों में वासना भरी थी और उसकी आवाज़ नशे में बहक रही थी।

बेडरूम में मैंने जब अपने कपड़े उतारे तो सिमरन सिसकी, “साक्षी! देख तो जीजाजी का लंड कितना लंबा और मोटा है!”

“हाँ यार! ये तो काफी मोटा और लंबा है, सुना है… मोटा लंड चुदाई में ज्यादा मज़ा देता है”, साक्षी मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी, “पहले मैं चुदवाऊँगी।”

“नहीं पहले मैं चुदवाऊँगी, पहले मैंने देखा है”, सिमरन बोली। वो दोनों भी नशे में थीं। उन्होंने पहले कभी शराब पी नहीं थी और आज प्रीती के जोर देने पर दोनों ने एक-एक पैग पिया था और उसमें ही दोनों को अच्छा खासा नशा हो गया था।

“झगड़ा मत करो, पूरी रात पड़ी है”, मैंने दोनों को शाँत करते हुए कहा, “सिमरन बड़ी है इसलिये मैं पहले सिमरन को चोदूँगा।”

पूरी रात मैं दोनों को बारी-बारी से चोदता रहा।

सुबह जब मैं उठा तो दोनों लड़कियाँ गहरी नींद में सोयी पड़ी थी। बिना आवाज़ किये मैं कमरे से बाहर आ गया और देखा कि किचन में प्रीती नंगी ही चाय बना रही थी।

“रात कैसी गयी?” प्रीती ने पूछा।

“बहुत शानदार, दोनों की चूत वाकय में बहुत टाइट है।”

“हाँ मैं जानती हूँ! उनकी शादी हुए ज्यादा अरसा नहीं हुआ है, और तुम्हारे मोटे लंड के लिये तो चुदी हुई चूत भी टाइट है”, प्रीती बोली।

“गुड मोर्निंग भाभी!” अंजू किचन में आते हुए बोली।

“आप दोनों नंगे क्यों हैं? क्या सुबह-सुबह चुदाई कर रहे थे?” मंजू ने हमें नंगा देख कर कहा।

“नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, हमने वैसे आज से फैसला किया है कि घर में सब नंगे ही घूमेंगे, कोई भी कपड़े नहीं पहनेगा”, मैंने कहा।

“अगर ऐसी बात है तो ठीक है”, दोनों ने अपने-अपने गाऊन उतार दिये और नंगी हो गयी।

“हाँ… उम्मीद है कि बाकी भी सब मान जायें”, अंजू ने हँसते हुए कहा, “कितना अच्छा लगेगा जब सब मर्द अपना लंड हवा में उठाये घूमेंगे”, अंजू बोली।

“और हम चूज़ भी कर सकते हैं कि किससे चुदवाना है!” मंजू ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“भाभी! आपने हमारे पतियों के साथ क्या किया है जो अभी तक सो रहे हैं?” अंजू ने पूछा।

“कुछ ज्यादा नहीं किया….. सिर्फ़ उनके लंड से उनके पानी की एक-एक बूँद निचोड़ ली!” प्रीती खिलखिलाती हुई बोली, “अब वो आराम से सो रहे हैं।”

“आओ मंजू देखते हैं, उनका लंड कितना सूखा हुआ है”, अंजू उसे बेडरूम की ओर घसीटती हुई बोली।

आधे घंटे बाद वो दोनों लौटीं, “भाभी! उनके लंड में अभी थोड़ा पानी बचा था जो हमने चूस के निकाल दिया”, मंजू जोर से बोली और बाकी सब को उठाने चली गयी।

हम सब लोग नंगे ही नाश्ता कर रहे थे। “जय और विजय कहाँ हैं?” मैंने पूछा।

“हम यहाँ हैं भैया।” दोनों किचन में नंगे आते हुए बोले। फिर जय और विजय ने राम और श्याम की ओर घूरते हुए कहा, “तो वो तुम दोनों ही हो जिन्होंने हमारी बीवियों का कुँवारापन लूटा था।”

“हाँ लूटा था! तो क्या कर लोगे?” राम भी अकड़ कर बोला। मैं घबरा रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाये। मैंने अंजू और मंजू की ओर देखा।

“सॉरी भैया, भाभी! इन्होंने चालाकी से हमारे मुँह से उगलवा लिया”, मंजू बोली।

इतने में जय बोला, “करेंगे क्या!!! हमने भी तो तुम्हारी बीवियों की चूत और गाँड मारी है”, और हंसने लगा।

माहोल शाँत होते देख मेरी जान में जान आयी। अब तो घर में सब नंगे ही रहते और जो मन में आता उसे पकड़ कर चुदाई करने लगते। सारा दिन शराब और चुदाई चलती…. कौन किसे और कहाँ चोद रहा है कोई परहेज नहीं था। ऑफिस से लौटने के बाद मैं भी शामिल हो जाता था।

एक दिन ऑफिस से लौटा तो देखा कि अंजू के बेडरूम से आवाज़ें आ रही है। सभी लोग वहाँ थे सिवाय राम के।

“प्रीती! राम के साथ बेडरूम में कौन है?” मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“तुम्हारी पहली कुँवारी चूत….. रजनी, आयी थी, टीना की बर्थडे पार्टी के बारे में बात करने, लेकिन इतने सारे खड़े लंड देख कर अपने आप को रोक नहीं सकी और पिछले चार घंटे से सबसे बारी-बारी से चुदवा रही है।” प्रीती ने जवाब दिया। थोड़ी देर बाद राम और रजनी बेडरूम से बाहर आये। “प्रीती! अब मैं चलती हूँ, कल मम्मी के साथ आऊँगी, फिर हम सब फायनल कर लेंगे”, रजनी ने कहा।

“मेरी जान! तुम ऐसे कैसे जा सकती हो? सुनील अभी तो आया है और तुमने उससे चुदवाया भी नहीं है”, प्रीती हँसते हुए बोली।

“सॉरी सुनील… आज नहीं! आज मेरी चूत और गाँड इतनी सुजी हुई है कि अब मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी, फिर कभी!” ये कहकर वो चली गयी।

सभी लोग रजनी और टीना के बारे में जानना चाहते थे। प्रीती ने पूरी डीटेल में सब कुछ उन्हें बता दिया। दो दिन के बाद योगिता और रजनी आयीं। चार नौजवान और खड़े लंडों को देख कर योगिता के मन में चुदवाने की इच्छा जाग उठी।

“मम्मी! जो काम की बात हम करने आये हैं….. पहले वो पूरा कर लेते हैं, बाद में हम दोनों मिलकर इन सबके लंड का पानी निचोड़ लेंगे”, रजनी ने कहा।

मैंने उन दोनों के लिये ड्रिंक्स बनाये और फिर हमने तय किया कि टीना का जन्मदिन कैसे मनाया जाये। तय ये हुआ कि हम लोग एक पार्टी रखेंगे और योगिता की जवाबदारी होगी कि वो टीना और उसके माता-पिता को पार्टी में लेकर आये।

“अगर एम-डी रीना को भी साथ ले आया तो?” मैंने पूछा।

“तुम उसकी चिंता मत करो, रीना नहीं आयेगी! कारण ये कि आज शाम को वो अपनी मौसी से मिलने जा रही है और टीना के जन्मदिन के बाद ही लौटेगी”, प्रीती ने कहा।

“प्रीती! मुझे लगता है कि तुम्हें खुद सुनीलू और मिली को पार्टी में इनवाइट करना चाहिये”, योगिता बोली।

“ठीक है! मैं ही फोन किये देती हूँ!” प्रीती ने फोन उठा कर एम-डी का नंबर मिलाया।

“एम-डी बोल रहा हूँ”, दूसरी तरफ से आवाज़ सुनाई दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“सर, मैं प्रीती बोल रही हूँ, मैं आपको और मिली को शनिवार की शाम पाँच बजे मेरे घर पर कॉकटेल पार्टी की दावत देने के लिये फोन किया है।”

“शनिवार को हम नहीं आ सकते, उस दिन टीना का जन्मदिन है और मैंने उसे प्रॉमिस किया है कि उसे किसी स्पेशल जगह लेकर जाऊँगा”, एम-डी ने कहा।

“सर! ये तो ठीक नहीं होगा! मेरी दोनों ननदें यहाँ आयी हुई हैं और आपसे मिलना चाहती हैं”, प्रीती ने अपने शब्दों पर जोर देते हुए कहा।

“ये तो बहुत अच्छी बात है, मैं भी एक बार फिर उन्हें चोदना चाहता हूँ, लेकिन तुम ये कैसे कर पाआगी?” एम-डी ने कहा।

“सर! उस दिन की पार्टी को आप टीना की बर्थडे पार्टी समझ लिजिये। इससे एक पंथ दो काज़ पूरे हो जायेंगे”, प्रीती ने सिगरेट का धुँआ छोड़ते हुए कहा।

“हाँ! ये ठीक रहेगा। हम लोग शनिवार की शाम ठीक पाँच बजे पहुँच जायेंगे”, एम-डी दूसरी तरफ से बोला।

“तो ठीक है सर! मैं शनिवार को आपका इंतज़ार करूँगी, और हाँ सर टीना और रीना को लाना मत भूलना”, कहकर प्रीती ने फोन रख दिया।

“प्रीती! तुम तो कमाल की चीज़ हो, अब अंकल जरूर आयेंगे”, रजनी ने कहा।

“अब काम खत्म हो गया है, चलो अब मस्ती की जाये”, योगिता अपना ब्लाऊज़ उतारते हुए बोली।

“हाँ मम्मी, चलो चुदाई की जाये!” रजनी बोली। दोनों माँ बेटियाँ शराब के नशे में चूर थीं और उनकी आँखों में वासना लहरा रही थी।

“चलो लड़कों इनकी कपड़े उतारने में मदद करो, और इन्हें कमरे में ले जाकर इनकी सामुहिक चुदाई करो”, प्रीती ने हँसते हुए कहा, “ऐसा कम बार होता है कि माँ बेटी साथ में चुदाई करवा रही हों।”

चारों ने मिलकर उनके कपड़े उतारे और दोनों नंगी माँ-बेटी सिर्फ हा‌ई-हील के सैंडल पहने नशे में झूमति हु‌ईं उन चारों के सहारे बेडरूम में चली गयीं। ।

“क्या सोच रहे हो भैया?” अंजू ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“शनिवर का दिन और टीना की कुँवारी चूत के बारे में ही सोच रहा होगा और क्या सोचेगा”, प्रीती ने अपना ग्लास हवा में झुलाते हुए कहा। वो भी नशे में धुत्त थी।

“तुम हमेशा की तरह सही कह रही हो प्रीती”, मैंने कहा और सिमरन और साक्षी को बाँहों में भर लिया। “आओ तुम दोनों मुझे शनिवार की थोड़ी सी प्रैक्टिस करा दो।”

सिमरन और साक्षी को चोदने के बाद मैं शनिवार का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा। ऐसा लग रहा था कि समय जैसे थम सा गया हो। जैसे तैसे शनिवार का इंतज़ार खत्म हुआ।

शनिवार की सुबह मैं सोकर उठा तो देखता हूँ कि हॉल का सारा फर्निचर फिर से सजाया हुआ था और बीच में एक बेड बिछा दिया गया था। चारों लड़के नंगे उस पर ताश खेल रहे थे।

“प्रीती कहाँ है?” मैंने उनसे पूछा।

“वो किचन में शाम के लिये नश्त बाना रही है”, राम ने जवाब दिया।

मैं किचन में पहुँचा तो देखा कि वो पाँचों भी सिर्फ सैंडल पहने नंगी ही काम कर रही हैं। “क्या हो रहा है?” मैंने पूछा।

“तुम्हारी स्पेशल दवाई से नाश्ता बना रही हूँ, याद है ना आज तुम्हें टीना की कुँवारी चूत फाड़नी है”, प्रीती ने जवाब दिया।

“वो तो मुझे याद है, पर हॉल के बीच में ये बेड क्यों बिछाया हुआ है, क्या शाम को कोई शो होने वाला है?” मैंने पूछा।

“हाँ! शो ही तो होने वाला है, हम सब तुम्हें टीना की चूत फाड़ते हुए देखना चाहते हैं, तुम्हें अकेले ही मज़ा नहीं लेने देंगे”, प्रीती ने कहा।

“हाँ! हम सब भी देखना चाहते हैं”, सभी ने मिलकर कहा।

“तो तुम सब मुझे टीना की चूत फाड़ते देखना चाहते हो?” मैंने कहा।

“तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना?” प्रीती ने पूछा।

“मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है, पर टीना को शरम आयी और वो ना मानी तो?” मैंने कहा।

“टीना अगर नहीं मानी तो उस समय सोचेंगे, अब तुम जा कर तैयार हो जाओ। रजनी टीना को लेकर आती ही होगी”, प्रीती बोली। मैं नहा धोकर तैयार हो बाहर आया कि दरवाजे पर घंटी बजी। प्रीती ने अपना हाऊज़ कोट पहन कर दरवाजा खोल दिया।

दरवाजे पर रजनी और टीना थी। “थैंक गॉड! तुम लोग आ गये, आओ अंदर आओ…… मैं तो समझी कि कहीं एम-डी को भनक तो नहीं लग गयी”, प्रीती ने रजनी से कहा।

प्रीती उन्हें लेकर हॉल में आयी। टीना बहुत ही सुंदर लग रही थी, उसका चेहरा गुलाब की तरह खिला हुआ था और उसके गुलाबी होंठ…… जी कर रहा था कि अभी आगे बढ़ कर उन्हें चूम लूँ।

टीना ने जब सबको नंगा देखा तो शरमा गयी और अपनी गर्दन झुका कर बोली, “रजनी दीदी! ये सब नंगे क्यों हैं? “

“ये नंगे नहीं हैं, आज ये सब जनब अवस्था में तुम्हारा जन्मदिन स्पेशल तरीके से मनायेंगे”, प्रीती बोली, “आओ आज मैं तुम्हें अपने हाथों से तैयार करती हूँ”, कहकर प्रीती टीना को बेडरूम में ले गयी।

“प्रीती इसकी चूत के बाल साफ करना मत भूलना”, रजनी ने कहा।

“मुझे याद है! नहीं भूलूँगी!” प्रीती बेडरूम में जाते हुए बोली।

“इतनी देर कहाँ लगा दी?” मैंने रजनी से पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“शुक्र करो कि हम लोग पहुँच गये, वर्ना अंकल ने तो सब प्लैन चौपट कर दिया था”, रजनी अपने कपड़े उतारते हुए बोली।

“अच्छा!!! ऐसा क्या हुआ?” मैंने पूछा।

“क्या तुम अपने कपड़े नहीं उतारोगे?” रजनी बोली।

“मैं बाद में उतार दूँगा, मुझे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। पहले तुम बताओ क्या हुआ?” मैंने फिर पूछा।

हाई पेन्सिल हील के सैंडलों के अलावा अपने सब कपड़े उतार कर रजनी नंगी हो गयी और उसने बताया:

मैं और टीना तैयार हो कर अंकल के कमरे में पहुँचे और उनसे जाने की इजाज़त मांगी तो वो बोले कि “ऐसी भी क्या जल्दी है, तुम लोग रुको और हमारे साथ ही चलना।”

मुझे काटो तो खून नहीं फिर भी मैं हिम्मत कर के बोली कि “लेकिन अंकल क्यों, हम दोनों जाने के लिये तैयार हैं और आपको अभी कम से कम आधा घंटा लगेगा। हमें जाने दीजिये ना।”

इतने में मिली आँटी हमारे बचाव में आ गयी और बोली कि “जब बच्चे तैयार हैं तो तुम क्यों उन्हें रोक रहे हो, रजनी सही कह रही है हमें अभी आधा घंटा लगेगा, इनके जल्दी जाने में बुराई क्या है?”

अंकल ने कहा कि “तुम सुनील को नहीं जानती, वो मौका मिलते ही टीना की कुँवारी चूत चोद देगा।”

टीना बोली कि “पापा…. ऐसे कैसे चोद देगा, मैं क्या बच्ची हूँ कि जिसका मन जब चाहा मुझे चोद देगा।”

अंकल ने कहा कि “मुझे यही तो डर है कि तुम अब बड़ी हो गयी हो।”

मेरी मम्मी बोली कि “तुम बेकार ही सुनील पर शक कर रहे हो….. जब उसका घर उसके मेहमानों से भरा पड़ा है तो वो टीना की चूत कैसे फाड़ेगा? फिर तुम भी तो वहाँ जा ही रहे हो।”

अंकल बोले कि “ठीक है! जाओ बच्चों इंजॉय करो और सुनील से कहना कि हम ठीक पाँच बजे पहुँच जायेंगे।”

मैंने रास्ते में टीना से पूछा कि “क्या तुम अपनी चूत चुदवाने के लिये तैयार हो”, तो उसने हाँ में जवाब दिया।

रजनी की बात सही थी। प्रीती और टीना ने हॉल में कदम रखा। दोनों ने सिर्फ हाई-हील के सैंडल पहन रखे थे, बाकी बिल्कुल ही नंगी थीं। टीना ने अपने हाथों से अपनी सफ़ाचट चूत छुपा रखी थी।

“अपनी गोरी और प्यारी चूत को मत छुपाओ टीना, इन सबको तुम्हारी चूत देखने दो”, रजनी बोली।

उसकी गोरी चूत को देखते ही मेरे लंड में तनाव आ गया। जैसे ही मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हुआ, मेरा लंड तन कर आसमान की तरफ खड़ा हो गया। मेरे लंड का सुपाड़ा एक नयी चूत की तमन्ना में और ज्यादा फूल कर लाल हो गया।

“वाओ!!!! क्या लंड है”, अंजू बोली।

“ये क्या बुरा है?” जय ने अपने लंड की ओर इशारा करते हुए कहा।

“बुरा तो नहीं है पर छोटा है”, कहकर अंजू ने जय के लौड़े को चूम लिया।

प्रीती टीना को ले कर मेरे पास आयी और उसे मेरी और ढकेल कर बोली, “लो अब…. आज की बर्थडे गर्ल को संभालो और इसका अच्छी तरह से जन्मदिन मनाओ।”

मैं टीना को अपनी बाँहों में भर कर चूमने लगा। मेरे हाथ उसकी चूचियों को भींच रहे थे। मैंने उसे धीरे से गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया और खुद उसके बगल में लेट गया। अब मैं उसके होंठों को चूस रहा था और हाथों से उसके मम्मे सहला रहा था।

कुछ देर तक तो टीना ने साथ नहीं दिया। फिर वो भी साथ देने लगी और वो भी मेरे होंठों का रसपान कर रही थी। वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर मेरी जीभ से खेलने लगी।

पाँच मिनट बाद मैं उसके ऊपर आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। उसने अपनी टाँगें इकट्ठी की हुई थी। मैं जोर-जोर से उसके होंठों को चूसते हुए अपना लंड और जोर से रगड़ने लगा। “आआआआआहहहहहहह” कहकर उसने अपनी टाँगें थोड़ी खोल दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“सुनील अब प्लीज़!!!! मुझे इस तरह तरसाओ नहीं, मेरी चूत में अब लंड डाल दो ना….. मुझसे नहीं रहा जाता”, कहकर उसने अपनी टाँगें पूरी फैला दीं।

“थोड़ा सब्र करो मेरी जान!!! अभी घुसाता हूँ”, कहकर मैंने चारों तरफ देखा। प्रीती और रजनी हमें देख रही थी और बाकी सब एक दूसरे के शरीर को सहला रहे थे। इतने में दरवाजे की घंटी बजी।

“सब लोग ध्यान दो! अब चूत फटने की घड़ी आ गयी है”, प्रीती बोली और अपना हाऊज़-कोट पहनते हुए दरवाजा खोलने गयी।

मैं देख तो नहीं सकता था पर मुझे सुनाई दिया, “आइये सर, योगिता, मिली जी….. आप सब का हमारे घर में स्वागत है”, प्रीती ने उनका अभिवादन किया।

मैंने अपने लंड को टीना की चूत के छेद पर रख कहा, “थोड़ा सहन कर लेना डार्लिंग! शुरू में थोड़ा दर्द होगा।” उसने हिम्मत दिखते हुए सहमती में ‘हाँ’ कहा।

मैंने अपने लंड का जोर का धक्का लगाया और मेरा लंड उसकी झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी चूत में जड़ तक समा गया।

“आआआआआआआआआईईईईईई मर गयीईईई बहुत दर्द हो रहा है…..” टीना दर्द के मारे चींखी। मैंने अपना लंड धीरे- धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया।

“क्या बहुत दर्द हो रहा है?” मैंने उसकी चूचियों को सहलाते हुए कहा।

“हाँ थोड़ा हो रहा है पर तुम रुको मत और मुझे चोदते जाओ”, उसने अपने कुल्हे उठाते हुए कहा।

“ये कौन चींख रहा है?” एम-डी ने पूछा।

“मुझे तो टीना की आवाज़ लग रही है”, मिली बोली।

“हाँ वो टीना की आवाज़ ही है, मुझे लगता है कि सुनील ने टीना को उसके जन्मदिन का तोहफ़ा दे दिया है”, योगिता हँसते हुए बोली।

“ओह गॉड! सुनील ने मेरी टीना की चूत फाड़ दी!!!” कहते हुए एम-डी हॉल की ओर लपका। पीछे तीनों औरतें भी आयी।

मैं टीना की चूत में धीरे-धीरे धक्के मार रहा था और वो कमर उचका कर मेरा साथ दे रही थी।

“सुनील रुक जाओ!!! ये मेरी बेटी है!!!” एम-डी जोर से चिल्लाया।

“सुनील! ये तुम क्या कर रहे हो?” मिली ने बेवजह पूछा।

“मिली! क्या तुम अंधी हो गयी हो? देख नहीं सकती कि सुनील टीना की चुदाई कर रहा है”, योगिता जोर से हँसते हुए बोली।

“योगिता, जिस तरह से तुम हँस कर बोल रही हो उससे तो यही लगता है कि तुम पहले से जानती थी कि क्या होने वाला है?” एम-डी गुस्से में बोला।

“हाँ! मैं जानती ही नहीं थी बल्कि ये सब मैंने ही प्लैन किया था।”

“तुमने ऐसा क्यों किया योगिता, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?” एम-डी बोला।

“अपनी बे-इज्जती का तुमसे बदला लेने लिये”, योगिता बोली।

“तुम्हारी बे-इज्जती? मैंने कब तुम्हारे साथ दुर्व्यवहार किया?”

“मुझे कब बे-इज्जत किया? भूल गये वो होटल शेराटन की शाम…. जब तुमने मेरी चूत को अपने बाप की जायदाद समझ कर सुनील को पेश की थी। मुझसे पहले पूछा भी नहीं और जब मैंने मना किया तो तुमने मुझे रजनी की चूत फाड़ देने की धमकी दी जबकि तुम उसको कुछ दिन पहले ही चोद चुके थे….” योगिता ने नफ़रत भरे शब्दों में कहा।

“क्या?? तुमने अपनी बेटी समान भतीजी को चोदा? मैंने तुमसे ज्यादा बेशर्म इंसान नहीं देखा!” मिली उसे घूरती हुई बोली।

“मिली डार्लिंग! इन लोगों ने मेरे साथ छल किया था, मुझे नहीं मालूम था कि वो रजनी है”, एम-डी ने धीरे से कहा।

“अब तुम कुछ भी कहो….. तुम इतने गिरे हुए इंसान हो कि कल अपनी बेटियों को भी चोदना चाहोगे!” मिली पलटते हुए नफ़रत से बोली।

“मेरा विश्वास करो मिली, ये सब प्रीती और सुनील की चाल थी।”

“ये सही है कि इसे पता नहीं था कि वो रजनी है पर इसे मेरे साथ ऐसा करने का क्या हक है? ” योगिता बोली।

“क्या तुम्हें सुनील के लंड से मज़ा नहीं आया?” एम-डी ऊँची आवाज़ में बोला।

“मज़ा आया तो क्या, सवाल हक का है”, योगिता भी ऊँचे स्वर में बोली।

इससे पहले कि बात झगड़े का रूप ले लेती, प्रीती बीच में बोली, “तुम लोग सब चुप हो जाओ….. प्लीज़ सब शाँत हो जायें।”

जब सब शाँत हो गये तो उसने पूछा, “क्या आप लोगों ने सुना टीना ने क्या कहा?” उन्होंने ना में गर्दन हिलायी।

“टीना! तुमने क्या कहा था…. जरा दोबारा तो कहना!” प्रीती ने टीना से कहा।

“ओह सुनील! तुम रुक क्यों गये, कितना अच्छा लग रहा था, और चोदो ना…..” टीना ने सिसकते हुए कहा।

“सॉरी मेरी जान! मैं थोड़ा भटक गया था”, कहकर मैं अपना लंड फिर अंदर बाहर करने लगा।

“जो होना था सो हो गया….. अब झगड़ने से कोई फ़ायदा नहीं है। टीना की चूत फट चुकी है और वो मज़े से चुदवा रही है। उसे मज़ा लेने दो और आप लोग भी मज़ा लो”, प्रीती ने कहा, “लड़कियों! यहाँ आओ।” जब लड़कियाँ नज़दीक आयीं तो उसने उनका एम-डी से परिचय कराया, “सर! ये सिमरन और साक्षी हैं, अंजू और मंजू से तो आप मिल ही चुके हैं।”

टीना और झगड़े को भूल कर एम-डी ने उनकी चूचियाँ दबाते हुए कहा, “काफी सुंदर और मस्त हैं।”

“ऊऊऊऊहहहह!” वे सिसकी।

“तो मेरी तितलियों….. बताओ तुम्हारी चूत कैसी है?” एम-डी ने उनकी चूत को रगड़ते हुए पूछा।

“भट्टी की तरह गरम!” सिमरन ने अपना पैग पीते हुए कहा।

“और आपके लंड की प्यासी……” साक्षी ने एम-डी के लंड को दबाते हुए कहा। बाकियों की तरह दोनों पर शराब का नशा सवार था।

“तो तुम दोनों में पहले कौन चुदवाना चाहेगा?” एम-डी ने पूछा।

“पहले मैं चुदवाऊँगी”, साक्षी एम-डी को पकड़ बोली।

“नहीं मैं बड़ी हूँ…… पहले मैं!” सिमरन बोली।

“अच्छा झगड़ा मत करो, बेडरूम में चल कर तय करेंगे कि कौन पहले चुदवायेगा”, कहते हुए एम-डी उन्हें ले कर बेडरूम में चला गया। नंगी अंजू और मंजू भी ऊँची ऐड़ी की सैंडल खटखटाती और नशे में झूमती उनके पीछे-पीछे चली गयीं।

“योगिता और मिली! ये चार तने-खड़े लंड तुम लोगों के लिये हैं, चाहे जैसे चुदवा सकती हो”, प्रीती ने चारों लड़कों की ओर इशारा करके कहा।

उनके खड़े लंड को देख कर मिली ये भूल चुकी थी कि उसकी बेटी की चूत अभी-अभी चुदी है और वो मज़े से चुदवा रही है। मैंने देखा कि योगिता और मिली ने मिल कर इतनी सी देर में व्हिस्की की एक पूरी बोतल पी ली थी और बाकी औरतों की तरह अपने हाई हील के सैंडलों के अलावा सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थीं।।

जय और श्याम के लंड पकड़ कर मिली बोली, “काफी मोटे और लंबे हैं, योगिता तुम बाकी दो को लेकर बेडरूम में आ जाओ हम दोनों मिलकर इनका सारा रस निचोड़ लेंगे।” मिली की आवाज़ नशे में बहक रही थी।

“ये चार लंड हैं, तुम दोनों भी हमारा साथ क्यों नहीं देती?” योगिता ने प्रीती और रजनी से कहा।

“नहीं हम लोग यहीं ठीक हैं…. सुनील टीना को चोदने के बाद हमारा खयाल रखेगा”, प्रीती ने कहा।

योगिता राम और विजय को लंड से पकड़ कर नशे में लड़खड़ाती हुई मिली के पीछे बेडरूम में चली गयी।

ये सब तो चल ही रहा था और मैंने अब अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी।

“ओहहहह सुनील हाँआंआं आऔर जोर से, चोदो मुझे…..” टीना सिसकी।

मैं और तेजी से धक्के मारने लगा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाँआआआआ ऐसे ही….ईईई……. कितना अच्छा लग रहा है!!!!” टीना मेरे धक्कों का साथ देते हुए बोली।

मैं उसे चोदते हुए उसके मम्मे दबा रहा था और उसके होंठों को चूस रहा था। “ओहहहहहहह सुनील हाँ!!!!! ऐसे ही!!!!! ओहहहहह मेरा छूटने वाला है….. ओहहहह छूटा…आआआआ।” और इतने में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मुझे लगा जैसे किसी नदी पर बांध को खोल दिया हो।

मैंने अपने स्पीड और तेज कर दी। “ओहहह टीना तुम्हारी चूत कितनी प्यारी है… रानी!!!” कहते हुए मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में उढ़ेल दिया और उसे कस कर बाँहों में जकड़ लिया। मेरे लंड की पिचकारी ठीक उसकी बच्चे-दानी पर गिर रही थी। मैंने उसे चोदना चालू रखा।

“टीना! जब तुम्हारी चूत से पहली बार पानी छूटा तो तुम्हें कैसा लगा?” रजनी ने पूछा।

“दीदी! बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा कि मैं जन्नत में पहुँच गयी हूँ….” टीना मेरे धक्कों का साथ देते हुए बोली।

“लगता है मेरा फिर छूटने वाला है”, कहते हुए टीना ने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर पे जकड़ दीं। उसके सैंडलों की ऐड़ियाँ मेरी कमर पे खरोंच रही थीं। मुझे भी अपने लंड में तनाव सा महसूस हुआ। वो मुझे बाँहों में जकड़ कर जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “हाँ हाँ सुनील!!!! और तेजी से धक्के मारो…..हाँ और जोर से!!!!” और उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया। मेरा भी पानी छूट गया और हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में जकड़े अपनी साँसें संभालने लगे।

“ओह सुनील!!!! अब मुझे चोदो”, प्रीती बिस्तर पर धड़ाम से गिरते हुए बोली, “रजनी !अंदर से किसी लड़के को बुलाओ जो टीना की चूत को चोद सके।” प्रीती और रजनी भी नशे में धुत्त थीं।

जैसे ही मैंने अपना लंड प्रीती की चूत में घुसाया तो मैंने देखा कि जय टीना पर चढ़ कर अपना लंड उसकी चूत में घुसा रहा है।

“क्या ये भी मुझे चोदेगा?” टीना ने फूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ये ही नहीं बाकी सब भी तुम्हें चोदेंगे!” प्रीती बोली।

प्रीती को चोदने के बाद मैंने रजनी को भी चोदा। इतने में मैंने प्रीती को कहते सुना, “राम! तुम ये क्या कर रहो हो।“

“टीना की गाँड मारने की तैयारी कर रहा हूँ”, राम ने जवाब दिया।

“नहीं! टीना की गाँड मारने का पहला हक सिर्फ़ सुनील का है, तुम इसकी चूत चोदो जैसे औरों ने चोदा है….” प्रीती ने नशे में लड़खड़ाते से स्वर में जवाब दिया।

मेरे कहने पर राम ने टीना की चूत की चुदाई शुरू कर दी।

मैंने कमरे में झाँक कर देखा कि एम-डी सिमरन की चुदाई कर रहा था और दूसरे कमरे में श्याम और विजय योगिता और मिली को चोद रहे थे। अंजू और मंजू भी एक दूसरे की चूत चाट रही थीं और कामुक्ता से कराह रही थीं। उन सबकी सिसकरियाँ और मादक चींखें बता रही थी कि उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है।

“सुनील! क्या तुम टीना की गाँड मारने को तैयार हो?” प्रीती ने पूछा।

“एक दम डार्लिंग!” मैंने अपने खड़ा लंड दिखाते हुए कहा।

“तो फिर किसका इंतज़ार कर रहे हो? शुरू हो जाओ!” रजनी बोली।

मैं टीना के पास आकर उससे बोला, “चलो टीना! अब घोड़ी बन जाओ….. मैं तुम्हारी गाँड मारूँगा।”

“नहीं सुनील! गाँड में नहीं!!!” टीना ने याचना भरे स्वर में कहते हुए प्रीती और रजनी की ओर देखा।

“गाँड तो तुम्हें मरवानी पड़ेगी!!!!” प्रीती बोली। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“नहीं दीदी! मैं मर जाऊँगी, सुनील का लंड कितना बड़ा और मोटा है”, टीना बोली।

“क्या मैं और प्रीती मर गये जो तू मर जायेगी, अब जैसा सुनील बोलता है वैसा कर”, रजनी बोली।

टीना घोड़ी बन गयी और मैंने थोड़ा थूक लेकर उसकी गाँड के भूरे छेद पर रगड़ दिया। अपने लंड को छेद पर रख कर थोड़ा जोर लगाया कि वो जोर से चिल्लायी, “ओहहहहह मर गयीईईई….. सुनील मेरी गाँड को बख्श दो!!!!”

“छोड़ो मुझे!!! उठो मेरे ऊपर से…… मुझे सुनील को टीना की गाँड मारने से रोकना है”, एम-डी की चिल्लाने की आवाज़ आयी।

“मारने दो उसकी गाँड!!!! इधर मेरा छूटने वाला है”, सिमरन ने एम-डी को पकड़ते हुए कहा।

एम-डी सिमरन को जबरदस्ती अलग करते हुए हॉल में दाखिल हुआ। उसके पीछे चारों लड़कियाँ भी नशे में झुमती हुई आयी। “रुक जाओ सुनील!!! टीना की गाँड मत मारना, मैं कहता हूँ रुक जाओ?” एम-डी जोर से चिल्लाया।

उसकी चिल्लाहट पर ध्यान ना देते हुए मैंने पूरे जोर से अपना लंड टीना की गाँड में घुसा दिया। जैसे ही लंड उसकी गाँड को चीरता हुआ अंदर तक गया तो टीना दर्द से छटपटाने और जोर से चिल्लाने लगी, “मर गयीईई, सुनील निकाल लो!!!! बहुत दर्द हो रहा है…. ऊऊऊऊईईईई माँआआआआ!”

एम-डी ने जब देखा कि मैं उसकी बातों पे ध्यान नहीं दे रहा तो वो दूसरे में कमरे में भागा, “मिली तू यहाँ चुदवा रही है और दूसरे कमरे में सुनील हमारी बेटी की गाँड मार रहा है।”

“किसे परवाह है….. मारने दो उसे उसकी गाँड, मुझे चुदवाने में मज़ा आ रहा है”, वो अपने कुल्हे उठा कर चुदवाते हुए बोली, “हाँ ऐसे ही…. और जोर से।” साफ ज़ाहिर था कि मिली को शराब और चुदाई के नशे में अपनी मस्ती के अलावा किसी भी बात की परवाह नहीं थी।

“सुनीलू अब कुछ नहीं हो सकता, सुनील का लंड उसकी गाँड को फाड़ चुका है। जाओ और जा कर चूत के मज़े लो… अगर तुम में ताकत बची हो तो….” योगिता जोर से हँसते हुए बोली।

“टीना की गाँड भी इसे चार चूतों को चोदने से नहीं रोक सकती….. जब तक कि इसमें ताकत ना रहे और ताकत के लिये ये अपनी दूसरी बेटी की चूत को भी चुदवा सकता है”, मिली जोर से बोली, “क्यों ठीक बोल रही हूँ ना डार्लिंग! जाओ और अब चुदाई के मज़े लो और हमें भी मज़े लेने दो…।”

एम-डी बिना एक शब्द कहे कमरे से बाहर आ गया और लड़कियाँ उसे लेकर वापस बेडरूम में घुस गयीं। जब मैं टीना की गाँड मार कर अलग हुआ तो रजनी ने उससे पूछा, “टीना! क्या गाँड मरवाने में मज़ा आया?”

“दीदी! शुरू में दर्द हुआ था लेकिन बाद में मज़ा आया”, टीना बोली।

“चलो लड़कों! अब तुम सब टीना की गाँड मार सकते हो”, प्रीती ने आवाज़ लगायी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

सभी ने फिर बारी-बारी से टीना की गाँड मारी। हम सब आराम कर रहे थे कि एम-डी की आवाज़ सुनाई दी, “बस लड़कियों! अब मेरे लंड में और ताकत नहीं है, मैं घर जाऊँगा।” एम-डी कपड़े पहन बाहर आया और मिली के पास पहुँचा।

“मिली! चलो घर चलो।”

“तुम्हें जाना है तो जाओ मेरा अभी हुआ नहीं है।” मिली अपने कुल्हे उछालती हुई बोली, “हाँआआआ राम और जोर से चोदो….. ओहहहह आआआहहह।”

“मैंने कहा ना कि चलो यहाँ से!!!! राम छोड़ो उसे, हमें घर जाना है”, एम-डी ने थोड़ा गुस्से में कहा।

राम ने उसकी बातों पे ध्यान दिये बिना दो चार धक्के लगा कर अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।

“योगिता! तुम भी हमारे साथ क्यों नहीं चलती? सुनीलू के लंड में तो जान नहीं है…. शायद हम दोनों मिलकर कुछ कर सकें”, मिली लड़खड़ाते स्वर में बोली।

“ठीक है! चलती हूँ पर पहले मुझे खलास तो होने दो…” योगिता बोली, “हाँ श्याम चोदो मुझे जोर से….. और जोर से…… मेरा छूटने वाला है।”

श्याम भी छूटने के करीब था और दो चार धक्कों के बाद वो उसके बदन पर निढाल पड़ गया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“साथ में मिलकर कुछ करेंगे???” टीना ने पूछा।

“थोड़े दिनों में तुम सब जान जाओगी”, रजनी ने कहा।

थोड़ी देर बाद में योगिता और मिली ने नशे में झूमते हुए जैसे-तैसे अपने कपड़े पहने और एम-डी के साथ जाने के लिये तैयार हो गयीं। “टीना! कपड़े पहनो और हमारे साथ चलो”, एम-डी कड़क कर टीना से बोला। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

टीना सोच में पड़ गयी और चारों तरफ देखाने लगी पर उसकी मदद में कोई कुछ नहीं बोला। वो ही हिम्मत करके बोली, “पापा! आप लोगों को जाना है तो जाओ…. मुझे यहाँ अच्छा लग रहा है।” उसकी बातों को सुन हम सब ने ताली बजा कर स्वागत किया।

“सुनीलू!!! टीना इक्कीस की हो गयी है और वो जो चाहे कर सकती है, और वैसे भी सुनील उसकी गाँड और चूत दोनों फाड़ ही चुका है। वो और चुदवाना चाहती है तो उसे रहने दो”, मिली एम-डी को घसीटती हुई बाहर ले गयी। Hindi Sex Stories

Antarvasna

आज स्कूल में Antarvasna अचानक जल्दी छुट्टी हो गई तो मैं घर आ गया। जैसे ही दरवाजे के पास पहुँचा कि मैंने सुना:
आई … ई … मान जाओ न … यह दीदी की आवाज थी।

मैं चौंक पड़ा … मैंने दरवाजा खटखटाने का इरादा त्याग दिया और दबे पाँव दरवाजे तक पहुँच गया और सुनने लगा।

अन्दर दीदी और किसी मर्द की आवाज आ रही थी- उचक क्यों रही है … कोई पहली बार दबा रहा हूँ क्या … पुच्च पुच्च पुच्च!
“इतना जोर से क्यों दबाते हो? मुझे दर्द नहीं होता क्या?”

“इतने समय के बाद मिलेगी तो सब्र कैसे होगा!”
“आप ही तो एक साल के बाद आये हो!”

“आह्ह्ह … मेरी जान् … याद है … पिछली बार कैसे छत पर तेरी चूत चोदी थी! पुच्च पुच्च!”
“सब याद है … कुछ बिछाया भी नहीं था … पूरी छिल गई थी पीछे से!”

“सच … पुच्च् पुच्च … पर बहुत मजा आया था! सच पूछे तो तुझे चोदने बाद तेरी बहन को चोदने में बिल्कुल भी मजा नहीं आता! तुझे भी तो मजा आता है न?”
“हाँ … पर थोड़ा धीरे दबाओ … आईइ … लगती है!”

“चुदते समय तो नहीं होता दर्द तुझे?”
“उस समय तो मैं दूसरी दुनिया में होती हूँ!”

फ़िर कुछ देर शान्ति रही.

“चल अब बैडरूम में चलें!”
“अभी नहीं … भाई आने वाला होगा.”
“अभी तो दो ही बजे हैं … वो तो चार बजे आयेगा.”
“जल्दी भी आ सकता है … रात को सबके सोने के बाद आऊंगी.”
“ज्यादा नखरे मत कर!”

“मान जाओ … पूरी रात चोदना फिर!”
“तो एक जल्दी वाला राउंड कर लेते हैं … लंड भरा हुआ है … आह्ह आह्ह!”
“बीच में मत छोड़ देना मुझे!”

“आज तक छोड़ा है क्या … बहन की लौड़ी … हमेशा तेरी चूत खाली करके झड़ा है.”

फ़िर उनके जाने की आवाज आई तो मैं दौड़कर घर के पीछे पहुँच गया जहाँ की खिड़की से बैडरूम के अन्दर सब दिखता था।
दोनों एक दूसरे की कमर में हाथ डाले कमरे में आये।

ओह … ये तो समीर जीजाजी हैं … मामा की बेटी के पति … तो दीदी इनसे भी?
हे भगवान … इस लड़की ने कोई लंड छोड़ा भी है क्या!

और आते ही जीजाजी ने उसे बाँहों में भींच लिया और फ़िर उनके होठ चिपक गये।
वे हाथों से उसकी चूची, कमर व गांड को जोर जोर से भींच रहे थे।

वह बिलबिला रही थी- आह्ह्ह … ऐसे क्यों अकुला रहे हो … मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या?
दीदी हाँफ़ते हुए बोली।

और फ़िर जब जीजाजी ने उसे नंगी करना शुरू किया तो दीदी बोली- पूरे कपड़े नहीं … अभी तो ऐसे ही चोद लो … रात में चाहे जैसे चोदना!
“ज्यादा नखरे मत कर बहनचोद … अभी काफ़ी वक्त है!”

और फ़िर आनन फ़ानन दोनों नंगे हुए और कस कर फ़िर लिपट गये।

लिपटे लिपटे जीजू ने उसे पलंग पर पटक लिया और उसके ऊपर आ गये!
फ़िर रगड़ना शुरू कर दिया।

मेरी बहन भी बराबर सहयोग कर रही थी।
सात इंच का लंड चूत की गहराई नापने के लिये बेताब था तो चूत भी उसका घमंड तोड़ने के लिये आतुर थी।

“कैसे चुदवायेगी मेरी जान?”
“शुरूआत तो सीधे ही करो!”

और दीदी ने टांगें फ़ैला दी.
तो जीजू ने लंड चूत पर टिका दिया और फ़िर होठों पर होंठ जमाकर चूसना शुरू किया तो सीमा ने भी हाथ से लंड को पकड़ कर चूत पर सैट किया और चूतड़ उचकाए.

चूत ने लंड को अपने भीतर समा लिया.

फिर सीमा ने अपनी टांगों में जीजू को लपेट लिया … लंड जड़ तक समा गया।

थोड़ी देर प्यार करने के बाद जीजू ने पोजीशन ली और दनादन ठोकना शुरू कर दिया।

वह आह्ह्ह आह्ह्ह करती रही और चूत ठुकती रही.

बीच बीच में जीजू उसे चूम भी रहे थे।

दीदी भी अब गर्म हो चुकी थी।

फ़िर वे अलग हुए और उन्होंने दीदी को हाथ पकड़ कर खड़ा किया और पलंग की ओर मुँह करके झुका दिया।

दीदी ने हाथ पलंग पर जमा दिये।
उसकी चूत मेरी तरफ़ थी।

जीजाजी उसकी पैंटी से पहले चूत पौंछी और फ़िर अपने सात इंच के लंड को पीछे से चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्का दिया।
दीदी बिस्तर पर गिर गई.

“थोड़ा आराम से डालो ना जीजू राजा!”

उन्होंने उसे फ़िर उठाया और इस बार थोड़ा आराम से लंड चूत में घुसेड़ा और फ़िर चोदने लगे।

वह भी चूतड़ हिला हिला कर धक्के मार रही थी- आह्ह मेरे प्यारे जीजू … और जोर से!

“ले मेरी जान! तेरी मस्त चूत को फ़ाड डालूँगा आज!”

और इस तरह उसने पहले उसकी चूत पीछे से खूब ठोकी और फ़िर उसे सीधे लिटा कर खूब पटक पटक के चोदा।

काफ़ी देर बाद वे झड़े और फ़िर लंड डाले ही उसके ऊपर लेट गये।

मैं वापस लौट गया और फ़िर काफ़ी देर बाद आया। Antarvasna

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