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मैं अभी 47 साल का हूँ और मेरे दो बेटे हे. एक तो शहर में रहते हे और वही पर पढ़ाई करते हे. और बड़े बेटे की शादी अभी बस तिन महीने पहले ही करवाई हे मैंने. खेतो का सारा काम मेरा बड़ा बेटा अमित ही देखता हे. घर में बहु के के आने के बाद अब घर सूना नहीं लगता हे. बहु का नाम कमला हे. मैं कमला को बहु कह के ही बुलाता हूँ, और वो मुझे पिताजी कहती हे. अमित को कुछ काम से शहर जाना हुआ और बस उसके जाते ही बहुत के ऊपर मेरी नजर पड़नी शरु हुई. रमंन के जाते ही शाम को बहु अपने कमरे में सो रही थी और करवट बदलते हुए उसका लहंगा उसकी जांघो तक ऊपर आ गया था. मेरी नजर उसके ऊपर पड़ी तो ऐसे लगा जैसे लौड़े में नहीं जान आ गई हो.
थोड़ी देर के बाद बहु उठी तो मैं हर पल उसके साथ ही रहा. वो जब खाना बना रही थी तब भी मैं उसको ही देखता रहा. मैं नजरें उसके बूब्स और गांड के ऊपर टिका के बैठा हुआ था. खाने बैठे तब मैंने उसके मम्मों के ऊपर ही अपनी नजरें चिपका डाली थी जैसे. अब उसको भी पता चल गया था की मैं उसकी तरफ ही देख रहा था और वो भी बुरी नजरों से! खाने के बाद मैं बहु के साथ बातें करने लगा.
मैं: बहु मुझे आज आधी रात को खेत पर जाना होगा. नहर में पानी आया हुआ हे उसे खेतों में छोड़ के सिंचाई करनी हे. क्या तुम भी मेरे साथ चलोगी?
बहु: पिताजी इतनी रात को जाना क्या ठीक होगा? वैसे मुझे अँधेरे से बहुत डर लगता हे. और वो कह रहे थे की हमारे खेत जंगल से सटे हुए हे. रात में जा कर खतरे को मोल लेने जैसा हे. सुबह को नहीं जा सकते हे पिताजी?
मैं: नहीं बहु सुबह बहुत देरी हो जायेगी. अगर रात को पानी छोड़ा नहीं तो पानी किसी और के खेत में ले लेगा वो. और फिर हमें उसके खेत की सिंचाई पूरी ख़त्म होने की राह देखनी पड़ेगी. वैसे मैं साथ में हूँ फिर तुम्हे किसी से भी डरने की जरूरत नहीं हे. मेरी तो पूरी लाइफ ही निकल गयी इन खेतो में मैं चप्पे चप्पे से वाकिफ हूँ!
बहु: ठीक हे पिताजी, जैसे आप को ठीक लगे. मैं आप के साथ चलूंगी.
अब हम दोनों रात को घर से निकले खेतों की तरफ. 5 मिनिट चलने के बाद रास्ता और भी संकड़ा होता गया. रास्ते के दोनों तरफ जंगल था. मेरे हाथ में एक लालटेन थी.
बहु: पिताजी मुझे डर लग रहा हे.
मैं:डरो मत बहू मैं हूँ ना तुम्हारे साथ में ही. आओ मेरा हाथ पकड लो तुम.
ये कह के मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. हम दोनों थोड़ी दूर गए थे की मैं रस्ते में रुक गया.
बहु: क्या हुआ पिताजी आप रुक क्यूँ गए?
मैं: श्हह्हह्ह चूप रहो बहु. लगता हे यहाँ आसपास कोई सांप हे!
बहु को ये कहा तो वो और भी डर गई और मैंने मौके का फायदा उठाया और उसको अपने सिने से लगा लिया. अब उसके मम्मे मेरी छाती पर प्रेस हो रहे थे. मैंने दोनों हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और हाथों को पीठ पर रगड़ने लगा.
फिर मैन्स बहु के कान में कहा: बहु बस ऐसे ही शांत खड़ी रहो.
बहु: पिताजी मुझे सच में बहुत ही डर लग रहा हे.
बहु ने दबी हुई आवाज में कहा. अब मैंने अपने दोनों हाथ को उसकी गांड पर रख दिए. और मैं हाथ की हथेलियों और उँगलियों से उसकी गांड को दबाने लगा. बहु के मुहं से अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म की आवाज की और वो मेरे सिने से और भी लिपट गई.अब मैं बहु की गांड की क्रेक को अपनी ऊँगली से सहलाने लगा. ऊँगली को लहंगे के ऊपर से गांड की क्रेक मैं ऊपर से निचे तक फेरने लगा. बहु अब और मेरी पीठ पर अपने हाथ फेरने लगी, ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह पिताजी अप ये क्या कर रहे हो? सांप गया की नहीं?
मैं: लगता हे की सांप चला गया हे.
बहु: पिताजी मुझे बहुत जोर से पेशाब आया हे, लेकिन यहाँ तो सब तरफ जंगल ही जंगल हे.
मैंने अपने हाथ को उसकी गांड से हटाते हुए कहा, जंगल हे तो क्या हुआ तुम पेशाब कर लो यही पर. यहाँ पर कौन देखनेवाला हे!
बहु ने दबे हुए आवाज में कहा, जी पिताजी. और फिर उसने अपने लहंगे को उतारा और वो वही पर बैठ गई रस्ते के किनारे. उसकी चूत से निकलते हुए पेशाब की धार से मेरे लंड में जैसे और भी मस्ती चढ़ी हुई थी. उसकी धार स्टार्ट हो के रुक गई और वो 30 सेकंड तक उठी नहीं.
मैं: क्या हुआ बहुत पेशाब हुआ की नहीं?
बहु: नहीं पिताजी, डर की वजह से आधा ही हुआ और रुक गया.
मैं बहु के करीब गया और लालटेन के उजाले को उसकी चूत के ऊपर मारा. और फिर अपनी ऊँगली को मैंने बहु की चूत के ऊपर रख दिया और उसे सहलाने लगा. मैंने उसे कहा, अब कोशिश करो बहु. बहु ने अपनी आँखे बंद कर दी. मैं अपनी ऊँगली उसको चूत के ऊपर से निचे तक ररगड़ने लगा. वो सहम गई थी और ओह अहह पिताजी अच्छा लगा रहा हे ऐसे कहने लगी.
और फिर बहु का पेशाब मेरी ऊँगली के ऊपर फव्वारे के जैसे छुट गया. मैंने ऊँगली चूत पर रगड़ना चालु रखा. उसका पेशाब होते ही मैंने गमछा निकाला और उसकी चूत को पोंछ दिया. मैंने फिर उँगलियों कस दी उसकी चूत पर और जोर से मसल दिया उसकी चूत को. बहु चिल्ला उठी, अह्ह्ह्हह पिताजी! मैंने उसको साइड में लेट जाने को कहा. उसके करीब लेटकर मैंने उसके होंठो पर अपने होंठो को लगा दिया और चूसने लगा.
उसके निचे के होंठो को मैंने अपने दांतों से काट लिया. फिर मैंने उसे कहा, तुम अपनी जीभ बहार निकालो ना बहु. बहु ने अपनी जीभ बहार निकाली और मैंने अपने होंठो से उसकी जीभ का बेसवादा स्वाद चखा और फिर उसे चूसने लगा. बहु ने भी अपने दोनों हाथो को मेरी गर्दन पर डाल दिया. अब मैंने उसकी जीभ को अपने मुहं में ले लिया और अपने होंठो को जोर से बंद किया और उसकी जीभ को बहुत प्यार देने लगा. अब मैं और बहु दोनों ही अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ह्म्म्म करने लगे थे. अब बहु ने कहा, पिताजी आप का थूंक बड़ा ही स्वादिष्ट हे. मैंने कहा, मेरा तो सब कुछ स्वादिष्ट हे बहु रानी.
बहु ने कहा, तो फिर आज अपनी बहु को सब कुछ का सवाद दे दीजिये पिताजी.
मैंने अब बहु की चोली खोल दी. अब उसकी गर्दन को चुमते हुए मैं उसको जीभ से चाटने लगा. उसके मम्मो पर दोनों हाथ रगड़ने लगा. उँगलियों को कसने लगा उसके मुलायम मम्मो के ऊपर. ओह्ह्ह्ह फ्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह पिताजी और जोर से दबाओ ना, बहु ऐसे कहने लगी चुदासी आवाज में. ये सुनकर मैंने उसके मम्मो को जोर जोर से दबाना चालू कर दिया. मम्मे दबाते हुए मैंने अपनी थूंक उसके मुहं में डाल दी.
बहु ने अपनी जीभ से थूंक को स्वेलो कर लिया, अह्ह्ह अह्ह्ह पिताजी बड़ा मजा आ रहा हे!
मैंने अब उसके निपल्स को उँगलियों के बिच में रगड़ने लगा. उसके निपल्स पर चिमटी लगाने लगा. वो आह्ह्हह्ह अह्ह्ह कर के चिल्लाने लगी. अब मैंने उस से कहा, बहु जरा उठकर थूंक दो अपने मम्मो पर! उसने उठकर अपने मम्मो के अपने मुहं के करीब किया और दोनों मम्मो के ऊपर थूंक दिया. मैंने उसको फिर से लिटा दिया और अब मैं उसके दोनों मम्मो को चुसने लगा अपने होंठो से. अपने मुह को खोलकर मम्मो पर जोर से प्रेस किया और फिर मुहं को बंद कर के उसके मुलायम मम्मो को काटने लगा धीरे धीरे से. मेरे दांतों को निशान पड़ गए थे उसके मम्मो पर. उसने मुझे अपनी छाती पर जकड़ लिया जोर से. ऐसे जैसे मुझे जाने ही नहीं देना चाहती हो. फिर मैंने उसके एक निपल को चुसना चालू कर दिया, ओह पिताजी अह्ह्ह्ह चूस लो अपने बहु की चुचियों को!
मैंने उसे कहा, चूस रहा हूँ रंडी!
बहु ने कहा, आप को अच्छी लगी अपनी रंडी बहु की जवानी पिताजी?
अब मैं उसकी चुचियों पर अपनी जीभ फेरने लगा सर्कल्स में. फिर जीभ पूरी मम्मो पर फेरकर मैंने उसकी थूंक चाट ली उसके मम्मो के ऊपर से.
अब मैं थोड़ा निचे आ गया और मैंने उसके पेट को चूमना शरु कर दिया. मैंने उसके नावेल में जीभ डालकर जीभ को घुमाया सर्कल्स में और फिर नावेल पर दांत कसकर उनको काटने लगा. अह्ह्ह्हह औह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म पिताजी आप को रंडियों से खेलना खूब अच्छी तरह से आता हे. अब मैंने बहु का लहंगा निकाल लिया और उस से कहा की वो कुतिया बन जाए! बहु तुरंत अपने घुटनों के और हथेलियों के ऊपर खड़ी हो गई. मैंने उसकी कच्छी निकाली और उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा. वो मुडकर मुझे देखकर हौले से हंस पड़ी. और बोली, पिताजी कैसी लगी आप को आप की रंडी की गांड? मैंने उँगलियों को कस कर उसकी गांड पर दबाया और कहा, बहुत अच्छी गांड हे तेरी मेरी छिनाल बहुत दिनों से तेरे मम्मे और गांड ही देख रहा था मैं.
बहु ने कहा, अब से ये रंडी आप की ही हे पिताजी!
मैं उसकी गांड को दबाने लगा. फिर गांड पर जोर जोर से मुहं दबाया और उसको चूमने लगा. अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह मुआअहाआअ. फिर मैंने अपने दांत गाड़ दिए उसकी मांसल गांड के ऊपर. अब मैंने उसके चुत्त्ड खोले और उसकी गांड की छेद के ऊपर थूंक दिया. वो कांपने लगी थी. मैंने अब अपनी ऊँगली से उसकी गांड के छेद के ऊपर के थूंक को मलना चालू कर दिया.
बहु ने गांड को थोडा हिला के कहा, पिताजी मेरी गांड में अपनी ऊँगली डाल दो ना! मैंने ऊँगली को जोर जोर से छेद पर पुश किया और फिर ऊँगली डाल दी अपनी बहु की गांड में. ऊँगली को बेंड किया उसकी गांड में और फिर हिलाने लगा उसको जोर जोर से. अब ऊँगली को गांड से अन्दर बहार करने लगा था मैं.
मैंने फिर उसे कहा, अब तेरी चूत की बार हे बहु.
इतना सुनते ही उसने दोनों पैरों को फैला लिया और मेरा हाथ लेकर अपनी चूत पर रखवा दिया.
फीर वो बोली, आप की छिनाल आप के लिए सब कुछ करेगी पिताजी! जो चाहे कर लो आप मेरे स्वामी.
मैंने ऊँगली को बहु की चूत में डाली और जोर जोर से धक्का दिया अन्दर घुसाते हुए.
वो तडप उठी और अपने जिस्म को एकदम टाईट कर लिया उसने. मैंने ऊँगली को अन्दर बहार मूव किया उसकी चूत में. ऊँगली को जोर जोर से हिलाया उसकी चूत में. फिर मैंने ऊँगली उसकी क्लाइटोरिस के ऊपर रगड़ी. उसकी क्लाइटोरिस जोर से प्रेस की और ऊँगली को हिलाने लगा क्लाइटोरिस के ऊपर प्रेस करते हुए. वो आह्ह्ह अह्ह्ह ओह अह्ह्ह्हह ह्म्म्म कर के मोअन करने लगी थी. मैंने ऊँगली निकाली और उसके मुहं में डाल दी. वो मेरी ऊँगली को जोर जोर से चूसने लगी. फिर मैंने उसके पैरो में झुक के उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया. चूत पर मुहं प्रेस कर के जोर जोर से चूसने लगा मैं. वो बोली, पिताजी और जोर जोर से चाटो अपनी इस रंडी के बुर को. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह ओह मजा आ गया पिताजी इसको चटवा के!
अब मैंने अपना मुह खोल दिया और चूत पर जोर से प्रेस किया. मुह को बंद करते ही मेरे होंठो ने उसकी चूत को स्क्विज किया मुहं में. आह्ह्ह मर गई अह्ह्ह्हह ओह पिताजी आप बहुत बड़े चोदु हो अह्ह्ह्ह. मैंने अब उसकी चूत को दांतों से काटना शरु किया धीरे धीरे से. बहु आह्ह्ह अह्ह्ह्हह ओह ओह उईई माँ कह के अपनी चूत को मेरे मुहं पर घिस के चूस सेक्स का मजा ले रही थी. फिर मैंने अपनी धोती खोली. अपना लोडा निकाला और अपने टोपे के ऊपर हाथ घुमाया. लौड़े का टोपा गिला हो गया था प्री-कम से. मैंने टोपा बहु की चूत पर रगड़ा. अह्ह्ह उम्म्मम्म पिताजी मैं अब इस लौड़े की दीवानी हूँ, रोज पूजा करुँगी इस लंड की.
मैंने लौड़े को चूत में पुश किया और फिर जोर से धक्का दिया बहु की कमर को पकड़ कर.
बहु दर्द से चिल्ला उठी, अह्ह्ह्ह पिताजीईईईईईईइ अह्ह्ह्हह आप का तो बहुत बड़ा हे बाप रे, मेरी उतनी नहीं चूदी हे अह्ह्ह्ह. धीरे से करो पिताजी.
मैंने उसके बाल पकड़ के के कहा चूप कर साली हरामजादी.
मैंने अब उसकी चूत को चोदना चालू कर दिया. लौड़ा अन्दर बहार हो रहा था. सन्नाटे में चुदाई की आवाज साफ़ साफ सुनाई दे रही थी. ठप ठप ठप, जांघो के लड़ने से और चूत और गांड के संगम स्थान से चिपचिपी आवाजें आ रही थी. मेरा पूरा लोडा उसकी चूत में घुस के बहार होता था जिसे मैं फिर से वापस अपनी बहु की चूत में डाल देता था. बहु ने निचे जमीने के ऊपर की सुखी हुई घास को पकड़ा था और वो भी अपनी गांड को हिला के मेरा लंड ले रही थी अपनी चूत के अन्दर. वो अपनी कमर हिला रही थी मेरे झटको के साथ में. मैंने लौड़ा अन्दर तक डाल के उसे एकदम जोर जोर से चोदा. मेरे लौड़े का टोपा उसकी चूत के मसल को हिट कर रहा था एकदम जोर से. वो अब मजे से चिल्ला रही थी, और जोर जोर से चोदो मुझे पिताजी! मैंने उसके ऊपर झुक गया थोडा सा और उसके मम्मो को पकड कर दबाने लगा जोर जोर से. फिर मैं रुक गया और जोर से पुश किया अपने लौड़े को बहु की चूत के अन्दर. उसके मम्मे एकदम जोर से मसल दिए और मेरा लावा उड़ेल दिया उसकी चूत के अंदर ही मैंने!
कुछ देर तक बहु की चूत में लंड को रहने दिया. फिर मैंने अपना लोडा बहार निकाला और बहु को दे दिया. उसने मुझे खींचकर अपने ऊपर लिटा दिया. कुछ सेकंड्स के बाद वो बोली, बाबु जी आप मेरी चूत में ही झड़ गए हो, कहीं मैं पेट से हो गई तो? मैं बोल पड़ा, तो क्या तुम मेरे लंड से संतान नहीं चाहती हो! वो बोली, आप को कोई दिक्कत तो नहीं हे ना इसमें? मैंने कहा, मैं तो अब तुझे रोज चोदुंगा घर पर और अपने पोते को खुद पैदा करूँगा! वो बोली, फिर तो मैं आप के वीर्य से ही बालक पेदा करुँगी पिताजी.
मेरा नाम अरुण शर्मा है मैं Sex Stories रायपुर में रहता हूँ, मैं रायपुर एक साल पहले ही आया हूँ। इस से पहले मैं उड़ीसा में रहता था उड़ीसा में मेरी एक गर्लफ्रेंड है उसका नाम श्वेता है। मेरा उसके साथ पाँच साल से चक्कर है वो भी मुझे बहुत प्यार करती है। मैं आप को अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई के बारे में बताता हूँ।
बात एक साल पहले की है जब उसका मुझे फ़ोन आया, उसने कहा- जब से तुम गए हो मुझे तुमसे मिलने का बहुत मन कर रहा है तुम मुझ से मिलने आओ ना!
तो मैंने कहा ठीक है मैं रविवार को उड़ीसा आऊँगा, तुम मुझे मेरे दोस्त के घर पे मिलने आ जाना।
तो उसने हामी भर दी- मैं तुम से दोपहर 2:30 को मिलूँगी।’
मैंने कहा- ठीक है।’
वो दोपहर ठीक 2:30 को आ गई। मैंने उसे देखा, वो नीले रंग की टॉप और सफ़ेद रंग की स्कर्ट पहन कर आई थी। मैं तो उसे देखता ही रह गया, क्योंकि आज वो कुछ ज्यादा ही ख़ूबसूरत लग रही थी।
मैंने कहा अन्दर आ जाओ, वो अन्दर आई। वहाँ पर मेरा फ्रेंड भी था, उसने कहा- अरुण मुझे ज़रा काम है, मैं 2 घंटे में आता हूँ।’ कह कर वो चला गया अब कमरे में सिर्फ़ मैं और श्वेता ही थे। मैंने उससे कहा- बैठो श्वेता, मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लाता हूँ,’ तो उसने कहा- तुम यहाँ बैठो, मैं लेकर आती हूँ।’
पाँच मिनट के बाद वह चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ कर कहा- जान, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।’ उसने कहा- जानती हूँ, तभी तो आई हूँ।’
फिर मैंने धीरे से उसके कान में कहा- जान मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ,’ तो उसने कहा- ठीक है, कर लो, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं करना’ तो मैंने ‘ठीक है’ कहते हुए उसके नाज़ुक होठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा।
वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। तभी मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, अबकी बार उसने कुछ नहीं किया। मैं समझ गया वह गरम हो रही है।
अब मैंने अपना एक हाथ उसकी पैण्टी में डाल दिया, उसकी पैण्टी गीली थी। मैंने पूछा कि ये गीला क्यों है?
उसने कहा- तुम बस मुझे किस करो, इतने सवाल मत करो।
मैंने कहा- जान मैं तुम्हारा शरीर देखना चाहता हूँ’ तो उसने ना कर दिया। मैंने उसे मनाने की बहुत कोशिश की तब जाकर वह मानी, कहा- सिर्फ देखना, कुछ करना नहीं।’
मैंने कहा- तेरी कसम, कुछ भी नहीं करूँगा। फिर मैंने उसकी टॉप उतारी, उसने नारंगी रंग की ब्रा पहन रखी थी। मैंने उसकी ब्रा भी उतारी, ब्रा खोलते ही उसकी चूची मेरे हाथ में आ गई। मैं उसकी चूचियों को किस करने लगा तो वह पागल होने लगी। फिर मैंने उसकी स्कर्ट भी उतार फेंकी
अब वह सिर्फ नारंगी रंग की पैण्टी में थी, मैंने धीरे से वो भी उतार दी। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था। उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे। मैंने उसकी चूत पर जैसे ही हाथ रखा, वह सिटपिटा कर उछल पड़ी। फिर मैं उसे किस करने लगा, उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। उसने कहा- आज मुझे मत छोड़ो, आज जो करना है कर लो.
तो मैंने कहा- जान, तुमने ही तो मना किया है।
इस पर वो बोली- उस बात को भूल जाओ, सिर्फ मुझे याद रखो, और जो करना है कर लो।
उसकी बात खत्म होने से पहले ही मैंने उसकी चूत में अपनी एक उँगली डाल दी, वह चिहुँक उठी- दर्द हो रहा है।’
तो मैंने कहा- जान पहली बार ज़रा दर्द होता है तुम अगर मुझसे प्यार करती हो तो आज दर्द सहन करना ही पड़ेगा।’
उसने कहा- ठीक है।
फिर उसने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी छाती पर चूमने लगी, और बाद में उसने मेरी पैन्ट भी उतार दी, लगे हाथ अण्डरवियर भी उतार दिया- इतना बड़ा मैं कैसे लूँगी?
मैंने कहा ‘तू बस देखते जा, तुझे तो ये भी कम पड़ेगा।
फिर मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और पलंग पर ले जाकर उसे लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो मदहोश हो रही थी, और चिल्ला रही थी- अब चोद दो मुझे, घुसाओ ना जल्दी।’
मैंने कहा- अभी नहीं, रानी, पहले तू मेरे लंड को तो मुँह मे ले।’ उसने देर न करते हुए मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। दस मिनट में मेरा माल निकल गया।
मैं उठा और जाकर अपने लंड पर तेल लगा कर आया और पलंग पर आकर बैठ गया, वो मेरे लंड से खेलने लगी। मैंने कहा- अभी खेल ले, थोड़ी देर में तू रोएगी।’
उसने भोलेपन से पूछा- क्यों रोऊँगी?’
मैंने कहा- बस अभी पता चल जाएगा।’ मैं उसकी पाँवों के बीच में आ गया और उसके दोनों पैरों को ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुहाने पर रखा, जैसे ही घुसाने के लिए आगे बढ़ा तो बोली- दर्द हो रहा है।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रखे, क्योंकि अब उसका मुँह बन्द था, मैंने एक ज़ोर का झटका मारा तो उसकी आँखों में आँसू भर आए, वो मुझे धक्का देने लगी।
अबकी बार मैंने और ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसा गया, वो रो रही थी। मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा, वो मुझसे कह रही थी, प्लीज़ मुझे छोड़ दो। मैंने कहा- आज करने दे दिया, फिर पता नहीं तुमसे कब मिलूँगा, कुछ तो तुम्हे याद रहना चाहिए।’
उसने कहा- ठीक है, लेकिन धीरे-धीरे करो न,’ मैं बोला- ठीक है मेरी रानी, धीरे-धीरे करता हूँ। करीब पाँच मिनट तक मैं उसे धीरे-धीरे चोदता रहा, फिर उसने कहा- अच्छा लग रहा है।’
उसे मज़ा आने लगा था। वह और ज़ोर से, और ज़ोर से कहकर चिल्ला रही थी। मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो! की रट लगा रही थी। मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा। फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लंड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया।
उसने कहा- यह क्या कर दिया, मैं तो गर्भवती हो जाऊँगी।’
मैंने कहा- चिन्ता मत कर, मैं तेरे लिए ई-पिल ला दूँगा, उसे खा लेने से कुछ नहीं होगा।’
वो बोली- ठीक है, शाम को ला देना।’
मैंने कहा- मैं एक बार और भी करूँगा।’ तो बोली- नहीं आज लेट हो गया है।’
मैंने कहा- एक बार और जान, मैं कल चला जाऊँगा।’ आग्रह करने पर वह मान गई, बोली- ठीक है, लेकिन जल्दी करना।’
मैंने भी कहा- ‘ठीक है।’
रानी को उस दिन मैंने ती बार चोदा और मैं जब भी उड़ीसा जाता हूँ, उसे ज़रूर चोदता हूँ। और मैंने किस प्रकार उसकी गाँड मारी, ये अगली कहानी में बताऊँगा। Sex Stories
बात उस वक्त की है जब मैं १९ साल Hindi Porn Stories का था, और कॉलेज में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक लड़की थी, वह भी मेरे ही कॉलेज में पढ़ती थी। उसका नाम आंचल था, वो बहुत ही सुन्दर थी। मैं जब भी उसको देखता तो मेरा लण्ड जोश में आ जाता। मैं मन ही मन उसे चोदने की इच्छा रखता था, वो भी मुझे अक्सर देखा करती थी।
एक दिन उसके घर कोई नहीं था, वो छत पर खड़ी थी, तो मैं भी उसकी छत पर जा पहुँचा, और सीधे जाकर उससे बोला “मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ, अगर तुम बुरा न मानो तो…”
“जो भी कहना चाहते हो बोल दो,” उसने प्रत्युत्तर में कहा।
“तुम मुझे अच्छी लगती हो, और मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ,” मैंने पहले थोड़ा सकुचाते हुए कह ही डाला।
यह सुनकर वो मेरे चेहरे को गौर से देखने लगी। मैं डर गया कि पता नहीं वह क्या करेगी।
उसने कहा – “चलो, नीचे चलो, आज घर पर कोई भी नहीं है,” तो मैं उसके साथ नीचे आ गया।
नीचे आते ही वह मुझसे लिपट गई और बोली, “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन चाहती थी कि तुम्हीं पहले बोलो।”
मुझे तो मानों जन्नत मिल गई, मैं समझ गया कि वो भी चुदासी हो रही है। फिर मैंने देर न करते हुए अपने होंठ उसके होठों पर रख दिये। उसने कुछ नहीं कहा, बल्कि वो मेरा साथ देने लगी। उसके हाथ अब मेरी गर्दन पर लिपट गये, इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने झट से अपना एक हाथ उसकी एक चूची पर डाला और धीरे-धीरे दबाने लगा। वो भी गरम होती जा रही थी। मैंने उससे कहा कि जब हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते ही हैं तो क्यों ना एक दूसरे में समा जाएँ। तो उसने उत्तर दिया, “हाँ, चलो दो जिस्म, एक जान हो जाएँ।”
इतना कह कर वो मेरी पैंट खोलने लगी, और मैंने उसकी सलवार खोल दी। अब हम लोग बिस्तर पर आ गए, फिर मैंने खुद ही अपनी कमीज भी उतार दी, और उसका सूट भी। अब मैं सिर्फ बनियान और अण्डरवियर में था और वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में। वो थोड़ा शरमाने लगी, मैंने कहा नहीं जान, शरमाना नहीं, और यह कहते हुए मैंने अपनी बनियान और अण्डरवियर भी उतार फेंकी।
चूँकि मैं काफी से देर से उसके होठों को चूस रहा था तो मेरा ७ इंच का लण्ड पूरी तरह से खड़ा था जिसे देखते ही वो बोली कि नहीं इसे मैं नहीं ले पाऊँगी, मैं दर्द से मर जाऊँगी। मैंने उसे समझाया कि नहीं कुछ नहीं होगा। काफी समझाने के बाद वह तैयार हो पाई। अब मैंने अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया, वो सहलाने लगी, और इधर मैंने उसकी चूचियाँ चूसनी शूरू कर दीं।
वह भी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी, मैंने एक ऊँगली उसकी चूत में डाली, वो काफी चिकनी-चिकनी थी। मैं समझ गया कि वो चुदने को बिल्कुल तैयार है। मैंने उसे अपना लण्ड चूसने को कहा तो वह मना करने लगी। लेकिन मैंने जब बहुत मनाया तो वह मान गई और मेरा लण्ड उसने अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा, मुझे काफी आनन्द आ रहा था।
थोड़ी बाद जब मुझे लगा कि मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा तो मैंने अपना लण्ड निकाल लिया, और उसे सीधा लिटा दिया और उसकी दोनों जाँघों के बीच आ गया, और अपने लण्ड का टोपा उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी। मैंने मौका देख कर एक जोर का धक्का मारा तो मेरा लण्ड उसकी चूत में तीन इंच अन्दर उतर गया, वो चिल्लाई… निककककककाकालललोओओओओ…. फट गईईईईईईई… हाय मैं मगर गईईईईईई। लेकिन मैंने उसकी कमर कस के पकड़ रखी थी। एक मिनट रूकने के बाद मैंने फिर जोर से धक्का मारा तो मेरा पूरा 7 इंच का लण्ड उसकी चूत में धँस गया, और मैं उसके ऊपर लेट गया। वह मुझे अपने ऊपर से उतारने का प्रयास करने लगी। उसकी आँखों में आँसू छलक पड़े, लेकिन मैं उसके होठों को अपने होठों में लेकर पीने लगा।
थोड़ी देर ऐसे ही उसके होठों को पीता रहा और जब वो सामान्य लगी तो धीरे-धीरे धक्के मारने चालू कर दिये। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि उसके हाथ मेरी कमर पर कसने लगे हैं तो मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ानी शुरू कर दी, अब वह भी बोलने लगी कि हाय मेरे सरताज़… डालो… और थोड़ा सा अन्दर करो… बहुत अच्छा लग रहा है… तो मैंने भी धक्कों की गति और बढ़ा दी।
जब मैंने देखा कि वह बहुत मज़े ले रही है, तो मैंने अपना लण्ड एकदम से बाहर खींच लिया, तो वह पूछने लगी, क्यों निकाल लिया, मेरी जान डाल भी दो ना अच्छे से…, तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा, तो वह तुरन्त ही घोड़ी बन गई। अब मैंने पीछे से लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा।
थोड़ी देर बाद ही वह कहने लगी… हायययययय…. मैं गईईईईईईईई… हाययययययय्य्य डाल दो पूरा अन्दर। मैंने भी ज़ोरों के धक्के मारने जारी रखे। अचानक मैंने देखा कि उसका शरीर अकड़ गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लेकिन मैं अभी झड़ने के करीब नहीं आया था, मैंने फिर से उसे सीधा लिटाया और उसकी चूत की सवारी करने लगा। मैं धक्के मारता रहा, अब वो मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी, लेकिन मैंने धक्के लगाने चालू रखे, तो दो मिनट के बाद ही वो फिर से मेरा साथ देने लगी। अब उसे दुबारा से मज़ा आने लगा था।
मैंने अपनी गति फिर से बढ़ा दी, अब वह फिर से बोलने लगी कि और डालो जानूँ… और डालो। मैं भी से अच्छे से पेलता रहा, फिर थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने उसे यह बताया, तो वह बोली कि अन्दर ही झड़ना, आज हमारी सुहागरात है, और मैं तुम्हारा रस अपने अन्दर ही डलवाना चाहती हूँ। तो मैं जोश में आ गया, और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत की गरमी निकालने लगा। इसके एक मिनट बाद ही उसकी बाँहें फिर से मेरी कमर पर कस गईं, और मैं समझ गया कि वह फिर से झड़ गई है। अब मैंने भी आठ-दस लम्बे-लम्बे से धक्के मारे और मैं भी उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया। मेरे लण्ड ने भी उसके अन्दर पिचकारी छोड़ दी।
उस दिन दोस्तों, मैंने उसे पाँच बार चोदा, और हमारा चुदाई का यह सिलसिला चालू हो गया। मैं उसे आज तक चोद रहा हूँ, हालाँकि उसकी शादी हो चुकी है, लेकिन फिर भी जब भी मौका मिलता है, वह मुझसे चुदवा लेती है।
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