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यह मेरी पहली कहानी है। मैं Sex Stories अपने जीवन की उस घटना के बारे में बता रही हूँ जिसे मैंने आज तक किसी को नहीं बताया। आज मैं एक शादीशुदा स्त्री हूँ और अपने पति के साथ रहती हूँ। लेकिन अपनी पहली चुदाई को आज तक नहीं भुला पाई हूँ जो कि मेरे भाई के साथ थी।
बात उस समय की है जब मैं बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी। मेरी उम्र 18 साल थी। मुझे चुदाई के बारे में ज्यादा नहीं पता था, बस इतना जानती थी कि लड़का और लड़की कुछ करते हैं जिसमे बहुत मज़ा आता है। यहाँ तक कि मैंने किसी लड़के का लंड भी नहीं देखा था।
इस उम्र में चुदाई के लिए तड़पना एक सामान्य बात थी तो मैं भी तड़पती थी लेकिन घर की बंदिशों के कारण कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था इसलिए मैं अभी तक कुँवारी थी। मैंने यह कभी भी नहीं सोचा था, मेरी पहली चुदाई मेरे बड़े भाई (बुआजी के लड़के) के साथ होगी। मेरे घर में मेरे अलावा मेरी माँ, मेरा एक छोटा भाई है।
अब मैं सीधे अपनी कहानी पर आती हूँ, हुआ यूँ कि मेरी नानी की तबियत अचानक ख़राब हो गई जो कि शहर से लगभग पचास किलोमीटर दूर एक गाँव में रहती थीं।
शाम के 7 बज रहे थे मम्मी को वहाँ जाना था लेकिन मम्मी को मेरी चिन्ता हो रही थी कि मुझे घर में अकेला कैसे छोड़े, क्योंकि सुबह मेरी एक विषय की परीक्षा थी। मम्मी सोचने लगी किसको मेरे साथ छोड़ कर जाए?
उन्होंने सबसे पहले चाचाजी को फ़ोन लगाया लेकिन चाचाजी उस समय शहर से बाहर थे और सुबह से पहले वापस नहीं आ सकते थे तब उन्होंने मेरे भैया (बुआ जी के लड़के) को फ़ोन लगाया जो कि शहर में ही दुकान करते थे।
मम्मी ने उनको सारी बात बताई तो वो आने के लिए तैयार हो गए। मेरी चिन्ता समाप्त होने के बाद मम्मी मुझे जरुरी हिदायत देकर मेरे छोटे भाई के साथ चली गई।
रात के 9 बज गए, मैं भैया का इंतज़ार कर रही थी। सर्दियों का समय होने के कारण रात जल्दी गहरा गई। चारो तरफ़ एकांत महसूस कर मुझे डर लगने लगा। मैंने भैया को फ़ोन लगाया और कहा- जल्दी आओ !
मुझे डर लग रहा है। भैया ने मुझे 10 मिनट का कहकर फ़ोन रख दिया। मैं उनका इंतज़ार कर ही रही थी कि अचानक लाइट चली गई। अब मुझे और डर लगने लगा। मैं भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि भैया जल्दी आएँ, २० मिनट और गुजर गए लेकिन भैया नहीं आए। अब मैं रोने लगी। तभी दरवाजे से भैया की आवाज़ आई मैं जल्दी से उठी और दरवाजा खोलते ही भैया से लिपट के रोने लगी।
भैया ने कहा- क्या बात है क्यों रो रही हो?
मैंने कहा- सुनील भैया आपने आने में देर क्यों कर दी मेरा तो डर के मारे बुरा हाल था।
उन्होंने कहा दुकान पर थोड़ा काम था इसलिए देर हो गई। अब मैं आ गया हूँ अब डरने की कोई ज़रूरत नहीं।
सुनील भैया मुझसे उम्र में 5 साल बड़े थे लेकिन बचपन से ही साथ-साथ रहे थे इसलिए काफी हद तक दोस्त थे। उनके आने के बाद मैंने उनको खाना खिलाया और खाना खाने के बाद भैया हॉल में जाकर टी.वी. देखने लगे। मैं अपना काम निपटाकर उनके पास आकर पढ़ने लगी। उस समय तक मेरे मन बिल्कुल ख्याल नहीं था कि मैं भैया से चुदवाऊँ।
रात के 11:30 बज चुके थे। भैया अभी तक टी.वी. देख रहे थे। मुझे नींद आने लगी थी इसलिए मैं कपड़े बदलने के लिए दूसरे कमरे में चली गई। कमरे का बल्ब फ्यूज़ होने के कारण कमरे में अँधेरा था। मोमबत्ती की रोशनी में मैंने अपनी नाईटी उठाई और कपड़े बदलने लगी।
मैंने सबसे पहले अपनी कमीज़ उतारी और उसके बाद ब्रा क्योंकि मुझे रात में ब्रा पहनकर सोने की आदत नहीं थी। मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला ही था कि अचानक एक चूहा कहीं से फुदकता हुआ मेरे ऊपर आ गया और मेरी चीख निकल गई।
मेरी चीख सुनकर भैया तुरन्त मेरे कमरे में आए। मुझे कुछ नहीं सूझा और डर के मारे चूहा-चूहा कहते हुए उनसे चिपक गई।
मुझे इतना भी होश नहीं रहा कि इस समय मैं सिर्फ़ पैंटी में थी।
मेरे नंगे जिस्म का एहसास जब भैया को हुआ तो उनका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास मुझे मेरी कमर पर होने लगा। मैं एकदम उनसे अलग हुई और उनसे जाने को कहा। लेकिन भैया एकटक होकर देखते रहे। मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में उनको मेरे जिस्म के स्पष्ट दर्शन हो रहे थे। उनकी आँखों में वासना उतरती नज़र आने लगी।
उनके इस तरह देखने से मेरा जिस्म भी गरम होने लगा और मैं मन ही मन अपनी चुदाई के सपने देखने लगी। मैं नज़रें नीची कर ख्यालों में उनके लंड को अपनी चूत में महसूस करने लगी। इतना सोचने से ही मुझे महसूस हुआ कि मेरी पैंटी गीली हो चुकी है। मैंने नज़र उठाकर भइया कि तरफ़ देखा तो चौंक गई। वो जा चुके थे और मेरी चुदाई के सपने पल भर में टूट चुके थे।
रात के 12:00 बज चुके थे। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी। भइया अभी भी हॉल में टी.वी. देख रहे थे। मेरा जिस्म अभी भी गरम था और चुदाई के पहले एहसास ने मेरे रोम-रोम में सेक्स भर दिया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?
यही सोचते-सोचते कब मेरा हाथ मेरी पैंटी में चला गया पता ही नहीं चला। अब मेरी उँगलियाँ मेरी चूत के साथ खेल रहीं थीं।
मैं अपनी उँगलियों से चुदाई करके अपने आपको संतुष्ट करने लगी। लेकिन उँगलियों से मुझे कुछ खास मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैं किसी मोटी चीज़ की तलाश में अपने बिस्तर से उठी। मैंने मोमबत्ती के पैकेट में से एक नई मोमबत्ती ली और अपने रूम में आ गई। रूम में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी।
मैंने अपनी पैंटी उतार कर फेंक दी, अब मैं सिर्फ़ नाईटी पहने थी उसके नीचे ना तो ब्रा थी ना ही पैंटी। मैंने अपनी एक टांग टेबल पर रखी और दीवार के सहारे स्थिति बनाकर अपनी नाईटी ऊपर कर मोमबत्ती को अपनी चूत में डालने लगी।
मोमबत्ती काफी मोटी थी और मेरी चूत बिल्कुल कुंवारी थी इसलिए मोमबत्ती अन्दर नहीं जा रही थी। लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था सो मोमबत्ती को जबरदस्ती अपनी चूत में पेल दिया।
मोमबत्ती के अन्दर जाने से मुझे काफी दर्द हुआ और मेरे ना चाहते हुए भी एक घुटी सी चीख मेरे मुंह से निकल गई। दो मिनट तक मोमबत्ती को अपनी चूत में डाले मैं वैसे ही खड़ी रही। फिर मैंने मोमबत्ती को अन्दर-बाहर करना शुरू किया। अह्ह्ह … उह्ह्ह… मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में मज़ा आने लगा।
मैं कल्पनाओं में खोई हुई मोमबत्ती को सुनील भइया का लंड समझने लगी और बड़बड़ाने लगी ‘हाँ… सुनील भइया, जोर से डालो अपना लंड, आज मेरी प्यास बुझा दो, जाने कितने दिनों से प्यासी है मेरी चूत आज इसको जी भर के चोदो और अपने लंड की ताकत से इसके दो टुकड़े कर दो, फाड़ दो, हाँ… फाड़ दो… मेरी चूत को … अह्ह्ह … उम्म्ह्ह्ह… मेरी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थीं।
अब मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में अत्यन्त मज़ा आ रहा था। मेरा हाथ तेज़ गति से मोमबत्ती को मेरी चूत में पेल रहा था। मैं मदमस्त होकर पूरा आनंद ले रही थी। मैं अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। मेरे शरीर से पसीना आने लगा था और मेरी टाँगे काँपने लगी थीं। मेरा इस स्थिति में खड़ा होना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे इस स्थिति में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैं अपनी स्थिति बदलना नहीं चाह रही थी।
मेरा हाथ मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए बहुत तेज़ गति से चलने लगा। आह्ह्ह…. उह्ह्हह … उम्महह…. और आखिरकार वो पल आ ही गया, मेरा शरीर पूरी तरह जकड़ने लगा, अब मैं फर्श पर गिर पड़ी, अपनी दोनों टाँगे फैलाकर मोमबत्ती को फिर से डालने लगी और एक तेज़ आह्ह्ह के साथ मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया जो फर्श पर फैल गया। अब मैं शांत हो चुकी थी, मेरी चूत की प्यास काफी हद तक बुझ चुकी थी। लेकिन मेरी असली चुदाई तो अभी बाकी थी।
सुनील भइया दरवाज़े पर खड़े थे। उनको देखकर मेरे होश उड़ गए।
मैं फर्श से उठकर खड़ी हो गई और भइया को देखने लगी। भइया रूम में अन्दर आ गए और उन्होंने अपनी टी-शर्ट व हाफ-पैंट उतार दिया, अब वो सिर्फ़ अपनी फ्रेंची चड्डी में मेरे सामने थे जिसमे उनका तना हुआ लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। वो पास आए और अपनी चड्डी में से अपना लंड निकालकर मेरे हाथ में रखकर बोले, “आयुषी, जरा चेक करो ये मोमबत्ती से मोटा है या नहीं?”
उनके लंड को देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। लंड वाकई में बहुत मोटा था और उसका सुपाड़ा तो कुछ ज्यादा ही मोटा था।
मैंने भइया से पूछा, “भइया, लंड इतना मोटा होता है?”
भइया ने कहा, “नहीं, आयुषी हर किसी का इतना मोटा नहीं होता है।”
मैंने फिर भइया से पूछा, “इसका, सुपाड़ा इतना मोटा है, ये चूत में अन्दर कैसे जाता होगा?”
भइया ने कहा, “अभी थोड़ी देर में पता चल जाएगा, ये अन्दर कैसे जाता है।”
और भइया ने इतना कहकर अपनी चड्डी उतार दी अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड किसी लोहे की रोड की तरह तना हुआ खड़ा था। मेरी नज़र उससे हट ही नहीं रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई अजूबा देख रही हूँ और क्यूँ ना लगे, लंड पहली बार जो देख रही थी। खामोशी को तोड़ते हुए भइया ने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और मैं बैठ गई।
फ़िर भइया मेरे पास आए और अपने लंड को मेरे होठों से लगाते हुए बोले, “इसे अपने मुंह में डालो।”
मैंने कहा, “नहीं, भइया ये बहुत मोटा है मेरे मुँह में नहीं जाएगा।”
भइया को अब थोड़ा गुस्सा आ गया और गुस्से में बोले, “मुँह में लेती है या सीधा तेरी चूत में डालूँ?”
मैंने कहा, “नहीं भइया चूत में नहीं, वो फट जायेगी, मैं मुँह में लेती हूँ।”
ऐसा कहकर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लिया। लंड का सुपाडा बड़ा होने के कारण मुँह में फँस रहा था और मैं लंड को मुँह में लिए उसे चूस नहीं पा रही थी लेकिन भइया के इरादे कुछ और थे उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरे मुँह में धक्के देने लगे।
मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे। भइया पूरी तरह से वहशी हो गए थे और मेरे बालों को खीचते हुए मेरी मुँह को चूत समझकर चोदने लगे थे।
मेरी हालत बहुत ख़राब हो रही थी और आँसू भी लगातार बह रहे थे लेकिन भइया के धक्के लगातार तेज़ हो रहे थे। वो मेरे बालों को इस तरह खींच रहे थे जैसे मैं उनकी बहन नहीं कोई रण्डी हूँ। भइया का मुँह लाल पड़ गया था और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।
मैं अपनी हालत से सचमुच में रोने लगी थी लेकिन उनको मेरे ऊपर जरा भी तरस नहीं आ रहा था। वो तो किसी जानवर की तरह मेरे मुंह को चोदते जा रहे थे, कभी वो मेरे बाल खींचते तो कभी मेरे गाल पर चपत लगाते, वो इतने वहशी हो गए थे कि मुझे उनसे डर लगने लगा था।
मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी, मुझे बचा लो। और भगवान ने मेरी सुन ली, भइया शायद झड़ने वाले थे इसीलिए उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। मैंने एक गहरी साँस ली और सिर पकड़कर बैठ गई। भइया बोले, “आयुषी ज़रा अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटकर इसका पानी निकाल दो।”
मैंने भइया के लंड की तरफ़ देखा वो अब भी तना हुआ खड़ा था, उनके लंड को देखकर मेरा शरीर गरमा गया, मैं घुटनों पर चलती हुई भइया के लंड के पास पहुँची और उसे हाथ में लेकर जीभ से चाटने लगी। मेरे चाटने से भइया की सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो बोलने लगे, “शाबाश, मेरी प्यारी बहना ! चाट और चाट, अभी रसमलाई निकलेगी उसे भी चाटना।”
इतना कहकर भइया ने एक जोर की अह्ह्ह्ह… के साथ वीर्य मेरे मुंह पर छोड़ना शुरू कर दिया, मेरा मुंह पूरी तरह से उनके वीर्य से नहा गया, कुछ मेरे होठों पर भी रह गया जिसे मैंने जीभ से चाट लिया और उसके बाद भइया के लंड को भी चाटकर साफ़ कर दिया।
भइया ने मुझे खड़ा किया और तौलिए से मेरा मुंह साफ़ कर होठों से होंठ मिलाकर चूमना शुरू कर दिया। पांच मिनट के उस किस ने मेरे सेक्स को चरम पर पंहुचा दिया और मेरी चूत लंड खाने के लिए बेकरार होने लगी। भइया शायद इस बात को समझ गए थे इसलिए उन्होंने किस करते हुए ही मेरी नाईटी उठाकर अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गए और उसे सहलाने लगे।
मेरी बेकरारी भइया का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर और बढ़ गई और मैं भइया से कहने लगी, “भइया, अब और सहन नहीं होता है, मेरी चूत में अपना लंड डालो प्लीज़ मुझे चोदो और बताओ चुदाई क्या है?”
भइया बोले, “आयुषी, चिंता मत करो पूरी रात अपनी है आज मैं तुझे वो मज़ा दूँगा जिसे तू जिंदगी भर याद रखेगी।”
ऐसा कहकर भइया ने अपनी एक उँगली मेरी चूत में डाल दी। मैं उनकी उँगली को चूत में पाकर कसमसा गई और सिसकारियाँ लेने लगी। भइया अपनी उँगली को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगे उन्हें शायद मेरी नाईटी से दिक्कत हो रही थी इसलिए उन्होंने चूत में उँगली डालते हुए ही मुझसे नाईटी को उतारने के लिए कहा और मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी बात मानकर अपनी नाईटी को सिर के ऊपर से उतारकर फ़ेंक दिया।
भइया की उँगली मुझे पूरा आनंद दे रही थी और मैं सिसकारियाँ लेकर मज़ा ले रही थी। मुझे मज़ा लेते देख भइया ने अपनी दूसरी ऊँगली भी मेरी चूत में डाल दी। और स्पीड से अन्दर बाहर करने लगे साथ ही अपने अंगूठे से मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को रगड़ने लगे।
उनकी उँगलियाँ भी मुझे इतना मज़ा दे रही थी कि मुझे जन्नत का अनुभव हो रहा था, मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में कहीं उड़ रही हूँ। भइया की उँगली-चुदाई ने मुझे एक बार फिर झड़ने के लिए मजबूर कर दिया, मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया और मैं एक बार फिर निढाल होकर फर्श पर गिरने लगी लेकिन इस बार भइया ने मुझे अपनी बाँहों में थाम लिया।
भइया ने मुझे उठाकर बेड पर लिटा दिया और मुझे चूमने लगे, भइया का एक हाथ अभी भी मेरी चूत को सहला रहा था। उनका ध्यान पहली बार मेरे वक्षस्थल पर गया उन्होंने अपना मुँह मेरे 34 साइज़ की चूचियों पर रख दिया और बुरी तरह से मेरी घुंडियों को चूसने लगे, उनका हाथ बराबर मेरी चूत को सहला रहा था।
भइया काफी एक्सपर्ट थे वो अच्छी तरह जानते थे कि लड़की को कैसे गरम किया जाता है वो ये सब मुझे फिर से गरम करने के लिए कर रहे थे और वो इसमे सफल भी हो रहे थे क्योंकि धीरे-धीरे मेरे अन्दर सेक्स फिर से जागने लगा था।
वो मेरी चूचियों को छोड़कर मेरी कमर पर आ गए, नाभि के आस-पास चुम्बन देते हुए वो सीधे मेरी चूत पर पहुँच गए और उन्होंने अपने होंठ मेरी चूत के होंठो पर रख दिए। उनके होठों का एहसास पाकर मेरे मुंह से सिसकारी निकल पड़ी, भइया ने मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया।
हाय… मैं क्या बताऊँ आपको उस समय मुझे ऐसा लगा मानो स्वयं कामदेवता मेरी चूत को चाट रहे थे और मेरी नस-नस में सुधा भर रहे थे, मेरी चूत के होंठ सेक्स की प्रबलता से हिलने लगे थे, मैं भइया से लगभग भीख माँगते हुए बोली,” प्लीज़ भइया अपना लंड डालो नहीं तो मैं मर जाउँगी।”
भइया ने मुझसे कहा, “बस मेरी जान अब तुझे और इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।”
ऐसा कहकर उन्होंने मेरी दोनों टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखा और अपने लंड का सुपाडा मेरी चूत पर रगड़ने लगे, लंड को अपनी चूत पर पाकर मैं तड़प उठी और भइया से गाली देती हुई बोली,” बहनचोद क्यों तड़पा रहा है, डालता क्यों नहीं?”
मेरी बात सुनकर भइया ने जोश में एक जोरदार धक्का दिया और उनका आधा लंड मेरी चूत चला गया। मैं दर्द के मारे छटपटाते हुए भइया से लंड को बाहर निकालने के लिए बोलने लगी तो भइया ने जोरदार चांटा मेरे गाल पर रसीद कर दिया और बोले, “साली, घंटे भर से चिल्ला रही थी डालो-२ ! अब डाल दिया तो चूत फट गई।”
एक और जोरदार धक्के के साथ भइया ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया। मैं बुरी तरह से हाथ-पैर पटक कर भइया की कैद से छूटने की कोशिश करने लगी और चिल्लाने लगी, “भइया, प्लीज़ मैं मर जाउँगी, मेरी चूत फट जाएगी अपना लंड बाहर निकालो।”
लेकिन भइया ने मेरी अनसुनी करते हुए एक और तेज़ धक्का दिया तो मेरे मुंह से चीख निकल गई। मेरी चीख सुनकर भइया ने मेरा मुँह अपने एक हाथ से बंद कर दिया और धक्के देने शुरू कर दिए।
5 मिनट तक भइया के जोरदार धक्के सहने के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरे मुँह की चीखें कामुक सिसकारियों में बदलने लगीं।
अब मैं भइया को अपनी कमर उचका कर सहयोग करने लगी, भइया के धक्के लगातार तेज़ होते जा रहे थे और मेरी सिसकारियाँ और कामुक होती जा रहीं थीं। दस मिनट के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन भइया अभी भी नहीं झड़े थे और धक्के मार-मार कर मेरी चूत का पूरा आनंद ले रहे थे।
चुदाई क्या होती है, चुदते समय मुझे मालूम हो गया, जितना मज़ा चुदाई में है उतना किसी और चीज़ में नहीं। भइया के धक्कों की रफ़्तार शताब्दी एक्सप्रेस को भी मात कर रही थी और मैं कामुक अंदाज़ में भइया के लंड की तारीफ़ कर रही थी। “भइया, तुम्हारे लंड में बहुत दम है, मोमबत्ती का मज़ा इसके सामने कुछ नहीं, प्लीज़ भइया आज मुझे जी भर चोदो, मेरी चूत की प्यास को ठंडा कर दो।”
भइया ने मेरी बात का जवाब मुंह से ना देते हुए अपने लंड से दिया, धक्कों की गति को दोगुना करते हुए भइया ने मेरी रेल बना दी, कुछ देर के बाद मुझे महसूस हुआ की मेरी चूत में कुछ गरम-गरम गिर रहा है, मैं समझ गई कि यह भइया का वीर्य है और उनके साथ मेरी चूत ने भी एक बार फिर पानी छोड़ दिया और इस तरह मेरी पहली चुदाई पूरी हुई।
भइया मेरी चूत में ही लंड डाले हुए मेरे ऊपर लेट गए। कुछ देर आराम करने के बाद मैंने किचन में जाकर चाय बनाई और हम दोनों बैठकर चाय पी, इस दौरान हम दोनों पूरी तरह से नंगे ही रहे। रात के ३ बजने के बाद मैंने भइया से सोने के लिए कहा तो भइया ने एक बार फिर चुदाई करने की इच्छा ज़ाहिर की। मैं भी राजी हो गई और भइया ने इस बार मुझे फर्श पर कुतिया बनाकर चोदा उसके बाद हम दोनों नंगे ही सो गए।
सुबह 6 बजे उठकर मैं जल्दी-जल्दी तैयार हुई और पौने सात बजे भइया को उठाया तो मुझे काली टॉप और काली लॉन्ग स्कर्ट में देखकर भइया का लंड एक बार फिर खड़ा हो गया और उन्होंने केवल मेरी पैंटी उतारकर किचन में दीवार के सहारे ही चोद डाला।
भइया ने मुझे परीक्षा-केन्द्र पर छोड़ा और परीक्षा देकर जब मैं लौटी तो मम्मी आ चुकी थी। इसके बाद आज तक मुझे कभी मौका नहीं मिला कि मैं भइया से चुदाऊँ हालाँकि आज मेरी शादी हो चुकी है तो मेरी चुदाई हर रात होती है लेकिन भइया के लंड के लिए मैं आज भी बेकरार हूँ। Sex Stories
हैलो फ्रेंड्स, मैं फिर से आपके समक्ष प्रस्तुत हूँ. मेरी ये वाली Hindi sex stories और भी अधिक कामुक और उत्तेजना से भरी हुई है.
मेरी एक गर्ल फ्रेंड थी, उसका नाम तिशा था. हम दोनों एक ही इंस्टीट्यूट से कम्पूटर कोर्स कर रहे थे. वो हद से ज्यादा शर्मीली सी थी. हमेशा मुझसे पता नहीं किस बात से डरती रहती थी.
एक दिन मैं उसके घर गया, वो उस वक्त अपने घर में अकेली थी, उसके मम्मी पापा आदि सब बाहर गए हुए थे.
उसने मुझे घर पर आया हुआ देखा तो वो पहले तो जरा सकुचाई. फिर मैंने उससे कहा कि अन्दर आने के लिए नहीं कहोगी?
तो उसने मुझे अन्दर बुला कर बिठाया और फिर मुझसे पूछा क्या पियोगे.. सॉफ्ट ड्रिंक या कुछ गरम?
मैंने कहा- मुझे तो हॉट ही पसंद आता है.. तुम मुझे कॉफ़ी ही पिला दो.
वो कॉफ़ी बनाने चली गई. मैंने टीवी ऑन कर लिया और देखने लगा. तभी टीवी के साथ एक डीवीडी प्लेयर लगा देखा तो तो मैंने सोचा कि डीवीडी प्लेयर को ऑन करता हूँ. प्लेयर ऑन किया तो उसमें पहले से ही एक डिस्क लगी हुई थी. मैंने उसे प्ले कर दिया. तो मैं फिल्म देख कर चकित रह गया क्योंकि उसमें तो ब्लू फिल्म चलने लगी थी.
मैंने उसे जल्दी से बंद कर दिया. दो मिनट बाद तिशा आ गई और मैंने उसके साथ बैठ कर कॉफ़ी पी और जिस काम से उसके पास आया था उस विषय में उससे बात की और अपने घर चला आया.
मैंने सोचा कि तिशा तो मुझसे डरती है. वो सेक्स के नाम से ही मुझसे बात नहीं करना पसंद करती है, तो फिर ये सब क्या है? क्या मैं उसके बारे में गलत था.
यों ही सोचते हुए मैं उसके बारे में और अधिक जानने की फिराक में रहने लगा.
कुछ दिन बाद इंस्टीट्यूट पर उसने मुझे घर आने को कहा. मैं उसके घर गया, उस दिन भी वहां पर कोई नहीं था बस वो अकेली थी.
मैंने उससे कॉफ़ी बनाने को कहा. वो अन्दर चली गई.
मैं भी उसके पीछे चला गया और पीछे से जाकर उसके चिपक गया. मैंने अपना खड़ा लंड उसकी गांड की दरार से चिपका दिया. वो घबराने लगी और आगे को होने लगी.
मैं फिर से उसे अपने लंड से चिपकाने लगा. वो कहने लगी- छोड़ो मुझे.. तुम ये क्या कर रहे हो?
मैंने उसको पकड़ लिया और उसके होंठों पे किस करने लगा.
उसने मुझे धक्का दे दिया और कहा- ये क्या है विक्की.. तुम ये क्या कर रहे हो?
उसने मुझसे बाहर जाकर बैठने को कहा. मैं बाहर आ गया और कुछ देर बाद उसने कॉफ़ी लाकर दी तो मैं उसे देखते हुए कॉफ़ी पीने लगा.
मैंने उससे पूछा कि तुम मुझसे इतना क्यों डरती हो.. जबकि तुम तो ब्लू फिल्म की डीवीडी भी देखती हो?
वो कहने लगी- कौन सी डीवीडी?
मैंने कहा- कहा तो है कि ब्लू फिल्म की डीवीडी?
वो बोली- ये कौन सी डीवीडी होती है?
मैंने कहा कि कभी देखी नहीं क्या?
तो बोली- नहीं.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है.
कॉफ़ी पीने लगा.
कुछ देर बाद वो बोली- तुमने कभी देखी है ब्लू फिल्म?
मैंने कहा- हां देखी है.
तो बोली- क्या होता है उसमें?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. जैसे दूसरी मूवी होती है, वैसी ही ये भी होती है.
वो मुझसे पूछने लगी- क्या होता है बताओ ना?
वो बहुत जिद करने लगी.
मैंने कहा- एक शर्त है.
वो बोली- क्या?
तो मैंने कहा- मैं तुम्हें ब्लू फिल्म कैसी होती है, वो करके बताऊंगा कि क्या होता है ब्लू फिल्म में.
तो उसकी आँखें एकदम से नशीली सी हो गईं, वो कहने लगी- ओके करो.
मैं समझ गया कि ये भी मुझसे लंड लेना चाहती है.
फिर मैं धीरे धीरे उसके पास आने लगा और फिर उसका हाथ पकड़ लिया.
उसने मुझसे कुछ नहीं कहा.
धीरे धीरे मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. उसके चूचे काफी बड़े और सख्त थे. मुझे भी उसके चूचों को मसलने में काफी मजा आ रहा था.. और उसे भी अपने मम्मों को मुझसे दबवाने में मजा आ रहा था.. इसलिए आज वो भी मुझसे खुल कर मजा ले रही थी.
फिर मैं उसके होंठों पे किस करने लगा.. उसमें जोश आ गया था. वो मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, लेकिन उससे उत्तेजनावश बटन नहीं खुल रहे थे.
तो उसने मेरी शर्ट को फ़ाड़ दिया.
मैं भी पूरे जोश में आ गया था. मैंने भी उसका कुरता खींचते हुए उतारा. वो अपने मम्मों को छिपाने लगी.
मैंने धीरे से उसकी सलवार खोल दी. फिर उसके हाथ हटाते हुए उसकी ब्रा को भी खोल दिया. ब्रा हटते ही उसके मस्त चूचे एकदम से खुली हवा में उछलने लगे.
मैं उसके मम्मों को दबाने और चूसने लगा. वो मस्त हो चली थी और उसके कंठ से ‘आआआ.. उह्ह्ह ओह्हह आआआअ.. की आवाज निकलने लगी.
कुछ देर बाद मैंने उसे लिटा कर उसकी पेंटी भी उतार दी.
वो कहने लगी- इतनी देर में पेंटी खोल पाए.. चलो अब मैं तुम्हारी पेंट खोल देती हूँ.
उसकी चुदास सामने दिखने लगी थी. आज मुझे हैरानी हो रही थी कि इसकी शर्म किधर चली गई साली आज तो रांड जैसे बिहेव कर रही है.
उसने मेरी पेंट का बटन खोला और फिर ज़िप को खोलने लगी. मेरा लंड खड़ा हुआ था. वो मेरे लंड को सहलाने लगी और फिर मेरी आशा के विपरीत उसने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
मैं समझ गया कि इसको ब्लू-फिल्म का रंग चढ़ गया है. उसके लंड चूसने से मुझे काफी मज़ा आ रहा था.
कुछ देर बाद वो अपनी चुत खोल कर लेट गई और कहने लगी- अब डालो भी.. और कितना लंड चुसवाओगे?
मैंने लंड उसकी चुत में डाला मगर उसकी चुत इतनी कसी हुई थी कि मेरा लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था.
वो बोली- एक काम करो, तुम अपनी एक उंगली को मेरी चुत में डालो.
मैंने वही किया, अपनी उंगली को उसकी चुत में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ देर बाद बोली- अब अपना लंड घुसेड़ दो.
मैंने लंड हाथ में पकड़ कर चुत की फांकों में घिसा और एकदम से पेल दिया. मगर मेरा लंड अब भी चूत में नहीं जा रहा था.
मैंने दो बार कोशिश की और तीसरी बार में जैसे तैसे अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया. इस बार चूंकि झटका जोर से लगा था और उसको लग रहा था कि अबकी बार भी लंड नहीं घुस सकेगा तो वो मुझ पर हंसे जा रही थी. लेकिन जब लंड घुस गया तो वो जोर से चिल्ला उठी- आआआहह… उह्ह्ह्ह.. मर गई मम्मी रे.. फट गई.
मैं उसकी तेज चीख से डर गया. मैंने कहा- चिल्ला क्यों रही हो.. ऐसा तो होगा ही ना?
तो बोली- नहीं विक्की मुझे बहुत दर्द हो रहा है.. आह.. धीरे धीरे डालो.
मैंने कहा- वही कर रहा हूँ.
फिर मैंने लंड डाला और जोर जोर से शॉट मारने लगा.
वो चिल्लाने लगी- आआहह… ह्हह्ह स्सस्स ओह्हह्ह..
मैं फिर उसके होंठों पे किस करने लगा ताकि उसकी आवाज़ ना निकले.
मैं उसे चूमते हुए जोर जोर से झटके देने लगा. दस बारह मिनट तक शॉट मारने के बाद मेरा माल बाहर निकल गया और मैं उससे चिपक कर ढेर हो गया.
वो मुझे सहलाते हुए कहने लगी- विक्की, क्या ऐसा होता है ब्लू फिल्म में?
तो मैंने कहा- हां जान, ऐसा ही होता है.
वो बोली- मुझे बहुत मजा आया.. अब हम ये रोज करेंगे.
मैंने उससे कहा कि जब भी तेरे घर पर कोई नहीं हुआ करे, तू मुझे बुला लिया करो.
वो कहने लगी- ठीक है.. लेकिन तुम ये किसी को नहीं बताना कि हमने क्या किया.
मैंने कहा- नहीं बताऊंगा.
कुछ देर की मस्ती के बाद मैं अपने घर चला आया. फिर हमारा ये सिलसिला चलता रहा.
अब उसकी शादी हो गई है और वो मुझसे जुदा हो गई.
दोस्तो, आपको मेरी Hindi sex stories कैसे लगी
मैं भी अब अंतर्वासना की पक्की पाठक Antarvasna बन चुकी हूँ। यहाँ छपने वाली एक एक मन मोहित कर देने वाली कथा पढ़ कर काम-इच्छा जागना स्वाभविक है। आज मैं भी अपनी एक ऐसी चुदाई लेकर सबके सामने आई हूँ, मुझे आशा है कि मेरी इस मेहनत को दरकिनार नहीं किया जायेगा।
मैं पानीपत की रहने वाली एक महला हूँ, हम तीन भाई बहन हैं, सबकी शादी हो चुकी है, मैं सबसे छोटी हूँ। जैसे जैसे मैं बड़ी होती गई, जवानी मेरे जिस्म को सजाती गई और मेरी जवानी और ज्यादा कंटीली होती गई। यौवन के फूल जब खिलते हैं तो उनकी महक फिज़ा में फ़ैल जाती है और स्वाभाविक है कि इस महक से भंवरे इर्द गिर्द मंडराने लगते हैं।
मेरे पांव फिसलते देर नहीं लगी। देखते ही देखते मैं अपनी जवानी लुटाने लगी, कई भंवरों ने मेरा रसपान किया। यह देखते हुए माँ ने बीस साल की उम्र में ही मेरी शादी सोनीपत के एक घर में सर्वेश नाम के युवक से कर दी।
मेरे जैसी आग और कोमल लड़की से शादी करके सर्वेश अपने दोस्तों में फूला नहीं समाया। रात के ९ बजे मेरी ननद ने मुझे कपड़े बदलवा मुझे सुहाग-सेज पर बिठा दिया। गुलाब की मदहोश सुगंध से दिल मचलने लगा। करीब एक घंटे बाद सर्वेश अन्दर आया, दरवाज़ा बंद हुआ, यह मेरा पहली बार नहीं था फिर भी एक्टिंग तो करनी पड़नी ही थी, आते ही घूंघट उठाते ही उससे रुका नहीं गया।
मुझे बाँहों में लेकर चूमने लगा। उसकी ऐसी हरक़त से मैं बहुत खुश थी। देखते ही हम दोनों निर्वसन हो गए। वो तो जैसे चूम के सब-कुछ कर देना वाला था। कुछ पल में मैं उसके नीचे कसमसाने लगी। मेरे चरम-सीमा से पहले ही वो निढाल हो कर हांफने लगा। मेरे सपने टूट गए, सुहाग-सेज के गुलाब मुझे कांटे लगने लगे। पूरी रात मुझे अपने आशिकों की याद आती रही।
फिर मैंने सोचा कि शायद तजुर्बा न होने की वजह से या फिर एकदम से मेरी जैसे आग को देख उसका यह हाल हुआ है। लेकिन फिर मेरे अरमान रोज़ कुचले जाने लगे।
एक साल बाद ही मैंने बच्ची को जन्म दिया। मेरी सेक्स लाइफ अरमान बन रह गई। फिर एकदम से मेरे पति के बिज़नस में गिरावट आई और उसने सब कुछ समेट लिया और मुझे वहां बुलाने का वायदा कर शहर आ गया। यहाँ पर उसको एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई और उसने कम्पनी के दिए क्वाटर में मुझे बुलवा लिया। शहर आकर तो मेरी जवानी और निखरने लगी। लेकिन अब सेक्स-लाइफ और बदतर हो गई। थका आता, कभी चोदता कभी नहीं !
मेरी चूत शहर के मर्द देख और गीली होने लगी। अब मैं चुप नहीं रही और उसको उसकी कमजोरी पर ताने कसने लगी। उसको शराब की लत लग गई। उसके कुछ दोस्त घर आते और बैठ कर दारू पीते। एक दिन मेरा पति जॉब पर नहीं पहुंचा और सुबह ही शराब पीकर टुन्न होकर अपने किसी दोस्त के घर लुढ़क गया। आधे घंटे बाद उसका एक दोस्त अमित घर आया। मैंने कपड़े ही ऐसे डाले थे कि उसकी आंखें फटी रह गई। मैंने चुटकी बजाकर उससे कहा- क्या हुआ ?
उसको अन्दर बुलाया, उसने मुझे कहा कि सर्वेश को सुबह ही ज्यादा हो गई है, जॉब पर नहीं गया ! मेरे घर पड़ा है !
उसने मेरी इतनी तारीफ की। औरत तारीफ की भूखी होवे- सब जाने !
मैं उसके लिए चाय बनाने रसोई में गई, मेरे अरमान मचलने लगे। तभी उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और एक साथ ही मुझपर चुम्बनों की बरसात कर दी।
यह क्या कर रहे हैं आप- मैंने दिखावे के लिए कहा।
भाभी पागल बना दिया तेरी जवानी ने ! कैसे काटती होगी ऐसे मर्द के साथ ?
मैंने पलटी खाई, चिपक गई उसके साथ। मैंने भी उसको चूम लिया। बहुत प्यासी हूँ मैं भाई साब !
ओह, मुझे मालूम है तुझ जैसी औरत की चूत वो ठंडी नहीं कर पाता होगा !
बिस्तर पर डाल उसने मुझे नंगी कर लिया और मेरा स्तनपान करने लगा- क्या छाती है तेरी !
ओह, अमित बहुत प्यासी हूँ इस आदमी की वजह से ! मैंने भी उसके फूले हुए हिस्से को मसलते हुए कहा और उसकी बेल्ट खोल दी। फिर उसका अंडरवियर उतार दिया। क्या लौड़ा था उसका ! पकड़ते ही आग लग गई ! मैंने झट से उसके लौड़े को अपने मुँह में ले लिया और वो अपने लौड़े की चुसाई मेरे बालों में हाथ फेरते हुए देखने लगा।
लौड़ा है अमित आपका !
भाभी बहुत बड़ा है मेरा ! क्या करूँ !
अब मैं करुँगी कुछ !
मैं एक रंडी की तरह उसकी आँखों से आंखें मिला कर लौड़ा चाटने लगी। मैं ६९ पे आ गई और उसके होंठों पे अपनी चूत रख दी। वो खूब चाटने लगा, मैं सिसकने लगी।
एक साल बाद मुझे असली लौड़ा मिला था और मज़बूत बाहें मिली थी। मैं कसमसाने लगी। मैंने मुँह से लौड़ा निकाल दिया और टांगें चौड़ी कर के लेट गई। उसने बीच में आकार अपना नौ इंच का लौड़ा मेरी चूत पे रखा तो मैं पागल हो कर गांड उठाने लगी। वो तड़पाने लगा, फिर उसने अपना लौड़ा घुसाना शुरू किया। कसी हुई चूत ऐसे लौड़े की आदत ही भूल चुकी थी।
भाभी ! सच में वाह ऐसी चूत ! वो भी इतनी कसी, बस डालते जाओ !
उसने मेरे दर्द को नज़र अंदाज़ करते हुए जड़ तक डाल दिया।
हाय ! हाय ! चोद मुझे मादरचोद ! और जोर से चोद मेरी चूत को !
यह ले साली कुतिया ! यह ले !
अह उह उह सी सी कर मैं उसको उकसाने लगी और वो और जोश से ठोकने लगता। मैं झड़ चुकी थी लेकिन वो अभी लगा था। उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी करीब बीस मिनट की ठुकाई से उसने अपना माल जब छोड़ा तो मेरी चूत की प्यास बुझ गई। उसके बाद पूरा दिन उसने मुझे कई बार ठोका और अब मौका मिलते ही मैं उसको बुला लेती। जिस दिन पति की रात की ड्यूटी होती वो दिन में करवा लेता और रात को उसको बुला लेती और वासना के खेल खेलते। लेकिन कुछ महीनों बाद ही उसका ऑस्ट्रेलिया का फ़ैमिली वीसा आ गया और वो चला गया।
उसके बाद अखिलेश नाम का उसका दोस्त मेरे पति को छोड़ने आता। मेरा उस पर दिल आने लगा। वो भी मुझे चाहता था लेकिन पहल नहीं कर पा रहा था, वो मैंने कर दी। उसके बाद मेरी जिन्दगी में क्या हुआ, अगले भाग में लिखूंगी।
गुरु जी ! प्लीज़ मेरी चुदाई ज़रूर छाप देना !
मैं जल्दी ही अखिलेश और उसके बाद जो हुआ सब लिखूंगी। Antarvasna
शाम को मैं और मेरी बहन महजबीं और अम्मी काम से घर जाने लगे.
रास्ते में हाफिज मामा की दुकान पर सामान लेने के लिए मैं और अम्मी रुक गए.
महजबीं घर चली गयी.
हाफिज मामा- आओ आपा बैठो!
अम्मी- आज तो थक गई भाई जान काम पे!
हाफिज मामा इशारों में बात करते हुए- क्यों आज डबल मजदूरी कर ली क्या?
मैं छोटा था तो कुछ समझ नहीं पा रहा था.
अम्मी- हां भाई जान, आज दो दो मिल के मार रहे थे.
हाफिज मामा- फिर तो आज मुझे नहीं मिलेगी क्या?
अम्मी- नहीं भाई जान! आज के लिए तो माफ कर दो, सूज के पाव रोटी हो गयी है!
हाफिज मामा- वो सब मुझे नहीं पता, मुझे तो आज ही चाहिए!
अम्मी- अच्छा बाबा आप जीते में हारी!
फिर हाफिज मामा ने अम्मी को चुम्मा और सामान दे दिया.
मुझे भी आइसक्रीम दे दी.
हम घर आ गए.
घर पर आज अमीरा ने खाना पहले से तैयार रखा था.
अम्मी ने मुझे हाफिज मामा को बुलाने को कहा.
मैं- अम्मी, मैं अकेला नहीं जाऊंगा, अमीरा आपा को भेजो मेरे साथ!
अम्मी- ठीक है, जाओ जल्दी आ जाना!
हाफिज मामा दुकान बंद कर रहे थे.
अमीरा- हाफिज मामा, अम्मी ने खाने के लिए बुलाया है.
हाफिज मामा- तेरी अम्मी तो आज लेने नहीं देगी तो आज तुझे देनी पड़ेगी फिर से!
मैं बीच में बोला- अमीरा आपा को क्या देनी पड़ेगी? और अम्मी क्या नहीं लेने दे रही?
हाफिज मामा- बेटा, रजाई की बात कर रहा हूँ.
मैं- तो क्या हुआ, आज आप मेरी ले लेना!
इस पर अमीरा आपा और हाफिज मामा जोर जोर से हँसने लगे.
हाफिज मामा- नहीं बेटा, तेरी छोटी है, फट जाएगी.
अमीरा- अम्मी की कब से ले रहे हो?
हाफिज मामा- बहुत वक़्त से … यह आलम मेरा बेटा है.
मैं- हां मामू, मैं आपका ही बेटा हूँ.
अमीरा- ठीक है मामा, कोशिश करूँगी! पर अम्मी जाग गई तो क्या होगा?
हाफिज मामा- क्या होगा … दोनों की ले लूंगा साथ में! आज सोने नहीं दूंगा दोनों को!
अमीरा- ठीक है. अब चलें, खाना ठंडा हो रहा है।
हम घर आ गए तो अम्मी ने खाना लगा दिया.
सब लोग खाना खाकर सोने के लिए चले गए.
महजबीं और अमीरा दूसरे कमरे में सोने चली गई।
मैं अम्मी साथ में सोने चला गया।
हाफिज मामा बाहर सोने चले गए।
मैं- अम्मी, मुझे मामा के पास जाना है उनके पास सोना है.
अम्मी- नहीं बेटा, मुझे अकेले में डर लगेगा.
मैं- तो अम्मी मामा को यहां बुला लूं क्या?
अम्मी- ठीक है बाबा, बुला ले!
मैं मामा को बुलाकर लाया.
अम्मी- भाईजान, आप यहीं सो जाओ. आलम ने जिद पकड़ ली है.
हाफिज मामा- ठीक है आपा.
फिर सब सो गए.
रात को 12 बजे अमीरा मामा के पास आई और वहीं उनको पकड़ कर लेट गई।
हाफिज मामा ने उसको कस के पकड़ लिया और अमीरा के होठों को चूसने लगे।
अमीरा भी उनका पूरा साथ दे रही थी।
मैं ये सब रजाई के अंदर से देख रहा था.
अब मामा ने मेरी बहन की कुर्ती को निकाल अलग कर दिया और उसकी चूचियों से खेलने लगे।
अमीरा भी मामा के लंड को पजामे के अंदर से मसलने लगी।
अब मामा सलवार के अंदर से अमीरा की चूत पे हाथ फेरने लगे।
अमीरा सिसकारियां लेने लगी।
अमीरा फुसफुसाती हुई- अब जल्दी से कर ले! वरना तेरी रंडी उठ जाएगी.
मामा- तू भी तो मेरी रंडी है।
अमीरा- हां मेरे आका, मैं भी आपकी रंडी हूँ। अब जल्दी करो मेरी जान, आग लगी हुई है मेरी चूत में!
मामा- साली हरामखोर, दिन में तो अच्छे से बजा के गया हूँ।
अमीरा- क्या करूँ मेरे राजा, तेरा लंड ही इतना मस्त है कि बार बार लेने का मन करता है।
अब मेरी बहन मामा का पजामा खोलकर उसके लंड को चूसने लगी.
मामा मजे से लंड चुसवाने लगे- आह मेरी रांड, तू तो रंडी की तरह चूस रही है. आह मेरी जान, मजा आ गया।
अब मामा जोर जोर से मेरी बहन का मुंह चोदने लगे.
इतने में अम्मी जाग गई और बहन को मामा के साथ नंगी देखा तो बोली- भाई जान, ये क्या कर रहे हो? ये तो आपकी बेटी जैसी है. आपको शर्म नहीं आती? ये सब कब से चल रहा है?
अम्मी ने अमीरा को एक थप्पड़ मार दिया।
अमीरा रोते हुए अम्मी से- मुझे पता है आप और मामा रोज चुदाई करते हो. मैंने आप दोनों को कई बार चुदाई करते हुए देखा है। आप तो कई लंड खा चुकी हो मुझे सब पता है।
अम्मी रोते हुए- हां मैं तो रंडी हूँ, 100 लंड से ज्यादा खा लिए हैं। पर तू भी कोई पाकसार लड़की नहीं है। मैंने भी तुझे मोहल्ले के कई लड़कों से चुदाई करते हुए देखा है। कल ही तो बबला कारीगर का लंड खा के आई है ना? कम से कम हाफिज को तो छोड़ देती मेरे लिए! तेरे अब्बू के जाने के बाद से यही मेरा खसम है।
अमीरा गुस्से से- तो क्या हुआ? मेरी सील भी मामा ने तोड़ी है। ये मेरे भी खसम हैं।
इस पर अम्मी ने अमीरा को 2 थप्पड़ और लगा दिए।
अमीरा ने भी अम्मी को 1 थप्पड़ लगा दिया।
मामा दोनों को शांत करवाने लगे- आज से तुम दोनों मेरी बीवियां हो, अब मैं तुम दोनों के बिना नहीं रह सकता। अगर मेरी बात दोनों को मंजूर हो तो बोलो. वरना मैं दुकान मकान बेच के कहीं दूर चला जाऊंगा.
इस बात से दोनों घबरा गई और दोनों एक साथ मंजूर बोल पड़ी।
अम्मी- ठीक है, आज से आप हम दोनों के खसम हो. एक रात इसके साथ, एक रात मेरे साथ गुजार लेना।
अमीरा- अम्मी जब हम दोनों का एक ही खसम है तो बारी बारी से क्यों आज से हम दोनों मिल के अपने खसम को मजा देंगी।
अम्मी बहन को गले लगा के रोने लगी- मुझे माफ़ कर दे बेटी, मैंने तुझे मारा!
अमीरा ने भी रोते हुए कहा- अम्मी, मुझे भी माफ कर दे, मैंने भी आप पे हाथ उठाया.
फिर दोनों गले लगकर एक दूसरे को चूमने लगी।
अब दोनों गर्म होने लगी।
बहन तो पहले से नंगी थी, अब वह अम्मी को नंगी करने लगी।
अम्मी- बेटी, मुझे शर्म आ रही है।
अमीरा- ओहोओ आई बड़ी शर्माने वाली … आज से मैं तेरी बेटी नहीं सौतन हूँ।
अम्मी- रांड पहला हक़ तो मेरा है भाई जान पे!
अमीरा ने अब अम्मी का कुर्ता उतार दिया।
तो अम्मी के बड़े बड़े बूब्स आजाद होकर लहराने लगे।
अमीरा अम्मी के बूब्स चूसने लगी.
अम्मी- आह आह हाय बेटी आराम से … दिन को हरामी बबला ने पकड़ पकड़ के सुजा दिए हैं।
अब मामा नीचे से मेरी बहन की चूत चाटने लगा।
अमीरा- हाय्य आह मेरे राजा … और जोर से चाट … मजा आ रहा है। आज तो चूत में आग लगी हुई है।
उधर अम्मी ने भी नीचे आकर मामा का लंड पकड़ा और मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह मजे से चूसने लगी।
अब मामा अमीरा की चूत और अम्मी मामा का लंड चूस रही थी।
अमीरा से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था- साले कुत्ते के बच्चे भड़वे, अब तड़फा मत और फाड़ मेरी चूत को साले … अब नहीं सह सकती … जल्दी से लंड को डाल!
मामा ने अब लंड अम्मी के मुंह से निकाला और अमीरा की चूत में एक झटके से डाल दिया।
अमीरा की चीख निकल गयी- हाय मेरी मआआ आआ … मार दिया कुत्ते ने! फाड़ दी मेरी चूत … आआई ईईया मेरी माँ!
अम्मी मामा को डांटती हुई बोली- भाई जान आराम से करो. फाड़ोगे क्या मेरी सौतन की चूत?
मामा- इसकी चूत तो कब की फाड़ दी थी। ये तो रंडी ऐसे ही नखरे कर रही है। अब तो इस घर में एक और चूत सील पैक है।
अम्मी- वो तो अपने भाई से सील खुलवायेगी।
मैं अपना नाम सुनकर खुश हो गया।
अब मामा धीरे धीरे अमीरा को चोद रहे थे।
अम्मी अब अपनी चूत अमीरा के मुँह पे रख के चटवाने लगी।
अमीरा चूत चाटती हुई- अब जोर जोर से चोद हरामी … दिखा अपना दम! आह और जोर से … एआईई ईई आईई ओआह आह आहह हहह … मैं तो गयी मेरी जाआन!
अम्मी सिईईई ईई आहहहह हहा करती हुई अमीरा के मुंह मे झड़ गई.
हाफिज मामा भी अमीरा की चूत में झड़ गए।
अब सब हाँफ रहे थे।
थोड़ी देर में अम्मी तैयार हो गयी चुदाई के लिए- साली कुतिया तेरे को तो औजार का मजा आ गया. अब इसे दुबारा तैयार कर … मुझे भी औजार चाहिए … वरना शांति नहीं मिलेगी!
अमीरा ने मामा का लंड चूस कर फिर से तैयार कर दिया.
मामा अम्मी की चूत पे हाथ फेर रहे थे।
अम्मी की चूत का रस मामा के हाथ पे लगा तो मामा ने चाट लिया।
मामा- रहमत मेरी जान, घोड़ी बन जा. पहले तेरी गांड मरूँगा. वरना जल्दी से झाड़ेगा नहीं.
अम्मी घोड़ी बन गई।
मामा ने अपना लंड अम्मी की गांड में डाला और घपाघप चोदने लगा और अम्मी की गांड पे जोर जोर से थप्पड़ मारने लगा।
अम्मी आहें भरने लगी।
पूरा कमरा धप धप की आवाज से गूंजने लगा।
अम्मी- आह आहह हह हहआ आआई ईईया … अब आगे की गर्मी शांत कर दो भाई जान!
मामा ने अब अपना लंड निकाल के बहन को चूसने को कहा।
अमीरा- साले, इस पे तो अम्मी का गूं लगा हुआ है।
पर मामा जबरदस्ती अपना लंड बहन के मुंह में डाल दिया।
मामा के लंड को बहन मजबूरी में चाट के साफ कर दिया।
अब मामा अम्मी की टांगें अपने कंधे पर रखकर जोर जोर से चोदने लगे।
अम्मी ज्यादा टिक नहीं पाई और झड़ गई.
मामा ने अम्मी का रस पी लिया और फिर से चोदने के लिए चूत में लंड डालने लगे।
पर अब अम्मी ने मना कर दिया- अब मेरे राजा, मुझे माफ़ करो. मुझे कल काम पे जाना है।
मामा- मेरी जान, मेरा पानी तो निकाल दे।
अम्मी- लाओ हाथ से मुठ मार देती हूं।
मामा- दो दो रंडियाँ हों … फिर भी खसम को मुठ मारनी पड़े … यह तो शर्म की बात है।
अमीरा- अम्मी तुम सो जाओ, मामा के लंड को मैं सुला दूंगी।
अम्मी मामा के लंड को और अमीरा को चूम के नंगी ही मेरे पास सो गई।
उधार अमीरा मामा के लंड पे बैठकर मशीन की तरह ऊपर नीचे उछलने लगी।
मामा माँ बेटी सेक्स का मजा ले रहा था.
इधर मैं भी अम्मी को नंगी देख कर अपना छोटा लंड निकालकर अम्मी की गांड में डालने की कोशिश करने लगा.
पर अम्मी तो गहरी नींद में सो गयी थी।
मेरे लंड से पिचकारी निकल जाती है, वो अम्मी की गांड पे गिर गयी।
उधर मामा भी घपाघप अमीरा को पेल रहे थे.
कुछ देर में अमीरा अकड़ने लगी- आहहह आहहह … जोर से … और जोर से चोद मामा … मेरा होने वाला है।
मामा भी स्पीड बढ़ा दी.
अमीरा- आआई ईईया एआई ईईई आहहह में ईईई!
मामा- आह आह … मैं भी आया आय्य्यया आह!
तभी मामा का लावा अमीरा की चूत में निकल गया।
मेरी बहन भी मामा के साथ झड़ गई।
फिर बहन कपड़े पहन के महजबीं के साथ सो गयी।
मामा भी बाहर सो गए।
मैं भी अपनी पेन्ट में लंड डाल कर सो गया.
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