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हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम श्याम है, मैं बाड़मेर का रहने Sex Stories वाला हूँ। मैं हमेशा जब भी फ्री रहता हूँ अन्तर्वासना की कहानियाँ जरूर पढ़ता हूँ। और कहानी पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि मुझसे कोई लड़की कयू नहीं सेक्स कराती है, मुझे में कोई कमी भी नहीं, मैं 5’10” स्मार्ट लड़का हूँ और किसी भी लड़की को सेक्स में सैटिस्फ़ाई करने में एकदम सक्षम हूँ। लेकिन मुझे लगा कि मेरे पास लड़कियों को पटाने की हिम्मत नहीं, एक डर रहता था मुझे कि कहीं कोई लड़की मुझे मना ना कर दे वरना मेरा दिल टूट जाएगा।
मेरी उमर 27 साल है एकदम हट्टा कट्टा जवान लड़का हूँ। जब मैं दस साल का था तब से किसी लड़की के साथ सेक्स करने का सपने देखा करता था। मैंने बहुत सारी सेक्स बुक्स पढ़ी और सेक्स मूवी देख कर एक ही सपने देखा करता था कि काश उस लड़की के साथ मैं सेक्स कर रहा हूँ। लेकिन सपनों को सच होने में पूरे 14 साल लगे।
यह मेरी पहली कहानी है और अब आप के सामने है जल्दी और भी कहानी आपके सामने आने वाली है तो कहानी का मजा लो दोस्तो।
मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मैं पिछले 6 सालो से चैटिंग कर रहा हूं लेकिन कोई लड़की मुझसे पटती ही नहीं थी। सब लड़कियों को सेक्स चैट पसंद था जो मुझे एकदम पसंद नहीं था। तब एकदम चमत्कार हुआ एक बहुत अच्छी लड़की मेरी दोस्त बनी, वो अमेरिका रहती थी और एक भारतीय थी जिसका नाम नैना था जो दिल्ली की रहने वाली थी। वो बहुत सुन्दर और स्मार्ट लड़की थी। वो इतनी सु्न्दर थी कि जब मैंने कैम में उसको पहली बार देखा तो देखता रह गया और कब मुझे वो पसंद आने लगी मुझे पता तक नहीं चला।
वो 33 साल की एकदम बेहद सेक्सी शरीर की मालकिन थी, उसके 3 बच्चे थे लेकिन कहीं से भी वो 3 बच्चों की माँ नजर नहीं आती थी, जब वो स्टाईलिश कपड़े पहन कर कैम के सामने आती थी तो दिल करता था कैम से निकाल कर चोद दूँ। लेकिन यह सब बहुत मुश्किल था।
हम दोनों को बाते करते हुय 6 महीने हो गये।
फिर एक दिन उसने कहा- मैं अपने पति से और बच्चों से खुश नहीं ! हमेशा अकेली घर में पड़ी रहती हूं, मुझे कोई समझने वाला नहीं ! बस तुम मुझे समझ सके, मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ और सपने देखती हूं कि तुम मुझे खुश कर रहे हो !
मैंने पूछा- वो कैसे?
तो वो बोली- तुमने मुझे रात सपने में खूब चोदा और मुझे एकदम खुश कर दिया।
मेरी हिम्मत बढ़ गई ऐसा सुन कर ! मैंने कहा- मैंने तुम्हारे साथ सपने में क्या किया?
तो उसने कहा- तुम बहुत सेक्सी हो। मैं रात में सोई हुई थी एकदम अकेले अपने नाईट गाऊन में, तुम मेरे रूम में आये और मेरे पास आकर लेट गये, मैं बहुत गहरी नींद में थी। तु्म मेरे गाऊन के अन्दर हाथ डाल के मेरे चुच्चों को मसलने लगे। तुमने देखा कि मेरी नींद नहीं खुली तो तुम मुँह में लेकर मेरे उरोज चूसने लगे और दबाने लगे, मैं मदहोश होने लगी और मेरी नींद टूट गई। तुम एकदम सकपका गये लेकिन डरे नहीं और बूब्स को दबाते रहे, तुम्हें मजा आ रहा था।
मैंने कहा हां मुझे बूबस बहुत पसंद है और वो भी बड़े बड़े। वैसे तुम्हारे कितने बड़े हैं?
तो वो शरमा के बोली- तुम यकीन नहीं करोगे !
मैंने कहा- बोलो तो !
तब उसने कहा- 40 डी।
मैंने कहा- डी का मतलब?
तो वो बोली- यहां उसमें ऐसे ही साईज चलते हैं लेकिन तुम इतना जान लो यह बहुत बड़े होते हैं बस !
अंधे को क्या चाहिए दो आंखें ! मैं बहुत खुश हो गया, मैंने कहा- फिर आगे?
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उसकी बातें सुन कर और सोच भी रहा था कि काश यह सब सच में हो जाये।
फिर उसने कहा- तुम मेरे पूरा बदन पर जबरदस्त किस करने लगे ऊपर से लेके नीचे तक। फिर तुम बूबस को छोड़ कर मेरी चूत में अपने मुँह को ले के चले गये और अपनी जुबान से उस को प्यार करने लगे। मैं एकदम मदहोश होने लगी और गरम होने लगी, मुझे पहली बार किसी ने चूत पर जु्बान से प्यार किया था फिर मैंने तुम्हारे सारे कपड़े निकाल दिये और तुम अब मेरे सामने एकदम नंगे खड़े थे और मैं झट से तुम्हारे लन्ड को अपने हाथ में ले के उस को अपने हाथ से हिलाने लगी फिर कुछ देर बाद मुह में डाल के चूसने लगी तुम बहुत बेताब होने लगे तो मैंने कहा मेरे राजा अब तो दिखा दे अपनी रानी की चूत पर अपने लन्ड का कमाल।
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2 मिनट ही हुए थे कि तुम जोर से बोल पड़े राजा मेरा पानी आने वाला है। तो मैंने कहा मेरे श्याम रानी मेरी चूत में ही सब जाने दो और तुम्हारा गरम गरम पानी मेरी चूत में निकल गया लेकिन तुम्हारा लन्ड अभी तक सख्त था और एकदम लोहे कि राड की तरह गरम और हार्ड। मैं लगातार तुम्हारी चुदाई में लगातर करने में लगी रही। करीब 5 मिनट बाद मेरा पानी भी निकल पड़ा, लेकिन तुम जब तक और होट हो गये फिर तुमने मुझे डोगी बना दिया और मेरे पीछे आके मेरी गाण्ड में तुमने थूक मारा और लन्ड को घुसाने की कोशिश करने लगे। लेकिन तुम्हारा लन्ड अन्दर नहीं जा सका। तब तुमने मेरी गाण्ड में तेल लगाया और फिर एक जोर का झटका मारा तो तुम्हारा थोड़ा लन्ड अन्दर चला गया। मैं बहुत जोर से चिल्लाई- आह जालिम ने मार डाला। बहुत दर्द होने लगा था। खून तक आ गया था लेकिन तुम एकदम जालिम बन गये थे। तुमने मुझे चोदना छोड़ा नहीं मेरे दर्द कि परवाह तक नहीं की उल्टा बोला कि यह दर्द तो कुछ देर का है। मजे तो फिर जन्म जन्म के हैं। बस तुम अपने काम में लगे रहे कुछ देर दर्द रहा भी। मुझे बहुत मजा आने लगा था।
करीब 10 मिनट के बाद तुम्हारा सारा पानी मेरी गाण्ड में निकल गया और तुम पसीने पसीने हो रहे थे। फिर तुम कुछ देर मेरे ऊपर ऐसे ही लेटे रहे। मुझे सच बहुत अच्छा लग रहा था।
उस का सपना सुन कर मैं सोच रहा था कि काश यह सपना सच हो जाये। मैंने उस से पूछा कि तुम सच में मेरे साथ सेक्स करना पसंद करोगी?
तो वो बोली- हाँ जालिम ! वरना मैं तुम्हें अपना यह सपना क्यों सुनाती।
बस दोस्तो ! यहां से मेरे अच्छे दिन शुरू हो गये। मैंने पूछा तुम इन्डिया कब तक आ रही हो? तो वो बोली- मेरे राजा एक हफ़्ता और इन्तजार, फिर हम दोनो एक हो जाएंगे हमेशा के लिये।
तो दोस्तो ! यह थी मेरी पहली डार्लिंग नैना की जुबानी उस की चुदाई की कहानी जो अभी तक सिरफ़ सपना है जल्दी ही सच होने वाली है और मेरी किस्मत खुलने वाली है।
नेक्स्ट वीक जब नैना आई तो उस के साथ जो कुछ भी मैंने किया वो अगली कहानी में तो ज्यादा इन्तजार नहीं कराऊंगा जल्दी ही वो कहानी आप के सामने होगी। Sex Stories
आशु वैसे तो छोटे शहर से था, पर अपने कॉलेज में फुटबाल टीम का केप्टन था।
बाद में उसने एक जिम भी जॉइन किया और धीरे धीरे उस ज़िले के नामी जिम में वो ट्रेनर बन गया।
गोरा चिट्टा, लंबा कद, कसा हुआ कसरती बदन, घुँघराले काले बाल और पठानों वाली तहजीब।
कुल मिला कर आशु एक पढ़ा लिखा बांका गबरू था, जिसकी रगों में तहजीब और नफासत थी।
लेकिन घरेलू कलह से आजिज़ आकर वह नॉयडा आ गया.
उसने नोएडा आकर यहाँ सभी तरह के काम करने के लिए अपने को तैयार किया।
सुबह पाँच बजे उठकर वो पास वाली सोसाइटी में जाता और गार्ड रूम में रखी 10-12 बाल्टियों में पास की डेयरी से अपने सामने कढ़वा कर दूध लाता और फिर उन्हें फ्लैट्स में पहुंचाता।
अक्सर कुछ फ्लैट वालियाँ उससे नाश्ते का कुछ न कुछ सामान मँगवाती तो वो उनको लाकर देता।
फिर उन्हीं फ्लैट्स के मालिकों की गाड़ियाँ धोकर 9 बजे तक तैयार कर देता।
उसके बाद कहीं उसे फुर्सत मिलती अपनी चाय पीने की।
वो काम इतना मन लगाकर और तसल्लीबक्श करता कि उससे सभी मेमसाब बहुत खुश रहतीं।
आशु ने अपने शहर में पढ़ाई के दौरान ही दोस्त से ड्राइविंग भी सीख ली थी।
एक दो महीने टॅक्सी भी चलायी तो उसे गाड़ी चलाने की प्रैक्टिस तो हो गयी थी।
अब उसे नोएडा रहते दो साल होने को आए तो वो यहाँ के लोगों के तौर तरीकों और मेमसाब लोगों को इम्प्रेस करने के तरीकों से अच्छा वाकिफ हो गया था।
पर जिंदगी उसे जिस ओर मोड़ रही थी, ऐसा उसने सोचा भी नहीं था।
उसे भी अब हवा लग गयी थी। उसके पास बढ़िया स्मार्ट फोन था जिस पर वो सभी मेम साब लोगों से व्हाट्सएप्प पर संपर्क में रहता।
मेमसाब लोग भी उससे अपने सभी काम करवातीं और उसे कपड़ों, खाने और पैसों से नवाजती रहतीं।
चूंकि आशु के सलीके और पहनावे को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो मात्र एक सफाई करने वाला लड़का है, तो मेमसाब लोग उसे अपने साथ गाड़ी चलाने से लेकर शॉपिंग में समान उठाने तक ले जातीं।
दिल्ली में तो वैसे भी काम निकालने के लिए सिर पर चढ़ा कर रखते हैं, तो लेडीज आशु को अपने साथ ही रेस्तराँ में खिला पिला भी देतीं।
सभी लेडीज आशु के साथ बहुत कम्फर्ट फील करती थीं।
सुबह जब आशु उनके फ्लैट में दूध देने जाता तो उस समय लेडीज ऐसे कपड़ों में दरवाजा खोलती कि आशु भी निगाहें नीची कर के बाल्टी पकड़ा देता।
पर हाँ … आशु और उनकी मुसकुराती हुई गुडमॉर्निंग जरूर होती।
उन लेडीज के क्लीवेज की गहराई और उसमें से झाँकते मम्मे, निप्पलों की नोकें और मटकती गांड, इन सबका अंदाज़ उनके लेडीज टेलर के अलावा सिर्फ आशु को था।
आशु रात को सोते समय मूठ मारते समय उन्हीं सबको याद करता।
अब आशु उनके मज़ाक़ों में भी शामिल हो जाता।
लेडीज को एक दूसरे की बुराई करने और राज़ जानने का बहुत शौक होता है।
तो आशु मियां इसका पूरा फायदा उठाते।
वो एक दूसरे की बातें बड़ी नमक मिर्च लगा कर गपियाते. पर आशु ने किसी के राज़ कभी किसी से शयर नहीं किए।
इसीलिए सभी लेडीज का उस पर बहुत विश्वास हो गया था।
आजकल हाईसोसाइटी कि लेडीज के अपने किस्से होते ही हैं।
तो आशु सबका राज़दार होता।
कौन मेमसाहब का अफेयर किस्से है, कौन मेमसाब छिपकर स्मोक या ड्रिंक करती है, किसकी अपने पति से कब और क्यों लड़ाई हुई, किसके पति का कहाँ चक्कर चल रहा है, किस मेमसाब का किससे नैनमटक्का होता है, यह सब जानकारी आशु को सबसे ज्यादा होतीं।
एक दिन उसे 109 नंबर वाली रेखा मेमसाब का मेसेज आया कि क्या वो कल दिन के लिए खाली है, उन्हें अपने फ्लैट की सफाई करवानी थी, वो सुबह उससे मिल ले।
रेखा लगभग 35 साल की बहुत हंसमुख और अच्छे स्वभाव की फेशनबेल महिला थी।
उनका एक ही बेटी थी जो बाहर किसी बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी।
रेखा के पति अविनाश उससे बिलकुल उलट साँवले और साधारण व्यक्तित्व के व्यक्ति थे।
वो बड़े अधिकारी थे, अक्सर बाहर दौरों पर रहते।
जब वो यहाँ होते तो हर रात रेखा कि उनसे सेक्स को लेकर कहासुनी होती और फिर रेखा उनसे जबर्दस्ती सेक्स करवाती।
ये भी चर्चे थे कि अविनाश के दौरों पर उनके साथ उनकी एक कलीग जाती है जिसके साथ उनका चक्कर है।
हालांकि अविनाश रेखा के इस इल्ज़ाम को कोरी बकवास कहते।
अब रेखा का साफ फंडा था कि पति सिर्फ ढेर सारा पैसा कमा कर देता रहे और जब मौका हो उसकी बेड पर चुदाई सही से कर दे।
बाकी घर के बाहर वो कुछ भी करे।
अविनाश भी बजाए अपनी सफाई देने के रेखा की जेब पैसों से और उसकी चूत अपने माल से भर कर अपनी जान बचाते रहे।
रेखा को सिगरेट का शौक था, पर ये बात रेखा के अलावा सिर्फ उसकी बेटी या आशु जानता था।
अपने को रेखा खूब मेंटेन रखती।
जब रेखा अविनाश से लड़ती तो दूर खड़ा आशु सोचता कि इतनी खूबसूरत बीबी से अविनाश साहब की पटती क्यों नहीं।
आशु को तो 115 नंबर वाली मोनिका मेम ने चटकारे लेकर रेखा और अविनाश के किस्से बताए, इस गरज से कि कुछ आशु भी उन्हें बताए, पर आशु घाघ था, वो सुम्म मार जाता, जैसे उसे कुछ मालूम ही नहीं।
मोनिका खुद बहुत सेक्सी थीं।
वो जब नीचे पार्क में अपनी सहेलियों के बीच बैठी होती तो बताती कि रेखा और अविनाश का झगड़ा चुदाई को लेकर ही होता है।
रेखा चाहती है कि जब भी अविनाश यहाँ हों उसकी जम कर चुदाई करें, और अविनाश बस एक बार में ही थक कर सो जाते।
मोनिका और रेखा के बीच अश्लील किताबों और विडियोज़ का आदान प्रदान खूब होता था।
खैर जब अगली सुबह आशु 109 नंबर दूध की बाल्टी देने गया तो रेखा ने दरवाजा खोलते हुए कहा- आशु, सभी को दूध देकर मेरे पास होते जाना।
आशु पंद्रह मिनट बाद ही रेखा मेमसाहब के फ्लैट में पहुँच गया।
अविनाश बाहर जाने को तैयार खड़े थे, वो दो दिन के लिए अरुणाचल प्रदेश जा रहे थे।
आशु ने उनका सामान ले लिया और नीचे खड़ी टेक्सी में रख कर वापिस आया।
रेखा रोज की तरह लापरवाही से शॉर्ट्स और टी शर्ट पहने सिगरेट का धुआँ उड़ा रही थी, उसके शरीर की बनावट पूरी अंदर से झांक रही थी।
टेबल पर बैठे बैठे रेखा ने उसे चाय का कप दिया और बैठने को कहा।
वो बोली कि आज पूरे टाइम आशु उसके साथ रहे।
रेखा ने आशु को कुछ बोलने ही नहीं दिया और जबर्दस्ती दो हज़ार का नोट उसकी जेब में रख दिया।
अब आशु क्या कहता … उसने पूछा कि काम क्या है?
तो रेखा बोली कि घर साफ करवाना है, फिर शॉपिंग करनी है। अकेले उससे होगा नहीं।
रेखा ने उसको बोल दिया कि वह सुबह 9 बजे आ जाये और रात को देर भी हो सकती है, खाने की वो चिंता न करे।
आशु को ये मेमसाब अच्छी भी बहुत लगती थीं क्योंकि सोसाइटी में सबसे ज्यादा अच्छे से उससे वो ही बात करती थीं।
चाय पीकर आशु फटाफट चला गया और सारी गाड़ियाँ साफ कर के नहाकर रेखा के फ्लैट पर आ गया।
रेखा वैसे ही कपड़े पहने थी।
उसने आशु को सेंडविच और चाय दी।
नाश्ता करके आशु लग गया सफाई में। रेखा भी उसकी मदद करने लगी।
आशु ने कहा कि धूल धक्कड़ से आप दूर रहो।
पर रेखा नहीं मानी।
आशु साफ सुथरा ट्रेक सूट पहने था तो रेखा ने उससे कहा- ये कपड़े तो तुम्हारे गंदे हो जाएँगे, रुको मैं साहब के कोई कपड़े देती हूँ।
अब कहाँ अविनाश भारी शरीर के कहाँ आशु लंबा पतला समार्ट।
खैर रेखा ने उसे एक बरमुडा और टी शर्ट दी तो आशु ने जैसे तैसे पहन लिया।
अब आशु को डर था कि कहीं बरमूडा खिसक न जाये। वो तो नीचे अंडरवियर भी नहीं पहने था।
आशु का कसरती शरीर स्लीवलेस टी शर्ट से बाहर निकला पड़ रहा था।
रेखा उसे देख कर खूब हंसी।
आशु ने सीढ़ी पर खड़े होकर पंखे, ट्यूब लाइट, झूमर वगैरा साफ किए तो नीचे से रेखा ने उसकी सीधी को पकड़े रखा।
नीचे से रेखा को आशु का मोटा लंड बरमूडा में साफ दिख रहा था।
रेखा को मस्ती छाने लगी। उसके दिमाग में सेक्स का कीड़ा कुलबुलाने लगा।
नीचे कार्पेट उठाने में आशु ने रेखा की मदद चाही तो रेखा ने झुक कर कार्पेट उठाते समय अपने मम्मे आशु को दिखा दिये।
आशु ने मम्मे देख तो लिए पर वो रेखा मेमसाहब की नीयत से अंजान था तो मासूम बना रहा।
उसे लगा कि वो बहुत लापरवाह औरत है।
अब तो रेखा उससे बार बार टकराने का ड्रामा करती रही।
बेडरूम की सफाई में आशु को बेड के नीचे से कल रात का इस्तेमाल किया हुआ कंडोम मिला जिसे उसने बड़ी होशियारी से रेखा से छिपा कर कूड़े में रख लिया।
पर फिर भी उसका रेपर तो रेखा ने ही बड़ी बेशर्मी से उठाया।
बेडरूम साफ करते समय रेखा तो टांगें फैला कर वहीं सोफ़े पर लेट गयी।
आशु का लंड उसकी चिकनी जांघों और झूलते मम्मों को देख कर अब खड़ा हो गया था, जिस पर रेखा की निगाहें पड़ चुकी थीं।
बेड के नीचे की सफाई में आशु को एक मोटी मोमबत्ती मिली, जिसे रेखा ने हँसते हुए उससे ले लिया कि पता नहीं कब की पड़ी है।
हालांकि आशु भी समझ गया कि रेखा मेमसाब इससे अपनी चूत की गर्मी शांत करती हैं।
रेखा ने बियर की दो केन खोल लीं।
आशु के बहुत मना करने पर भी रेखा ने उसे जबर्दस्ती एक केन पिला ही दी।
दोपहर तक अधिकांश काम निबट गया।
अब फ्लैट्स में गंदगी आती भी कहाँ है। सब कुछ तो बंद रहता है।
आशु ने रेखा से एक घंटे की छुट्टी मांगी कि वो नहा कर खाना खा आएगा।
रेखा ने उससे कहा कि खाना उसने ऑर्डर कर दिया है और वो नहा उसी के बाथरूम में ले।
उसे रेखा ने तौलिया दे दिया।
आशु ने इतना खूबसूरत बाथरूम पहली बार इस्तेमाल किया।
वह फटाफट नहाया.
बाहर से रेखा कह रही थी- तुम जल्दी से नहा लो, फिर मैं नहाऊँगी।
आशु जल्दी से टॉवल लपेट के बाहर आया।
कपड़े तो उसने बाहर ही बदले थे।
उसके कसरती जिस्म और चौड़ी छाती को निहारती रेखा जल्दी से बाथरूम में घुस गयी।
आशु ने बाहर अपने कपड़े ढूँढे तो नहीं मिले। शायद सफाई में रेखा ने इधर उधर रख दिये होंगे।
उसने आवाज़ देकर पूछा भी कि मेमसाब मेरे कपड़े कहाँ रखे हैं तो अंदर से आवाज़ आई कि वहीं तो रखे थे तुमने, अभी आकर देखती हूँ।
थोड़ी देर में रेखा की अंदर से फिसलने की आवाज़ आई।
आशु ने एकदम पूछा- मेमसाब क्या हो गया?
रेखा बोली- फिसल गयी हूँ … ज़रा मदद करो।
उसने दरवाजा खोल दिया।
आशु टॉवल लपेटे अंदर गया तो रेखा तौलिया लपेटे खड़ी थी।
तब आशु ने उसे सहारा देने की कोशिश की तो रेखा ने हँसते हुए शावर चला दिया।
तेज पानी से दोनों भीग गए.
रेखा ने अपना और आशु दोनों का टॉवल उतार फेंका।
अब दोनों निपट नंगे थे।
रेखा तो उसका लंबा और मोटा तना हुआ लंड देख सकते में थी।
अब रेखा और आशु दोनों की ही सोचने समझने की ताकत के ऊपर चूत की चुलबुलाहट और लंड की गर्मी हावी हो गयी थी।
रेखा ने आशु को अपने से चिपटा लिया उसके गीले बालों को पीछे से पकड़ कर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिये।
आशु नहीं समझ पाया कि वो क्या करे।
पर उसका लंड भी अब बेकाबू हो रहा था।
उसने अपने दोनों हाथों से रेखा के बालों को पीछे से पकड़ा और अपने होंठों पर रेखा के होंठों की पकड़ को मजबूती दे दी।
अब रेखा उसके होंठों को काटते हुए अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा रही थी।
रेखा के मदमस्त मम्मे देख आशु तो मानों पगला गया।
उसने रेखा के मदमस्त मम्मों को नफासत से चूसना शुरू किया.
रेखा के हाथों में उसका लंड मचल रहा था, वह आशु को अपने अंदर लेने के लिए बेचैन हो रही थी।
आशु ने शावर जेल की शीशी लेकर रेखा के मम्मों और पीठ पर उड़ेल दी और कुछ अपनी छाती पर भी लगाया।
अब दोनों के बदन चिकने हो गए। दोनों लिपटते तो साथ ही बदन फिसलते।
रेखा के गोरे गोरे मम्मे अब आशु की छाती पर मसल कर फिसल रहे थे।
आशु ने हेंड शावर से रेखा के मम्मों, सिर, पीठ और आखिर में चूत को धोया।
ऐसे ही रेखा ने आशु को भी नहलाया।
अब आशु को रेखा ने नीचे फर्श पर बैठा दिया और बड़े संभालते हुए अपनी चिकनी चूत में उसका फनफनाता हुआ लंड ले लिया।
ऊपर से दबाव देते हुए उसने पूरा लंड गहराई तक अंदर किया और लगी ऊपर नीचे होने!
आशु भी उसके मम्मे चूस रहा था।
क्या गजब का स्टेमिना था रेखा में!
कुछ देर में ही आशु ने रेखा को अपने ऊपर से हटा कर अपना लंड मालकिन की चूत से निकाल लिया और उसे गोदी में उठा लिया।
रेखा ने भी उसकी गर्दन में बांहें डाल अपनी दोनों टांगें उसकी कमर पर लपेट दीं।
अब रेखा के मम्मे उसकी छाती से भिड़े हुए थे और दोनों के होंठ एक दूसरे में समा जाने की लड़ाई लड़ रहे थे।
आशु का लंड नीचे से रेखा की चूत के अंदर जाने की गुहार लगा रहा था।
अब आशु ने ज्यादा वक़्त न लगाते हुए रेखा को बेडरूम में आहिस्ता से बेड पर लिटा दिया और नीचे खिसक कर रेखा की चिकनी मखमली चूत में जीभ घुसा दी।
हॉट सेक्सी भाभी कसमसा गयी, उसने अपने हाथों से अपने मम्मे मसलने शुरू किए, उसकी दोनों एड़ियाँ अकुलाहट में एक दूसरे पर घूम रही थीं।
उसकी सीत्कारें निकल रही थीं।
वो सोच रही थी कि क्यों उसने इससे पहले इस बाँके मर्द को नहीं बुलाया।
क्यों वो उस खूसट अविनाश की खुशामद करती रही।
इधर आशु का मन तो रेखा के मम्मों पर अटका हुआ था।
उसने हाथ आगे बढ़ाए और रेखा के मम्मे दबोच लिए।
अब वो थोड़ा बेरहम हो चला था।
उसने अपनी जीभ रेखा की चूत से निकाली और अपने होंठ वापिस लेटी हुई रेखा के होंठों से मिला कर धीरे धीरे रेखा के बदन पर तैरने-सा लगा।
उसने अपने आपको अपनी बांहों पर साध रखा था और उसका लंड रेखा की चूत के ऊपर नीचे बार बार तैर-सा रहा था।
उसकी जीभ कभी रेखा की जीभ से चुहल करती, कभी नीचे आते समय रेखा के निप्पलस को चूमते हुए नीचे ऊपर हो जाती।
रेखा अब अपने हाथों से उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसाने को बेताब थी पर आशु का लंड मेंढक की तरह उसके हाथ से हर बार फिसल जाता और उसकी चूत में आग और भड़क जाती।
दोस्तो, मेरा नाम सुरेश पाटनी Antarvasna है, मैं अजमेर का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र २० साल की है। मैं अन्तर्वासना का एक महीने से पाठक हूँ। अब मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं १२वीं में था। मेरे एक्साम होने वाले थे और मैं अंग्रेजी में बेहद कमजोर था। अच्छे नंबर लेने के लिए मैंने अपनी इंग्लिश वाली मैडम से मुझे एक महीने पढ़ाने को कहा तो वो मान गई।
उनका नाम रचना सिंह था, वो ३० साल की थी, उनका कद ५ फ़ुट ४ इंच, उनका फिगर ३७-३०-३८ का होगा। बड़ी सेक्सी थी वोह ! पूरे साल मैं बस उनको ही देखता था और इसलिए मैं अंग्रेजी में कमजोर हो गया था। वो इतनी सेक्सी थी कि जब भी मैं उन्हें देखता था, बस मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। बस मैं यही कहता था कि कब उनके बूब्स को दबाऊं ! मैं रात को मुट्ठ मारा करता था।
अब मैं कहानी पर आता हूँ। मैडम ने मुझे टयूशन पढ़ने के लिए हाँ कर दिया था और मुझे शाम को ६ से ७ का टाइम दिया था। उनके घर में सिर्फ उनका एक बेटा जो कि ७ साल का था, रहता था। उनका तलाक हो चुका था। शाम को उनका बेटा अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए निकल जाता था और मैडम के घर में सिर्फ हम दोनों ही होते थे। मैडम घर में तो और भी माल लगती थी। जब वो मुझे पढ़ाती थी, मैं बस उनके बूब्स को ही देखता रहता था पर मैंडम को शक नहीं होता था। फिर मैं घर जाकर मुट्ठ मारा करता था, मैं तो सपने में बस मैडम को ही देखता था पर मैं कर भी क्या सकता था।
पर मेरे दिमाग में एक आईडिया आया। अगले दिन से मैं मैडम के घर जब भी जाता तो एकदम बन-ठन के जाता, परफ्यूम लगा कर जाता। जब मैं पहले दिन बन-ठन के गया तो मैडम ने मुझसे कहा- क्या बात है बड़े स्मार्ट लग रहे हो ! किसी गर्ल-फ्रेंड से मिलने जा रहे हो क्या?
तो मैंने मजाक में ही कहा- मैडम ! मेरी ऐसी किस्मत कहाँ कि कोई मेरी गर्ल-फ्रेंड हो !
तो मैडम ने कहा- क्यों ! तुम तो काफी सेक्सी हो !
उस दिन मैंने बाद में मैडम से मजाक में कह दिया की मैडम क्या आप मेरी गर्ल-फ्रेंड बनोगी?
तो मैडम ने समझा कि मैं मजाक कर रहा हूँ और मुस्कुरा दी।
ऐसे ही एक हफ्ता निकल गया। अब मैं मैडम से खुल के बाते करने लगा। मैंने मैडम से पूछा- मैडम आप अकेले रहती हो ! आपको अजीब नहीं लगता?
मैडम ने कहा- मैं कर भी क्या सकती हूँ?
तो मैंने जल्दी से बोला- आप कोई दोस्त क्यूँ नहीं बना लेती?
उन्होंने मुझे घूरा, फिर मुस्कुरा दी और बोली कि मेरा दोस्त कौन बनेगा?
मैंने बोला- मैं बन जाता हूँ !
और इतना कहते ही मैंने मैडम का हाथ पकड़ लिया।
फिर मैडम ने कहा- ठीक है !
उस दिन से मैं मैडम के घर आने जाने लगा। रात के ९ बजे तक भी मैं उनके घर चला जाता था, वो भी मुझसे दिल खोल कर बातें करने लगी। मैं मैडम के घर का काम भी कर देता था जैसे मार्केट से कुछ लाना हो आदि।
एक दिन मैंने मैडम से पूछ ही लिया- आपको अकेले रात बितानी पड़ती है, आप को डर नहीं लगता?
मैडम मुस्कुरा दी।
फिर मैंने कहा- अगर आप को डर लगे तो मुझे बुला लेना।
तो उन्होंने कहा- ठीक है।
अब मैडम और मुझमे एक रिश्ता सा बन गया था।
एक दिन जब मैं उनके घर पढ़ रहा था तभी बल्ब ख़राब हो गया। मैडम ने मुझे कहा कि मैं दूसरा बल्ब लगा दूँ ! और मुझे एक दूसरा बल्ब दिया। बल्ब काफी ऊपर था और मैं पहुंच नहीं पा रहा था और मैंडम के घर में कुछ था भी नहीं कि जिसके सहारे वहाँ तक पंहुचा जा सके। उसी समय मैंने मैडम को मजाक में कहा- मैडम मैं आपको उठाता हूँ और आप बल्ब लगा दो।
मैं हैरान हो गया जब मैडम ने कहा- हाँ, ठीक है।
मैंने ख़ुशी से उनको अपने गोद में उठा लिया। वाह कितना कोमल शरीर था उनका ! मैंने उनको गोद में उठा लिया, उनकी गांड मेरी छाती से मिल रही थी और पीठ मुँह से। मुझे इतना मजा आया कि मैं सब कुछ भूल कर मैडम की पीठ सूंघने लगा। मैडम काफी भारी थी, धीरे धीरे वो नीचे आ रही थी। अब मेरे हाथ मैडम के पेट तक पहुँच गए लेकिन मैडम ने कुछ भी नहीं कहा। तब मुझमें हिम्मत आई और मैंने जान बूझझ कर मैडम को और नीचे कर दिया। अब उनकी गांड मेरे लण्ड तक पहुँच गई और उनके बूब्स मेरे हाथों में ! लेकिन मैडम वैसे ही खड़ी रही। तब मैंने उनके बूब्स को धीरे से दबा दिया और उन्होंने आह कर दिया।
अब मैं अपने हाथों से उनके बूब्स मसलने लगा और थोड़ी देर बाद वो गरम हो गई। मैं भी गरम हो गया था, मेरे लण्ड एकदम ९० डिग्री पर था। मैंने मैडम को दोनों हाथों से उठाया और बेड पर पटक दिया। फिर मैंने मैडम से बोला- मैडम, आज मुझे मत रोकना !
वो बोली- ठीक है !
मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मेरा लण्ड देखकर मैडम उछल पड़ी। मेरा लण्ड ८ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा है। मैडम मुझ पर कूद पड़ी और मेरे लण्ड को चूसने लगी। मैं भी उनके कपड़े उतारने लगा। वाह क्या चुच्चियाँ थी उनकी ! मैं उनके बूब्स दबाने लगा।
अब वो इतनी गरम हो चुकी थी कि बोलने लगी- सुरेश ५ सालों से मैंने किसी से नहीं चुदाया, तुम आज मेरी फाड़ दो !
फिर मैंने मैडम को सीधा बेड पर लेटाया और उनकी बुर को चाटने लगा। उनकी बुर पर एक भी बाल नहीं था। मुझे काफी मजा आ रहा था, वो भी आह आह कर रही थी। थोड़ी देर बाद उनकी बुर से पानी सा निकल गया।
अब उनसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, उन्होंने कहा- अब अपने लण्ड को मेरी बुर में डाल भी दो !
मैं अपना लण्ड जो कि एकदम टाइट था उनकी बुर में डालने लगा, पर मैंने इससे पहले कभी चुदाई नहीं की थी इसलिए मैं ठीक से उनकी बुर में डाल नहीं पा रहा था। फिर उन्होंने अपने हाथों से अपनी बुर को खोला और फिर मैंने अपना लण्ड उनकी बुर में डाल दिया। मेरा पूरा लण्ड जाते ही वो चिल्लाने लगी- आह ! आहऽऽऽआह आह चोदो, चोदो मुझे ! फाड़ दो मेरी बुर को !
मैं उन्हें जोर से चोदने लगा। वो आह आह करती रही। अब मैं उनको चोदता रहा, चोदता रहा, लगभग ३० मिनट तक चोदा और वो दो बार झड़ चुकी थी। मैं भी उनकी बुर में ही झड़ गया। अब वो शांत हो चुकी थी पर मैंने पहली बार चुदाई की थी इसलिए मैं फिर उन्हें चोदना चाहता था। १५ मिनट तक मैं उनके बूब्स दबाता रहा।
फिर उन्होंने कहा- अब बस करो ! चिंटू आता ही होगा !
मैंने उनसे कहा- नहीं मैडम ! अब मुझे आपकी गांड मारनी है !
वो मना करने लगी पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उनको बेड पर उल्टा लिटा दिया। अब मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो चुका था, मैं उनकी गांड में अपने लण्ड डालने लगा। पर वो डर रही थी कि कहीं चिंटू आ न जाये।
मैं उन पर चढ़ चुका था, अब वो जा भी नहीं सकती थी। मैं उनकी बुर में अपनी ऊँगली डाल कर अंदर बाहर कर रहा था। २ मिनट बाद वो फिर से गरम हो गई और मुझे सहयोग करने लगी और अपने हाथों से अपनी गांड को खोल दिया, मैंने जोर से अपने लण्ड को उनकी गांड में डाल दिया। जैसे ही मेरा लण्ड उनकी गांड में घुसा, वो ऐसे चिल्लाने लगी जैसे अभी मर जायगी। वोह बोलने लगी- सुरेश, प्लीज़ इसे बाहर निकालो !
पर मैं और जोर से चुदाई करने लगा, वोह जोर जोर से चिल्लाती रही, पर मैं नहीं रुका। २० मिनट तक मैं उनके ऊपर चढ़ कर उनको चोदता रहा।
अब वो बोलने लगी- सुरेश अब बाहर निकालो ! बाहर निकलो प्लीज़ !
पर मैं जोर जोर से मारता रहा, मारता रहा और ३० मिनट बाद मैं उनके गांड में झड़ गया।
मैडम ने कहा- अब तुम अपने घर जाओ !
फिर मैं अपने घर चला आया।
उसके बाद मैं मैडम को १०-११ बार चोद चुका हूँ।
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सभी Hindi sex stories पाठकों को मेरा प्रेम भरा नमस्कार। मैं इस साईट की कहानी को पढने वाला नियमित पाठक हूं। नमन ने इस साईट के बहुत सारी कहानियों को पढा है। मुझे सारी कहानियां बहुत ही अच्छी लगती है। उन्हीं कहानियों से प्रभावित होकर मैं आज आपके लिये एक कहानी लिखाने जा रहा हूं।
लेकिन इससे पहले कि मैं ये कहानी शुरू करु मैं आपका परिचय उन दोनो लोगो से करा दूं जिसके बारे में लिखाने जा रहा हूं। मैं एक साधारण फ़ेमिली का लड़का हूं। मेरे परिवार में मेरे और मेरे मम्मी और मेरे डैडी के अलावा और कोई नहीं है। मेरे डैडी हम दोनो से दूंर रहते है। घर में मैं और मेरी मम्मी दो लोग ही रहते है। मेरी मम्मी जिनकी उमर अब चालीस साल की है एक बेहद ही खूबसूरत और काफ़ी आकर्षक महिला है।
उनका रंग गोरा और चेहरा इतना सुन्दर है कि जो भी उनको देखता है बस देखता ही रह जाता है। दूसरी तरफ़ मेरे दूर के एक रिश्तेदार है जो कि विदेश में रहते है वो कभी कभी घर आते है। अब मैं आपको उस दिन की कहानी को बताने जा रहा हूं।
मैं उन दिनो मम्मी के साथ एक छोटे से शहर में रहता था। उन दिनो हमे पैसे की थोड़ी सी परेशानी रहती थी। एक दिन जब मैं पढने के लिये क्लास में गया तो टीचर ने मुझे फ़ीस लाने के लिये बोला। घर में आया तो नमन ने मम्मी से फ़ीस के बारे में बोला तो मम्मी बोली कि अभी थोड़े दिन के बाद ही पैसे की व्यवस्था हो पायेगी। उस दिन नमन आये हुये थे। वो हमारी बारे सुन रहे थे।
रात में जब खाना खाने के बाद मैं अपने रूम में गया तो अपने बगल वाले रूम में कुछ बातें होते हुये सुना। मैं समझ गया कि वो अवाज मेरी मम्मी और नमन की है। नमन ने ध्यान से सुना तो पाया कि नमन मम्मी से कह रहे थे कि अगर तुम्हें पैसा चाहिये तो गेस्ट रूम में निर्वस्त्र हो के आ जाओ। इतना कहने के बाद नमन अब मम्मी के कमरे से निकाल के गेस्ट रूम में चले गये।
उनके जाने के बाद नमन ने मम्मी को अपने सारी कपड़े उतारते हुये देखा तो समझ गया कि आज कि रात मम्मी उनके साथ बितायेंगी। मम्मी अपने सारी कपड़े उतरने के बाद गेस्ट रूम में चली गई। जब मम्मी गेस्ट रूम में गई उस समय नमन बाथ रूम में गये हुये थे।
मम्मी रूम में जाकर खड़ी हो गई। तभी नमन बाथरूम से निकले। उस समय वो भी पूरी तरह से निर्वस्त्र थे। जब मैंने उनके लण्ड को देखा तो उसकी लम्बाई को देख के मैं समझ गया कि उसकी लम्बाई साढे सात से आठ इन्च की होगी। नमन का लण्ड पूरी तरह से तना हुआ था।
नमन मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गये। मम्मी के पास खड़े होने के बाद नमन ने मम्मी की गाण्ड पर एक हाथ को रखते हुये सहलाया। इसके बाद वो मम्मी के गाण्ड से अपने लण्ड को सटा दिया और एक जोर से झटका मारा तो मम्मी के मुह से जोर से आवाज निकाली जो कि मेरे कान तक पहुंचने के लिये काफ़ी थी। नमन ने एक हाथ से मम्मी के कमर को पकड़ लिया और अपने कमर को हिलाने लगे।
अब नमन ने अपने कमर को हिलाते हुये मम्मी से पूछा कि सेक्स किये हुये कितने दिन हुये तो मम्मी ने कराहते हुये बताया कि तीन साल। इतना सुन के नमन ने एक जोर का झटका मारा तो मम्मी जैसे उछल पड़ी। मम्मी ने नमन से कराहते हुये धीरे धीरे झटके मारने के लिये बोला। लेकिन उनके इस बात का नमन पर कोई भी असर नहीं पढा और वो मम्मी को वैसे ही पेलते रहे। वैसे तो वो अपने कमर को जोर जोर से ही हिला रहे थे। लेकिन जब अपने कमर को थोड़ा और तेजी से झटका लगते तो मम्मी की हालत देखते ही बनती थी।
कुछ देर के बाद नमन ने मम्मी को ड्रेसिन्ग टेबल के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की चूत को देख देख के पेलने लगे। मम्मी की चूत पर अपने हाथ रखने के बाद वो मम्मी को वैसे ही झटके लगाते रहे और मम्मी के गाण्ड में अपने पूरे लण्ड को घुसा दिया। अब उनका पूरा लण्ड मम्मी के गाण्ड में चला गया था। कुछ देर तक उसी तरह से झटका लगने के बाद नमन ने देखा कि उनके कमर की स्पीड बढने लगी तो मैं समझ गया कि उनका सब अब अन्तिम पोजिशन पर था।
मेरा सोचना बिलकुल ही सही था। क्योंकि कुछ देर के बाद नमन मम्मी के कन्धे पर अपने सर रख के शान्त पड़ गये। कुछ देर तक वैसे खड़े रहने के बाद नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के गाण्ड से निकाल दिया। अब मम्मी बथरूम में चली गई। नमन भी उनके पीछे चले गये। कुछ देर के बाद जब दोनो बाहर निकले तो नमन ने देखा कि मम्मी ने नमन के लण्ड को अपने एक हाथ से पकड़ रखा था। रूम में आने के बाद नमन ने देखा कि नमन बेड पर बैठ गये। अब मम्मी को इशारे से लण्ड को चाटने के लिये बोले।
मम्मी फ़र्श पर बैठ गई और नमन के लण्ड को अपने मुह में लेके चाटने लगी। नमन मम्मी के चूंची को अपने हाथ में ले के धीरे धीरे दबाने लगे। लगभग पांच मिनट के बाद जब नमन पूरी तरह से गरम हो गये तो मम्मी को लण्ड को छोड़ने के लिये बोला। मम्मी ने जब लण्ड को मुह से निकाला तो नमन ने देखा कि नमन का लण्ड पूरी तरह से तन चुका था। अब नमन का लण्ड मम्मी की चूत में जाने के लिये पूरी तरह से तैयार हो चुका था। अब नमन ने मम्मी को बेड पर लेटने के लिये बोला। मम्मी बिस्तर पर लेट गई।
नमन ने मम्मी के चूत के बालो को सहलाना शुरू किया। मम्मी ने अपने अखे बंद कर लिया और जोर जोर से सासे खींचने लगी। इसके बाद नमन ने मम्मी की चूत को अपने दोनो हाथो से फ़ैलाया और बोले- ये तो बहुत ही सख्त है। जैसे कि अभी तो बिलकुल ही कुवारी है।
अब वो पास के अलमारी से सरसो के तेल के दीबे को लेकर पास के टेबल पर रख दिया।
अब नमन ने मम्मी के चूत पर तेल लगाने लगे। मम्मी के चूत पर तेल लगने के बाद अपने लण्ड पर तेल लगाया। इसके बाद नमन मम्मी के जांघ पर बैठ गये। अब उनके लिये बर्दाश्त करना जैसे मुश्किल हो रहा था। नमन ने अपने लण्ड को एक हाथ से पकड़ के मम्मी के चूत पर सटाया और दूसरे हाथ से मम्मी के चूत को फ़ैलाया। नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के चूत के होल पे रख के अपने कमर को हलका सा आगे के तरफ़ पुश किया तो मम्मी के मुह से हल्की सी सिसकी निकिली।
मैं समझा कि मम्मी के चूत में उनका लण्ड का लाल टोपा भीतर चला गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं था। मम्मी कि चूत नमन के लण्ड के लिये छोटी थी। अब नमन ने मम्मी के दोनो पैरो को फ़ोल्ड कर के फ़ैला दिया और दोनो पैरो के बीच में आ गये। अब मम्मी के चूत पर अपने लण्ड को सटा के रगड़ने लगे। दो मिनट तक ऐसा करने से मम्मी धीरे धीरे गरम होने लगी और तेज सांसे लेने लगी।
कुछ देर के बद मम्मी ने अपने चूत को अपने दोनो हाथो से फ़ैला दिया और राज को लण्ड को घुसने के लिये बोली। नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के चूत के छेद पर रख के जोर से झटका मारा तो मम्मी अपने जगह से दो इन्च ऊपर घसक गई। नमन ने ध्यान से देखा तो पाया कि नमन का लण्ड मम्मी में चला गया था। अब नमन अपने कमर को धीरे धीरे हिलाने लगे और मम्मी उनके हर झटके के साथ हिलाने लगी।
अब नमन मम्मी के ऊपर लेट गया और दोनों एक दूसरे को अपने बांहों में कस लिया। नमन ने मम्मी के गाल पर एक पप्पी ली और एक जोर का झटका मारा तो मम्मी कराह उठी।
नमन ने पूछा- दर्द कर रहा है?
तो मम्मी ने कराहते हुये जवाब दिया – हां आआ औऊऊऊ आह्हहह.
अब नमन ने मम्मी की दोनों कलाईयों को पकड़ कर एक जोर से झटका मारा तो मम्मी तो जैसे पूरी तरह से कांप गई। अब नमन मम्मी के चूचियों को मुँह से पकड़ के धीरे धीरे पीने लगा और अपने कमर को धीरे धीरे हिलाने लगा। मम्मी अब पूरी मस्ती के साथ आहे भरने लगी।
मैंने देखा कि नमन अपने डण्डे को मम्मी के अन्दर ले जाने के लिये जोर जोर से दो तीन झटके मारे तो मम्मी पूरी तरह से कांपते हुये आआआ आऔऊऊ ऊऊउ आआ आआहह उआआ आआ आऐई ईईइ औआआ नह्हह्ही आआआजजु फ़्फ़फ़्फ़ फ़फ़्फ़फ़ आआऔऊऊउ आआआह्ह उआआआआ आआऐईईइ औआआआ नह्हह्हीई आआआज्ज फ़्फ़फ़्फ़ फ़्फ़फ़्फ़ फ़्फफ़ की आवाज निकाल रही थी और उधर नमन अपने कमर को जोर जोर से हिला रहे थे।
तभी मम्मी ने बोला- थोड़ा धीरे धीरे अन्दर डालिये आआ अह्ह ह्हह्ह ऊह ह्हह अह्ह ह्हह्ह।
अब नमन ने मम्मी को बोला कि अभी तो आधा ही अन्दर गया है। आज तो कुंवारापन को खत्म करना है। पिछले दो साल से तो कुंवारी रही है ये चूत। ये कहते हुये नमन ने जोर जोर से तीन चार झटके लगाये तो मम्मी आऔऊउ आआहह्ह उआआ आआऐईईइ औआआ नह्हह्हीई आआआ ज्जजफ़्फ़ आऔऊऊउ आहह्ह उआआआ आआ आआऐईईइ औआआ नह्हह्हीई आआज्ज जुफ़्फ फ़्फ़फ़्फ़फ़ की आवाज के साथ जैसे धीमी आवाज में चीख पड़ी। नमन ने अपने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाल दिया और मम्मी के दोनो चूंचीयों को फ़िर से मसलना शुरू कर दिया कुछ देर के बाद नमन ने अपने कमर को जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया और मम्मी के आआआ आआआ आअह्ह् ऊओह्ह ह्हह के आवाज आने लगी। जब नमन ने देखा कि अब रुकना नहीं है तो अपने होठों को मम्मी के होठो को कस लिया और जोर जोर से झटके मारने लगा।
तब मम्मी अपने होठों को अजाद करते हुये पूछा कि अब और कितना बाहर है राजा। नमन ने बोला कि थोड़ा है डाल दूं पूरा तो मम्मी ने हामी में अपने सर को हिलाया। नमन ने अपने कमर को जोर के झटके के साथ अपने लण्ड को पूरा अन्दर कर दिया। कुछ देर तक जोर के झटके मारने के बाद नमन ने जब फ़ील किया कि मेरा सपुरम उसके चूत में जाने वाला है तो नमन ने एक तरफ़ से मम्मी के चूंचीयों को जोर से मसलना शुरू किया तो दूंसारी तरफ़ मम्मी के होठों को चूसना शुरू किया। अब वो भी नमन के सुर के साथ अपना ताल मिलाने लगी थी। नमन ने पूछा मजा आ रहा है तो मम्मी ने सर हां में हिलाया। कुछ देर के बाद नमन का सपुरम मम्मी के चूत को गीला करने लगा तो मम्मी इ लवीईईए ऊऊऊ ऊऊउ आआह्ह ईईई लूऊऊव्वी ईईईई ऊऊऊउ कर के अपने दोनो हाथो को नमन के पीठ पर रगड़ते हुए पूरी तरह से नमन के अगोश में आ गई।
कुछ देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद नमन ने उठ के अपने लण्ड को निकाला उसमे खून लगा हुआ था। नमन ने मम्मी कि चूत को देखा तो वो काफ़ी फ़ूल चुकि थी। मम्मी चुपचाप कुछ देर तक वैसे ही लेटी रही और तब उठ के अपने कपड़े को पहन के बाथ रूम में गई वहां पेशाब करने के बाद वो जब बाहर आई तो मुसकुराते हुए नमन के तरफ़ देखती रही।
Hindi sex stories....
मैं साक्षी एक बार फिर से हाजिर हूँ Antarvasna Sex Stories अपनी नई कहानी लेकर! सबसे पहले तो मैं आप सब लोगों का तहे-दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ कि आप लोगों ने मेरी कहानी कली से फूल बनूँ‘ को इतना सराहा और इतने ईमेल भेजे।
अब मैं अपना एक सन्देश उनको देना चाहती हूँ जो पहली बार सेक्स करते हैं।
कृपया सेक्स में जल्दी न मचायें और पहले जी भर के प्यार करें एक दूसरे को और अच्छे से यौन-पूर्व-क्रीड़ा करें फिर आगे बढ़ें!
मैं एक बात और लड़कियों को बताना चाहती हूँ कि आप लोग अगर सेक्स का मौका यह सोच कर छोड़ देती हैं कि आपके पति को शायद पता चल जायेगा!
तो बेफिक्र होकर सेक्स करिए क्योंकि किसी भी हालत में उन्हें नहीं पता चलने वाला!
तो शुरु करते हैं-
उन्हीं दिनों मेरी एक सहेली थी नीतू नाम की। हम दोनों लगभग सारी बातें एक दूसरे को बता देते थे। वो भी मेरी ही उम्र की थी और मेरी जैसी ही सुन्दर और उसका फिगर भी लगभग मेरे जैसा ही था।
एक दिन मैं घर पर अकेली थी और नीतू रात के लगभग 10 बजे मेरे घर पर आई। वो मेरे घर के बाजू वाले घर में ही रहती थी इसलिए रात को कभी कभी आ जाती थी। फिर हम दोनों साथ में टीवी देखती थी।
उसके आने के थोड़ी देर पहले ही मैंने रोहित की दी हुई एक व्यस्क मूवी देखी थी इसलिए थोड़ा उत्तेजित हो रही थी। मुझे रोहित की कमी महसूस हो रही थी। नीतू ने नाईट-सूट पहना था और मैंने ट्रांसपरेंट सी नाईटी पहनी थी जिसमें से मेरी ब्रा और पैंटी भी दिख रही थी।
नीतू- साक्षी आज तो तुम क़यामत लग रही हो।
साक्षी- क्यों ऐसी क्या बात है मेरी जान?
नीतू- तुमने तो गजब की नाईटी पहन रखी है!
फिर मैंने नीतू को अपनी बाँहों में भर लिया और चूम लिया।
नीतू- यह क्या कर रही हो? मैं तुम्हारी बॉय-फ्रेंड नहीं हूँ!
“तो क्या हुआ मेरी जान तुम रोहित से कम भी तो नहीं हो!”
और फिर मैंने नीतू के स्तनों को हल्के से दबाया, नीतू ने थोड़ी प्रतिक्रिया की पर फिर मना नहीं किया। शायद वो भी मूड में थी।
मैं उसको लेकर बिस्तर पर पहुँच गई और हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे की बाँहों में आ गए।
हम दोनों एक दूसरे के होंठों को कस के चूसने लगे। मैं नीतू के स्तन भी हल्के हल्के दबा रही थी।
फिर मैंने नीतू के नाईट-सूट के टॉप के बटनों को खोला और उसे ऊपर करके उतार दिया। नीतू ने पीले रंग की ब्रा पहनी थी और उसके स्तन उसमें से बाहर आने को बेचैन थे।
नीतू ने भी मेरी नाईटी की गांठ खोल दी और मैंने अपनी नाईटी उतार दी।
फिर मैंने नीतू की लोअर धीरे धीरे उतार दी। अब हम दोनों ही सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में कस के जकड़ कर प्यार करने लगे और दोनों एक दूसरे से स्तन मसलने लगे।
फिर मैं नीतू के ऊपर आ गई और उसकी ब्रा को ऊपर कर दिया, उसके दोनों बड़े बड़े चुचे उछल कर बाहर आ गए और मैंने दोनों को कस के बारी बारी से चूसा।
आआअह्ह ह्ह्ह सवीईईऽऽ! क्या कर्रऽऽ रही हओ!
कुछ नहीं मेरी जान कब से तुम प्यार करना चाहती थी, आज तो मैं जी भर के तुम्हें प्यार करुंगी।
फिर मैं उसके दोनों स्तन मसलने लगी और चूसने लगी। उसने भी मेरी ब्रा नीचे कर दी तो मेरे दोनों चुचे बाहर आ गए। मैं थोड़ा ऊपर गई और अपने चुचे उसके मुँह के ऊपर ले गई।
उसने भी उछल कर मेरी चुचियों को मुँह में दबाया और कस के चूसने लगी।
फिर थोड़ी देर बाद मैं उसके पेट को चूमते हुए नीचे आई और उसके पैंटी के ऊपर से किस किया। उसकी भी पैंटी गीली हो गई थी। फिर मैं उसकी पैंटी नीचे करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
नीतू- बस साक्षी इससे ज्यादा ठीक नहीं है!
साक्षी- पगली, मैं ही तो कर रही हूँ, मैं तुम्हें गर्भवती थोड़ा न कर दूंगी! तुम तो बस मजे लेती जाओ!
फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी, उसने अपने हाथों से अपनी चूत को ढक लिया। मैंने उसके हाथ हटाये और फिर उसकी जांघों के आस पास किस करते हुए जैसे ही उसकी गीली चूत को किस किया-
आऽऽह आऽऽ साआअवीईई!
वो पागल हो उठी, शायद उसको इतना मजा कभी नहीं आया था!
फिर मैं उसकी चूत को कस के चूसने लगी
ऊऊओह्ह ह्ह्ह्ह म्म्म्माआह!
नीतू कस के बिस्तर पकड़ कर चिल्ला रही थी।
फिर करीब 15 मिनट तक मैं उसकी चूत को चूसती रही, फिर ऊपर गई और उसके मुँह के पास बैठ गई।
नीतू मेरा इशारा समझ गई, उसने मेरी पैंटी को किनारे किया और मेरी चूत में अपनी जीभ घुसेड़ दी।
अब मैं मजे ले रही थी- मैं अपने हाथों से अपनी चुचियों को हल्के हल्के मसल रही थी।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने भी अपनी पैंटी नीतू के सामने बगैर शरमाते हुए उतार दी। हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरी नंगी थी। फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया और होठों को चूसने लगे और एक दूसरे की चुचियों को मसलने लगी।
नीतू- यार मेरी हालत तो तुमने ख़राब कर दी है, अब पूरा सेक्स कैसे होगा?
अब कोई हो तो बुलाओ!
शायद नीतू की आवाज रोहित ने सुन ली, मैं दरवाजा अन्दर से बंद करना भूल गई थी और यह भी कि मैंने रोहित को घर 10 बजे बुलाया था।
पर वो 10.30 बजे आया, दरवाजा खुला पा कर वो ड्राइंग रूम से होते हुए सीधे मेरे बेडरूम में आ गया, जहाँ हम दोनों गुथमगुथा थी।
उसकी तो बाछें खिल गई!
हम दोनों ही मना करने लायक हालत में नहीं थी और बिस्तर में एक दूसरे की बाँहों में सिमटे हुई थी।
पहले तो नीतू ने ही रोहित को देखा और वो ऊपर से नीचे तक कांप गई।
मैं तो उसकी चुचियों को नीचे जाकर चूस रही थी और उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल के उसकी चूत को फैला रही थी।
उसने मुझे झझकोरा, मैंने रोहित के तरफ देखा और कहा- अरे रोहित तुम कब आये?
अब सब अकबका रहे थे।
फिर रोहित ने अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया और हमारे सामने ही अपनी टी शर्ट उतारी और फिर जीन्स भी उतार दी।
उसका लंड एक साथ दो दो नंगी लड़कियों को देख कर पागल हुआ जा रहा था। उसके अंडरवियर से ही उसका लंड फनफना रहा था। फिर उसको अपना अंडरवियर भी उतारना पड़ा क्योंकि उसका लंड उसमें से बाहर आने को मचल रहा था।
मैंने रोहित को पहले नीतू की जवानी तारने के लिए इशारा किया क्योंकि वो मुझसे ज्यादा तड़प रही थी।
फिर मैं नीतू से अलग हो गई और रोहित ने नीतू को अपनी बाँहों में भर लिया, नीतू भी रोहित से चिपक गई और रोहित नीतू के स्तन दबाते हुए उसको रसीले होठों को चूसने लगा।
मैं रोहित को देख रही थी और मेरी हालत और ख़राब होती जा रही थी। रोहित जी भर के नया स्वाद चख रहा था।
फिर रोहित नीचे आ कर नीतू की चुचियों को मुँह में ले कर चूसने लगा और कस के मसलने लगा।
नीतू ये सब पहले ही करवा चुकी थी इसलिए उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, वो बहुत जोर से तड़प रही थी।
फिर रोहित ने नीतू की चुचियों को अच्छे से चूसा और दबाया, फिर उसका पेट और नाभि चूमते हुए वो नीचे आने लगा। नीतू की चूत तो जबरदस्त गीली थी क्योंकि मैं भी उसे कस के चूस चुकी थी।
फिर रोहित ने नीतू की चूत को फैला कर अपनी जीभ अन्दर डाल दी और उसकी दोनों चुचियों को दबाते हुए उसकी चूत को चूसने लगा।
15 मिनट तक रोहित ने नीतू की चूत को कस के चूसा और फिर वो ऊपर आया और अपना लंड नीतू के मुँह के ऊपर रख दिया, नीतू की आँख बंद थी इसलिए जैसे ही उसने आँख खोली रोहित का लंड अपने मुँह के ऊपर देख कर वो एकदम से घबरा गई।
उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसको रोहित का लंड मुँह में लेने का इशारा किया।
फिर वो रोहित का मोटा और लम्बा लंड मुँह में ले कर चूसने लगी।
रोहित आहें भर रहे था।
मैं रोहित के पास आ कर बैठ गई तो रोहित मेरी चुचियों को मसलने लगा।
नीतू रोहित का लंड इतने जोर जोर से चूस रही थी कि रोहित नीतू के मुँह में ही स्खलित हो गया।
नीतू ने भी उसका वीर्य पूरा पी लिया और तब तक लंड मुँह में ले कर रखा जब तक वो दोबारा खड़ा नहीं हो गया।
फिर रोहित ने अपना लंड नीतू के मुँह से निकाला और फिर उसके ऊपर लेट गया।
रोहित ने अपना लंड नीतू के चूत में रखा और कस के धक्का मारा।
“आऽऽऽह आऽऽ म्म्म म्मर गईइऽऽऽ!” नीतू गला फाड़ कर चिल्लाई।
मैंने एकदम से नीतू के मुँह में अपना हाथ रख दिया और अपनी चूत को नीतू के मुँह में लाकर उसके ऊपर बैठ गई।
नीतू ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी और उधर रोहित पूरी ताकत से नीतू के चूत में अपना लंड घुसाने लगा।
मैंने रोहित को बोला- आराम से डालना जानू! नहीं तो कुंवारी लड़की मर जायेगी।
पर रोहित कहाँ रुकने वाला था, उसने तो बस पूरी ताकत से अपना लंड नीतू की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुसेड़ दिया।
नीतू इतना जोर का धक्का बर्दाश्त नहीं कर पाई और बेहोश हो गई।
रोहित ने पास पड़ा तौलिया उठाया और नीतू की चूत से निकल रहे खून के आस पास तौलिया लगा दिया।
मैं उठी और फिर पानी लाकर नीतू के चहेरे में एक दो बूँद पानी के छींटे मारे।
नीतू होश में आई तो रोने लगी। फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार तो ऐसा होता ही है क्योंकि मेरे साथ भी हुआ था।
अब तक नीतू भी कुछ सामान्य हो गई तो रोहित उसे धीरे धीरे चोदने लगा।
शुरु शुरु में कुछ धक्कों तक तो नीतू चिल्लाती रही फिर धीरे धीरे उसकी चीखें उसकी आहों में बदल गई- आआह्हह साआआवीईईई…
नीतू ने कहा- ये तुम्हारा प्रेमी तो बिल्कुल एक्सपर्ट है चुदाई का!
यह सुनकर रोहित फुला नहीं समाया और फिर वो नीतू को जोर जोर से चोदने लगा, पूरा कमरा नीतू के आहों से गूंजने लगा- आहऽऽअ ऊओह्ह ह्ह्ह!
रोहित नीतू को थोड़ी देर तक जोर जोर से चोदता रहा फिर पता नहीं उसको मेरे पर भी तरस आ गया। उसने अपना लंड नीतू की चूत से निकाला और पूरा नीतू की चूत का रस लगा गीला लंड मेरे मुँह में दे दिया।
मैंने उसका लंड अपने मुँह में पूरा अन्दर ले लिया और उसके मोटे और लम्बे लंड को जोर जोर से चूसने लगी।
नीतू की चूत का रस मुझे बहुत भा रहा था।
नीतू अपनी चूत में ऊँगली डाल के ऊँगली अपने मुँह में डाल रही थी।
फिर रोहित ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और मुझे अपने गोद में बिठा लिया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।
फिर मेरी गांड को ऊपर उठा के मुझे चोदने लगा और मेरी चुचियों को अपने मुँह में भर के चूसने और दबाने लगा।
क्या रात थी वो!
और रोहित की तो जैसे किस्मत खुल गई थी! दो दो लड़कियों के मजे ले रहा था वो!
थोड़ी देर बाद उसने मुझे कुतिया स्टाइल में किया और पीछे से चोदने लगा।
मैंने नीतू की चूत को अपने मुँह के पास किया और उसकी चूत को चाटने और चूसने लगी।
फिर करीब 2 घंटे तक वो हम दोनों को बारी बारी से चोदता रहा और हम दोनों लड़कियों की रात उसके पहलू में गुजरी।
मैं बता और लिख नहीं सकती की क्या क़यामत की रात थी वो!
सवेरे जब मैं जागी तो रोहित जा चुका था, नीतू मेरी बाँहों में कस के जकड़ के सो रही थी।
मैंने नीतू को अलग करने की कोशिश करी तो वो ऊँघते हुए उठी।
मैंने नीतू की तरफ देखा तो नीतू थोड़ा शरमा सी रही थी। मैंने पूछा- क्या हुआ मेरी जान?
तो नीतू ने कहा- मैंने बहुत अच्छा सपना देखा कि मैं तुम और तुम्हारा प्रेमी रोहित एक साथ हैं और वो सब मेरे साथ भी हो गया जो कुछ दिन पहले तुम्हारे साथ हुआ था।
मैंने नीतू के तरफ मुस्कुरा के देखा।
नीतू ने फिर अपने आप को देखा और उसकी नज़र जैसे ही चूत पर पड़ी वो समझ गई कि कल रात को उसने सपना नहीं देखा बल्कि वो सब कुछ सचमुच हो गया।
उसने बिस्तर पर लगा हुआ उसकी चूत से निकला हुआ खून भी देखा। उसकी चूत मेरे से भी ज्यादा बुरी हालत में थी और बहुत फटी हुई थी।
फिर वो मुझसे लिपट गई और बोली- क्या ये सब ठीक हुआ?
मैंने उसको ढांढस बंधाया कि सब भूल जाये और इसे एक खुशनुमा सपना समझ कर कभी कभी याद कर ले।
फिर हम दोनों साथ साथ नहाई और वो अपने घर चली गई।
तो दोस्तो, कैसी लगी यह नई कहानी! मैं जल्द ही अगली कहानी लेकर फिर से हाज़िर होऊँगी।
आज के लिए विदा दोस्तो! Antarvasna Sex Stories
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