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Hindi sex stories मेरी बीवी करीब 22 साल की, बहुत सुन्दर, पढ़़ी लिखी और भोली भाली महिला है और मैं अक्सर चुदाई के बीच सोचता रह जाता हूँ
कि काश उसे कोई और चोद रहा हो और मैं उसे चुदता देखूँ।
धीरे धीरे पता नहीं कब यह ख्वाहिश इतनी मजबूत हो गई कि मैं रात दिन इसी प्लानिंग में लगा रहता। डरता भी था कि कैसे हो कि
मेरी शादीशुदा जिन्दगी भी बनी रहे मैं उसे इतना प्यार भी तो करता हूँ।
रणवीर से मिला तो पहली ही नजर में लगा कि यह आदमी मेरे काम का है। सारा प्लान भी मेरे दिमाग में शीशे की तरह साफ था, रणवीर को बताया कि मैं अपनी बीवी को उससे चुदवाना चाहता हूँ ऐसे कि उसे शक भी ना हो। वो तो हैरान रह गया।
उसे विश्वास ही न हो कि मैं सच में अपनी बीवी को उससे चुदवाना चाहता हूँ। वो तो मैंने उससे मिलने का टाइम तय किया, उससे मिला और उसे यकीन दिलाया तब कहीं जा कर वह राजी हुआ।
मैंने एक डिटेल्ड प्लान बना कर, अपने मकान की लोकेशन, कमरे कितने हैं और कैसे कैसे वगैरह वगैरह, सब कुछ उसे अच्छे से समझा दिया।
दो दिन बाद रविवार था, सुबह दस बजे मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं नाश्ते के लिये जलेबियाँ लेकर आता हूँ और लौटते हुए रणवीर को साथ लेता आया। मेरा घर पहली मंजिल पर है और प्लान के अनुसार मैंने सीढ़ियों के नीचे एक कैमरा, एक रोल रस्सी और एक नकली पिस्टल, जो दिखने में बिल्कुल असली लगती थी, छुपा कर रख दी थी। रणवीर ने गन मेरी कनपटी पर रखी, मुझे धकियाते हुए लाया, और घर में आते ही दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया, बोला- खबरदार ! जो कोई आवाज बाहर निकाली। मुझे यहाँ छुपना है क्योंकि मेरे पीछे पुलिस पड़ी है, बस थोड़ी देर की बात है, तुम्हारी खैरियत इसी में है कि जैसा मैं कहूँ वैसा ही करो वरना !’
और रणवीर हमें ले कर बैडरूम में आ घुसा। रेखा मेरी पत्नी, मुझे सवालिया नजरों से देख रही थी।
मैंने उसे बताया कि मैं जलेबियाँलेकर जैसे ही सीढि़यों पर आया, इसने गन मेरी कनपटी पर रख दी और जबरदस्ती अन्दर घुस आया…और रणवीर से बोला- देखो, तुम जब तक चाहो, यहाँ रहो, हम ना शोर मचाएंगे, ना किसी को कुछ कहेगें’
‘ठीक है, मगर मैं तुम्हारे हाथ बांधूगा जिससे तुम कोई चालाकी ना कर सको’
‘मेरे पति को मत बाँधो, प्लीज ! ये कुछ नहीं करेंगे’ रेखा सचमुच घबरा गई।
रणवीर ने मेरी पत्नी को डाँट कर चुप करा दिया और मेरे दोनों हाथ रस्सी से पीठ पीछे बांध दिये। मेरी पत्नी से बोला- अब तुम अपने कपड़े उतारो !’
‘ये क्या बकवास है?’, मुझे बोलना पड़ा।
‘जैसा कहता हूँ, करती जा, वरना अच्छा नहीं होगा’, रणवीर ने मेरी बात को अनसुना कर दिया।
‘मगर आपने तो केवल शोर मचाने को मना किया था’, मेरी पत्नी बोली।
‘मैं ये सब तो अपनी सेफ्टी के लियेकर रहा हूँ, तुम्हारे साथ कोई ऐसा वैसा काम नहीं करूंगा। जल्दी करो नहीं तो इसे अभी गोली मारता हूँ।’
मेरी पत्नी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने लाचारी दिखाते हुए तुरन्त गरदन हिला कर उसे रणवीर की बात मान लेने को कह दिया। अपनी पत्नी रेखा के बारे में बता दूँ, अभी पच्चीस साल की है, हाइट 5 फुट 3 इंच और 34-24-36 का जानदार फिगर। उस दिन कुर्ता शलवार डाले हुये थी। हिचकिचाते हुये, उसने कुर्ते के नीचे हाथ लाकर नाड़े की गांठ खोली, शलवार हिप्स पर से नीचे खिसकाई और टांगों में से बाहर निकाल दी। इसके बाद उसने अपनी कुर्ती को भी ऊपर किया और गले से बाहर निकाल दिया। अब उसके शरीर पर सिर्फ काले रंग की ब्रा और पैण्टी ही बची, वह अधनंगी हो चुकी थी।
रणवीर की आंखों में चमक देख, उसके दोनों हाथ जैसे अपने आप उठे और कुहनियों से मुड़ कर खुले बदन को ढकने की नाकाम कोशिश करने लगे। रणवीर कैसे मानता, ‘ये हाथ तो हटाओ…बिल्कुल सीधे करो’,
रेखा का सिर अभी भी झुका हुआ था और बदन शर्म संकोच से दोहरा हुआ जा रहा था। मगर फिर भी उसे हाथ हटाने पड़े, लम्बी गरदन से नीचे गोरे बदन पर काली ब्रा में कैद उसके सुडौल उरोज, पतली होती गई कमर, जो हिप्स पर फिर से चौड़ी होने लगी थी, काले रंग की मैचिंग पैण्टी, जिसकी इलास्टिक उसके पेट पर ऐसी कस के चिपकी थी कि…नाभि थोड़ी सी और गहरी हो गई थी।
‘इन्हैं भी उतारो’, रणवीर का इशारा ब्रा और पैण्टी की ओर था।
मेरी पत्नी ने ब्रा का हुक खोला और बाहों से सरकाते हुए उतार कर एक तरफ डाल दिया। उसके भरे भरे उरोज आजाद होकर फैले तो जैसे और बड़े हो गये। उन पर हल्के बादामी रंग के घेरांे के बीच गुलाबी रंग की घुन्डियाँभी अब सामने दिख रही थीं। हाथ एक पल को कूल्हों पर टिके, अॅंगूठे पैण्टी के अन्दर गये, इलास्टिक पर अटके और पैण्टी नीचे सरकाते चले गये। अब वह बिल्कुल नंगी थी। उसके चिकने सपाट पेट पर, नाभि से जरा नीचे हल्की हल्की झांटों के बीच से झांकती चूत बहुत प्यारी लग रही थीं। रणवीर ने नजदीक जा कर उसके उभारों पर हाथ रखा तो वह उछल पड़ी।
‘यह क्या कर रहे हो?, तुमने तो कहा था कोई ऐसा वैसा काम नहीं करोगे।’
‘हां, मतलब अगर तुम प्यार से मेरी छोटी छोटी बाकी बातें मानती जाओगी, और मुझे मजा लेने दोगी तो मैं तुम्हारी चूत नहीं मारूंगा।’
खुल्लमखुल्ला चूत का जिक्र सुन मेरी पत्नी तो सन्न रह गई। चेहरा फक्क और मुँह से कोई बात ना निकले। सारा शरीर थर थर कांपने लगा।
‘इतना समझ लो जानी ! हमसे शरमाओगी तो हमें मजा नहीं आयेगा और हम तुम्हैं बिना चोदे छोड़ेंगे नहीं।
बचोगी तभी जब चुदाई से पहले ही हमारा निकलवा दो। बिन्दास बोलो, खुल के और मजे लेने दो हमें। तुम्हारी चूत की हिफाजत खुद तुम्हारे हाथ में है, क्या कहती हो, चुदवाओगी?’
‘अरे यह जैसा कह रहा है मान जाओ, कम से कम इज्जत तो बच जायेगी’, मैंने भी हां में हां मिलाई।
‘बोलो, मैं आपसे चुदवाने को बेताब हो रही हूँ’
‘जी, मैं आपसे चुदवाने को बेताब हो रही हूँ’
‘मतलब?, कुछ अपनी तरफ से भी तो कहो’
‘मुझे चोदिये,…मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दीजिये और खूब जोर से चोदिये।
‘बस…अच्छा दिखाओ तो तुम्हारी है कैसी?’
मेरी पत्नी ने कमर आगे कर, उॅंगलियों से वी बनाते हुए चूत की फांकों को फैलाया तो अन्दर का छेद दिखने लगा। रणवीर ने आगे बढ़ कर अपनी उॅंगली उसी छेद में अन्दर डाल कर तुरन्त बाहर निकाल ली और धयान से देखने लगा।
‘ये तो सूखी पड़ी है। ऐसे ही डलवाओगी?’
‘मेरी पत्नी ने आगे और कुछ नहीं कहा और सिर झुका कर, जैसे रणवीर के सामने जैसे समर्पण कर दिया। अब रणवीर ने अपना हाथ फिर से मेरी पत्नी के स्तन पर रख दिया और उसे टटोलने लगा। पत्नी से कोई विरोध नहीं हुआ तो वहां से उसका हाथ नीचे कमर पर से होता हुआ कूल्हों पर आया और एक पल रुक चूतड़ों की गोलाइयों से होकर वापस सामने पेट पर आ गया और उॅंगलियाँनाभि से खेलने लगीं। अॅंगूठे और दूसरी उॅंगली ने नाभि पर जगह बनाई तो पहली उॅंगली अन्दर घुस कर जैसे गहराई नापने लगी। हाथ और नीचे
आया तो झांटो से होता हुआ चूत पर आ गया। उसने अपनी बड़ी उॅंगली चूत पर हाथ फेरते की दरार पर फेरते फेरते अन्दर कर दी। सारे वक्त उसका ध्यान तो मेरी पत्नी के अंगों पर था, मगर दूसरे हाथ में गन की नाल मेरी ओर ही थी। और पकड़ लिया लगा।
‘देखो, मुझे तो तुमने बांध ही दिया है और मेरी बीवी तुम्हारा मुकाबला कर नहीं सकती। इस गन को मेरी तरफ से हटा लो, अगर धोखे से भी चल गई तो मैं तो बेमौत मारा जाऊॅंगा। हम तुम्हारी सारी बातें तो मान ही रहे हैं, गन एक तरफ रख दो ना प्लीज ! हम कुछ नहीं करेंगे।’
रणवीर ने गन एक तरफ मेज पर रख दी और अब मेरी पत्नी को अपनी तरफ खींच उसके बदन पर खूब प्यार करने लगा। पीछे आकर उसने दोनों स्तनों पर एक एक हाथ रख दिया और आराम से हाथ फिराते हुए दबा दबा कर जैसे गोलाइयों को मापने लगा। फिर दोनों निपल उसने चुटकी मे ले लिये और उन्हैं हल्के हल्के दबाते हुये आगे पीछे घुमाने लगा। बीच बीच में उन्हैं अपनी और खींचता भी जाता। मेरी पत्नी ने भी अपना बदन ढीला छोड़ दिया था। एकाएक वह मेरी पत्नी की ओर मुड़ा,
‘अब तुम मेरे कपड़े उतारो’
मेरी पत्नी ने चुपचाप उसकी कमीज के बटन खोले और उतार दी तो रणवीर ने अब पैण्ट की तरफ इशारा किया। रेखा ने अब पहले उसकी बैल्ट खोली, फिर पैण्ट के बटन, जिप नीचे की और पैण्ट नीचे सरकाते हुए टांगों से उतार दी। रणवीर अब सिर्फ अण्डरवीयर में रह गया था जिसके झीने से कपड़े में उसका लम्बा और भारी लण्ड हिलता डुलता साफ दिख रहा था। रणवीर अपनी कमर कुछ ऐसे हिला रहा था कि, अन्डरवीयर पहने पहने भी, घड़ी के पेण्डुलम सा झूलता लण्ड साफ दिख रहा था। रणवीर का अगला इशारा इसी ओर था।
‘अपना हाथ अन्दर डाल कर इसे पकड़ लो’
मेरी बीवी पहले तो थोड़ा झिझकी मगर फिर उसने एक हाथ अन्डरवीयर में डाल कर लण्ड पकड़ ही लिया और धीरे धीरे दबाने लगी। कुछ देर बाद रणवीर ने अपना अन्डरवीयर खुद ही उतार दिया और मेरी पत्नी को बैड पर लिटा कर खुद उसके बराबर कुछ ऐसा जा लेटा कि उसका लण्ड तो मेरी पत्नी के मुंह के पास लटक रहा था, और मेरी पत्नी की चूत उसके मुंह के नजदीक थी।
‘अब मैं तुम्हारी चूत चाटूंगा और तुम मेरा लण्ड चूसो ’
‘मैं नहीं चूसूंगी इसे ’, मेरी पत्नी ने विरोध किया।
‘देखो, मेरी बात प्यार से मान लो नहीं तो मुझे जबरदस्ती करनी पड़ेगी’
बेबस होकर मेरी पत्नी ने मुंह खोल रणवीर का लण्ड अन्दर ले लिया और होठों से पकड़ हौले हौले चूसने लगी। रणवीर ने उॅंगलियों से रेखा की चूत फैलाई और जीभ अन्दर डाल कुरेदने लगा। डबल मजे से उसका लण्ड धीरे धीरे बड़ा होता जा रहा था, इधर रेखा की
चूत में भी गजब की गुदगुदी होने लगी थी। रह रह कर उसकी कमर भी सिहरन से उठ उठ जाती।
थोड़ी देर बाद रणवीर अचानक उठा और रेखा के ऊपर आ कर उसके उरोजों से खेलने लगा। उसका लण्ड, जो मेरी पत्नी की चूत के ठीक ऊपर था, रह रह कर चूत से टकरा रहा था। खड़ा था तो बीच बीच में जरा मरा सुपाड़ा भर अन्दर भी हो जाता। रेखा शर्म और चुदास की दुविधा में थी।
‘देखो तुमने वादा किया था मेरे साथ ये सब नहीं करोगे’
‘ठीक है तुम मेरे लण्ड को अपनी चूत पर रगड़ो, खूब जोर जोर से, छेद के ऊपर ही, ऐसे कि मेरा निकल जाये। फिर तुम्हारे साथ कुछ भी करने की बात ही नहीं रहेगी’
सुन कर मेरी पत्नी की जान में जान आई कि चलो ये रगड़ने से ही डिस्चार्ज हो जायेगा और मेरी फजीहत बच जायेगी। उसने रणवीर का लण्ड हाथ से पकड़ा और अपनी चूत पर जोर जोर से रगड़ने लगी। अब चूत और लण्ड, दोनों इतनी देर के फोर प्ले से गीले हो ही रहे थे।
रेखा रणवीर के लण्ड को अपनी चूत की फांकों के बीच में लाकर रगड़े जा रही थी जिससे कि रणवीर का जल्दी से निकल जाये और रणवीर बारी बारी उसके उरोजों और नाभि पर प्यार किये जा रहा था। साथ साथ उसकी कमर भी आगे पीछे हो रही थी इस बीच लण्ड का सुपाड़ा कई बार चूत में घुसा मगर फौरन बाहर भी आ गया।
रेखा को यही लगा कि रणवीर जानबूझ कर ऐसा नहीं कर रहा है और वो लण्ड को चूत में जाने से रोकने की कोशिश भी साथ साथ करती जा रही थी।
जरा छेद पर रख कर जोर से रगड़ो, मेरा निकलने वाला है’
मेरी पत्नी ने टांगें फैला कर चूत के छेद पर लण्ड को करीब करीब घुसाते हुए जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। रणवीर ने भी इस बार कमर को जोर से झटका तो करीब आधा लण्ड चूत में घुस गया जिसे रणवीर ने फौरन सॉरी कह कर बाहर निकाल लिया।
‘देखो अब तुम अन्दर भी करते जा रहे हो?’
‘मैंने जानबूझ कर अन्दर थोड़े ही किया था, तुम ऐसे ही रगड़ती रहो मैं अन्दर नहीं करूंगा।’
मेरी पत्नी ने लण्ड फिर से अपनी चूत के छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद रणवीर ने फिर से कमर झटकाई और इस बार लण्ड आधे से ज्यादा अन्दर कर दिया। मेरी पत्नी ने लण्ड छोड़ जैसे ही कमर को पकड़ा, रणवीर ने अपना लण्ड और अन्दर किया और पूरा का पूरा चूत के अन्दर घुसा दिया और जोर जोर से आगे पीछे करने लगा। धीरे धीरे अपना पूरा लण्ड चूत से बाहर लाता और सारा का सारा एक झटके में फिर से अन्दर कर देता। दोंनों हाथों से वह मेरी पत्नी के स्तनों को मसल रहा था।
इस समय मेरी पत्नी भी कुछ नहीं कह रही थी। उसकी आंखें मुंदीं थी और मुंह से हल्की हल्की सिसकियाँनिकल रही थीं, शायद वो भी अब एन्जाय कर रही थी। ये चुदाई कुछ देर तक और चली और फिर रणवीर ने जल्दी से अपना लण्ड चूत से बाहर निकाला। निकालते ही झटकों के साथ लण्ड से एक के बाद कई पिचकारियाँछूटीं और ढेर सारा वीर्य मेरी पत्नी के उरोजों और पेट पर बिखर गया। उसकी गहरी नाभि भी लवालब भर गई।
रणवीर ने उसी हालत मेरी नंगी पत्नी के अनेक फोटो ले लिये जिनका डर दिखा दिखा कर उसने रेखा को कई बार चोदा। बहुत बार मैंने भी उसके साथ ही रेखा को चोदा। Hindi sex stories
दोस्तो Hindi porn stories मुझे शुरू से ही शादीशुदा औरतो में दिलचस्पी ज़्यादा है। उसका कारण ये है कि शादीशुदा औरतों का यौवन और उनके चेहरे पर शादी के बाद जो चमक नहोती है
उसे देखकर मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ जाती है तब मुझसे अपने लिंग पर काबू ही नहीं किया जाता और मुझे हस्तमैथुन करके इसे शांत करना पड़ता है। हालाँकि कॉलेज में टॉपर होने की वजह से कई लड़कियाँ मुझसे बड़ी इंप्रेस्ड हैं पर उनके यौवन में मुझे वो बात नज़र नहीं आती जो एक विवाहित महिला के यौवन में होती है। शादी के बाद नया नया संभोग के बाद उनके शरीर में एक अलग ही बदलाव आ जाता है। उनके नितंबो में जो कसाव और शरीर में जो भराव आता है उसकी बात कुछ अलग ही होती है
अभी कुछ ही समय की बात है उस समय मेरे घर में नये किरायेदार आए। उनकी शादी को अभी दो ही साल हुए थे और वो पति पत्नी दोनो वर्किंग थे। राजेश एक मल्टिनॅशनल कंपनी में जॉब करते थे और रीना मेरे ही कॉलेज में प्रोफेसर थी। दोनो कुछ ही समय पहले दिल्ली में आए थे इसलिए उन्हें नये घर की तलाश थी। चूँकि क्लास में हमेशा टॉप करता था तो अक्सर मेरी रीना से सब्जेक्ट्स को लेकर बात होती थी। एक दिन उन्होने मुझसे किराए का घर ढूँदने के बारे में पूछा तो मैंने उन्हें अपने घर को किराए पर लेने के लिए कहा, उन्हें घर पसंद आ गया, और वो कॉलेज के पास भी था इसलिए उन्होंने घर किराए पर ले लिया। मैंने उनसे घर पर पढ़ना शुरू किया और जब उनको करीब बैठ कर देखा तो मैं पागल हो गया। रीना के शरीर में जो बात थी क्या कहने, एक दम गोरा रंग, बिल्कुल स्लिम बॉडी और खड़ी हुई चुचियाँ, कद करीब पाँच फुट सात इंच और खूबसूरती इतनी कि किसी का भी जी ललचा जाए। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। अब पढ़ाई में तो दिमाग़ ही नहीं लगता था।
मैंने अक्सर उनके करीब जाने के मौके तलाशने शुरू कर दिए। एक बार उनके पति किसी काम से कुछ से कुछ दिनों के लिए बाहर गये तब मैंने रीना के करीब जाने के और मौके तलाशने शुरू कर दिए। उनके बेडरूम की एक खिड़की उस रात को खुली थी। मैंने करीब आधी रात के समय उसमें झाँक कर देखना शुरू किया क्योंकि तब तक मेरे सब घर वाले सो चुके थे। रीना के कमरे में जो नज़ारा था उसे देखकर मैं पागल हो गया। रीना अपने बेड पर नग्न अवस्था में लेती हुई थी और अपनी योनि को मसल कर कर सिसकियाँ ले रही थी। मानो ऐसा लग रहा था कि कितने दिनों संभोग न किया हो। मेरे हाथ मेरे लिंग का कड़ापन महसूस कर रहे थे और मैंने तभी वहीं हस्तमैथुन किया। रात भर मुझे नींद नहीं आई। अगले दिन कॉलेज से जब मैं वापिस आया तो देखा मेरे सब घर वाले कहीं बाहर गये हुए थे मैंने घर की चाबी के लिये रीना से पूछा तो रीना अपने कमरे से बाहर आई और मुझे बोली कि चाबी तो नहीं है पर तब तक के लिए तुम मेरे कमरे मे बैठ जाओ। उस समय उन्होंने भी कॉलेज से आकर चेंज ही किया था तो उन्होंने शॉर्ट नाइटी डाली हुई थी। वो मेरे सामने ही सोफे पर बैठ गयी और मुझसे बातें करनी लगी। बातें करते हुए मुझे ध्यान आया कि जिस तरह टांगे खोल कर वो बैठी थी उनकी जांघें दिखाई दे रही थी। और ध्यान देने पर मैंने पाया कि उन्होंने अंदर कुछ नहीं डाला हुआ था। मेरे लिंग पर मेरा काबू न रहा और वो टन कर खड़ा हो गया। तभी उन्होंने मुझसे कहा कि रात को चोरों की खिड़की में देखना ठीक नहीं। मैं घबरा गया कि इन्हें कैसे पता चला कल रात के बारे में।
रीना – ये ठीक नहीं है कोई और रात को तुम्हें हस्तमैथुन करते हुए देख लेता तो, मैं जो भी कर रही थी अपने कमरे में कर रही थी, आगे से ध्यान रखना।
मैने थोड़ा झुक कर उनकी टांगों के बीच में देखना शुरू कर दिया।
रीना – ये क्या कर रहे हो। कहाँ देख रहे हो?
मैंने कहा अब तो मैं कमरे के अंदर हूँ।
रीना – बड़े समझदार बनते हो। वो मेरे मंसूबे जान गयी थी।
मैंने हिम्मत कर के उनकी टाँगो पर हाथ रख दिया।
रीना – बस टाँगो से ही प्यार है या आगे भी बढ़ना है।
वो बोली – अक्सर राजेश तो बाहर रहते हैं और मुझे अकेले रहना पड़ता है। उन्हें मेरे यौवन की प्यास की कोई कदर नहीं है। इसलिए मुझे अकेलेपन में यूं सिसकना पड़ता है।
पर तुम्हें कल रात देख कर मुझे भी कुछ हो गया। कितना बड़ा लिंग है तुम्हारा। लगता है बड़ी ब्लू फ़िल्में देखते हो और हस्तमैथुन कर कर के ऐसा लंबा कर लिया है। मैं इसका स्वाद चखना चाहती हूं अब तो मेरे दिल की बात उन्होंने कह दी। मैंने अपने दोनो हाथों से उनकी जाँघो को सहलाना शुरू कर दिया। साथ ही उनके होंठो की ओर अपने होंठ बढ़ा दिए, हम एक दूसरे को काफ़ी देर तक किस करते रहे और फिर मैं उनके साथ उनके बेडरूम में चला गया।
रीना – मेरा यौवन देखना चाहोगे और ये कहते ही उन्होंने अपनी नाइटी उतार दी।
सच में शादीशुदा औरत के नग्न जिस्म को मैं पहली बार देख रहा था और बेकाबू होकर मैंने उनके बूब्स चूसने शुरू कर दिए। और वो और कसते चले हो गये और पूरी तरह खड़े हो गये।
रीना – पहले कभी संभोग किया है।
मैंने कहा – नहीं।
तो फिर तो तुम अभी कच्चे हो,,, ये कहते हुए उन्होंने मेरी पैंट उतार दी मैंने अंडरवेर नहीं पहना था और मेरा एक बार स्खलित भी हो गया था। गीली पैंट देख कर रीना बोली। रीना – बस इतने में ही झड़ गया। तो तुम क्या करोगे।
मैंने कहा – पहली बार किसी शादीशुदा को नग्न देखकर ये झड़ गया। अभी दस बार और झड़ सकता है।
तब मैंने कहा – मुझे आपकी योनि देखनी है। वो बेड पर लेट गयी और अपनी टांगे खोल दी। मैंने पहली बार किसी चूत को देखा था मैंने सीधा उसे चाटना शुरू कर दिया ।
रीना – अरे बड़े बेकाबू हो। चलो कोई बात नहीं। पहली बार तो ऐसा ही होता है।
मैंने अपनी जीभ उनकी योनि में फिरानी शुरू कर दी। वो सिसकने लगी।
मैंने जीभ को और अंदर डालना शुरू कर दिया।
रीना – अरे ऐसे चूसोगे तो मैं झड़ जाउंगी। मैंने स्पीड थोड़ी कम कर दी और उनके ऊपर आकर उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए।
रीना – मुझे तुम्हारे लिंग का टेस्ट करना है। मैंने कहा तो आ जाओ सिक्स नाइन की पोज़िशन में
रीना – वो क्या है।
मैंने कहा – ब्लू फिल्म्स नहीं देखी क्या कभी।
रीना – वो तो तुम किड्स देखते हो। हम तो वो सब असली में करते हैं।
और मैंने उनको सिक्स नाइन की पोज़िशन में लाकर अपना लिंग उनके मुँह में डाल दिया और उनकी योनि चाटने लगा। हम दोनो ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैंने देखा कि उनकी टाँगे कसती जा रही हैं और एक दम उनकी योनि ने इतनी ज़ोर से मेरे मुँह पर अपना पानी झाड़ दिया कि मेरा पूरा मुँह गीला हो गया। मैंने ऐसा पहले कभी ब्लू फिल्म्स में भी नहीं देखा था।
रीना – देखा लड़के इतना तुम्हारा दस बार में भी नहीं झड़ सकता जितना हम एक बार में निकाल देते हैं।
मैं बोला – इसके स्वाद में तो मज़ा आ गया और कहा कि मेरा वीर्य भी तो चख कर देखो लो
उन्होंने कहा – तो आ जाओ – पहले उन्होंने मेरा लिंग अपने बूब्स में दबा कर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया, मुझे मज़ा आने लगा। मेरा लिंग और कड़ा हो गया। तब उन्होने मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में ले लिया। धीरे धीरे वो उसे पूरा निगलने लगी। मेरी उत्तेजना चरम पर जाने लगी और बंदूक की तरह मैंने उनके मुँह के अंदर वीर्य की धार मार दी।
रीना – ये तो अमृत से भी ज़्यादा स्वाद है। मज़ा आ गया। पर अब मेरी प्यास कौन शांत करेगा। तुम तो दो बार झड़ चुके हो।
अब तो तुम्हारा खड़ा नहीं रहेगा ज़्यादा देर।
मैंने कहा – मैं तो अभी पहले की तरह ही हूं और कई बार और मूठ की धार छोड़ सकता हूं। पर आपका नहीं पता, इतना ज़्यादा झाड़ा है आपने, अब भी है उत्तेजना आपमें बाकी?
रीना – औरत की प्यास को मर्द कभी समझे ही नहीं। मेरा शरीर जल्दी हुई मशाल की तरह है। तुम जैसे लड़को के तो कई लंड जला सकता है।
मैंने कहा – ऐसी बात तो आ जाओ एक बार और मेरे लंड की गिरफ़्त में।
रीना – काफ़ी जल्दी काफ़ी कुछ सीख रहे हो
मैंने कहा – आपका स्टूडेंट हूं ना
रीना – आओ कितने दिनों से ये सील टूटी नहीं है आओ इसे तार – तार कर दो।
मैने अपना सूपाड़ा उनकी चूत पर रख दिया और धीरे धीरे उस पर फेरने लगा।
रीना – तुम तो मुझे जला दोगे। प्लीज़ अब अंदर डाल दो।
मैंने ज़ोर लगाना शुरू किया पर मेरा इतना मोटा और कड़ा था कि अंदर नहीं जा रहा था आसानी से। मैंने ज़ोर लगाया तो उनकी चीख निकल गयी। पर लंड अंदर नहीं गया और चूत से खून निकालने लगा।
रीना – सही में तुम तो मर्द से कुछ ज़्यादा ही हो। खून निकाल दिया मेरी चूत से पर अंदर नहीं गया। थोड़ी सा झाग लगा कर साबुन का फिर कोशिश करो।
मैं बाथरूम से साबुन का झाग ले कर आया और उसे लॅंड पर मसल लिया। अब मैंने ज़ोर लगाना शुरू किया। रीना दर्द से चिल्लाने लगी और मैंने फिर पूरी ताक़त लगा कर एक ज़ोर का झटका दिया और मेरा लंड चूत से खून के छींटे मेरे मुँह पर मारते हुए अंदर चला गया। रीना की साँस गले में ही अटक गयी।
रीना – बड़ा दर्द हो रहा है पर ऐसा मज़ा भी कभी नहीं आया। अब तो मेरी चूत को जला दो एक दम।
मैंने झटके बढ़ने शुरू कर दिए। उनके मुँह से उउऊहह आअहह आआअहह की आवाज़ें तेज आ गयी।
रीना – और ज़ोर से, और ज़ोर से, फाड़ दो मुझे और मेरी चूत को
मैने झटके बढ़ाने शुरू कर दिए और उनकी चूची चूसनी शुरु कर दी। उनकी उत्तेजना और बढ़ने लगी और तब मैंने ध्यान दिया उनके बूब्स और कड़े हो गये तब मुझे लगने लगा कि अब ये झड़ने वाली है मैने झटके तेज कर दिए और तभी मेरा झड़ गया पर मैंने झटके देने चालू रखे और वो इतनी गरम हो गयी कि उनका भी झड़ गया मैंने उनके पानी को अपने मुँह पर मसल लिया और हम दोनो ठंडे पड़ गये। मैं उनके साथ ही उनके बिस्तर पर लेटा रहा कुछ देर तक उनके साथ चिपक कर। अभी भी हम दोनो अपने जिस्म की सिरहन महसूस कर रहे थे।
रीना – तुम्हारा वीर्य तो मेरी चूत मे अंदर चला गया, अगर मैं प्रेग्नेंट हो गयी तो, मैंने कहा चिंता मत करो बाज़ार में कई गोलियाँ आती है जो ऐसा होने पर भी प्रेग्नेन्सी रोक देती है।
वो ले लेना और मैं फिर अपने कपड़े पहन कर बाज़ार चला गया गोलियाँ लाने। अब ये सिलसिला कई दिनों तक चला। फिर उनके पति का ट्रान्स्फर हो गया और मैं अकेला हो गया। Hindi porn stories
दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज.
मेरी सेक्स कहानी के इस भाग में आपका पुन: स्वागत है.
हालांकि इस सेक्स कहानी का शीर्षक अलग है पर यह उसी से जुड़ी हुई कहानी है.
पिछली कहानी
बचपन के प्यार से शादी और सेक्स
में आपने पढ़ा था कि मैंने अपनी बचपन की संगिनी सौम्या से शादी कर ली थी और उसके साथ सुहागरात की चुदाई का मस्त मजा लिया था.
अब आगे वाइफ सिस्टर Xxx कहानी:
शादी के 3 दिन बाद उसकी बहन मानसी चली गई.
फिर हम दोनों भी एक महीने के बाद पुणे आ गए.
मुझे दिल्ली से एक अच्छी जॉब का अवसर मिला तो मैं दिल्ली आ गया.
सौम्या पुणे में ही थी.
मैं दिल्ली आया तो सौम्या ने कहा- आप मानसी के घर में रुक जाना. उसका दिल्ली में अपना फ्लैट है.
यह मानसी मेरी पत्नी सौम्या की चचेरी बहन थी जिसने सुहागरात की चुदाई की चीख सुनी थी.
ये दोनों बचपन से पक्की सहेली रही थीं.
मानसी के मम्मी पापा बचपन में चल बसे थे तो सौम्या के पापा ने उसे अपने बेटी ही माना था और ये दोनों भी एक दूसरे को जान से ज्यादा चाहती थीं.
मानसी भी कमाल की दिखती है, वह बिलकुल दिव्या खोसला कुमार जैसी लगती है.
मैं उसके फ्लैट पर पहुंच गया, घंटी बजाई तो दरवाजा खुला.
वह शायद मानसी की घरेलू नौकरानी थी.
उसने कहा- आप राज जी हो ना!
मैंने कहा- हां.
तो उसने कहा- मुझे मैडम ने बता दिया था. आप बैठिए. मैडम 9 बजे तक आएंगी.
उसने मुझे पानी, कोल्ड ड्रिंक थोड़ा नाश्ता सर्व किया और चली गयी.
मैं फ्रेश होकर टीवी देखने लगा.
थकान के कारण मेरी आंख लग गई.
मेरी नींद तब खुली जब एक मीठी आवाज कानों में पड़ी- उठिए जीजा जी!
मैं उठा और आंख खोली तो सामने मानसी किसी अप्सरा के जैसी खड़ी थी.
सामने से पहली बार उसे गाउन में देखा था. वह बहुत ज्यादा खूबसूरत थी.
उसने एक घुटने तक आने वाला काले रंग का रेशमी गाउन पहना हुआ था जिसका गला काफी खुला हुआ था और उसकी चूचियों के उभार एक पतली सी ब्रा में कैद थे.
पतली सी ब्रा इसलिए लिखा क्योंकि मानसी के मम्मों के कड़क निप्पल उसके रेशमी गाउन के बाहर से ही नुमाया हो रहे थे.
शायद वह खुद ही अपने दूध दिखाने को उतावली लग रही थी इसलिए मेरे उठ जाने के बाद भी वह मेरे सामने झुकी हुई थी ताकि मैं उसके मम्मों का दीदार कर लूं.
मैं उसके मम्मों को ललचाई नजरों से देखते हुए उठा और फ्रेश हुआ.
फिर हॉल में बैठ गया.
वह प्लेट में मेरी फेवरेट पनीर चिली, वेज पुलाव और सलाद लेकर आई.
उसके हाथ में एक व्हिस्की की बोतल थी.
मैंने मादक भाव से उसे देखते हुए कहा- क्या बात है! शवाब के हाथ में शराब!
उसने हंस कर आंख दबाते हुए कहा- जब शवाब और शराब सामने है, तो आओ अब जश्न मनाते हैं.
मैं भी झट से मान गया.
मानसी ने दारू की बोतल खोली और दोनों का पहला पैग बनाया.
हम दोनों ने चियर्स किया और पहला पैग पी गए.
ऐसे ही हम दोनों ने धीरे धीरे 4-4 पैग पी लिए और अब मानसी को नशा चढ़ रहा था.
जब वह पांचवां पैग पी रही थी तो उसका ग्लास गिर गया और दारू उसके टॉप पर गिर गई.
वह तो इतने नशे में थी कि उसको कुछ पता ही नहीं चल रहा था.
लड़खड़ाती हुई आवाज में वह मुझसे बोली- प्लीज मुझे साफ कर दो.
मैंने उसकी तरफ देखा.
मैं भी नशे में आ चुका था.
गाउन में से उसकी छाती पर तनी हुई मोटी मोटी चूचियों की नोकें साफ नजर आ रही थीं.
उसकी फिगर 36-30-38 की थी.
पूरी कयामत लग रही थी.
जैसा कि मैंने आपको बताया कि वह दिव्या खोसला कुमार की तरह दिखती है.
मैं तो उसको देखता ही रह गया और जब वह उठ कर बाथरूम की तरफ अन्दर जाने लगी तो उसकी फूली हुई गांड को देख कर मेरा फौलादी लंड खड़ा हो गया.
मैंने उससे कहा- मैं नहीं कर सकता … क्योंकि उसके लिए मुझे तुम्हारा गाउन भी खोलना पड़ेगा.
वह बोली- प्लीज यार, तुम कुछ भी मत सोचो और तुम जैसे चाहो इसे बस साफ कर दो.
मैंने उसका गाउन उतारा और उसके गाउन को खोलते ही मुझे उसकी लाल रंग की ब्रा के अन्दर उसके बहुत बड़े बड़े मुलायम स्तन नजर आए.
उन्हें देखकर मेरा मन उन्हें पकड़ कर चूसने का हो रहा था.
वह हंसी और बोली- कैसे हैं?
मैंने कहा- बहुत मस्त हैं.
अब तक मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था.
मैंने तौलिये से उसके गोरे गोरे जिस्म को बहुत हल्के हाथों से साफ कर दिया.
मैं उसके मम्मों को देखता रहा.
तभी वह बोली- क्या अब घूरते ही रहोगे या कुछ करोगे भी? प्लीज मेरी ब्रा भी उतार दो न!
उसी समय मुझे सौम्या का भोला चेहरा याद आ गया.
मैंने उससे कहा- ये गलत है. मैं सौम्या को प्यार करता हूँ.
उसने कहा- जीजा जी, सौम्या को सब पता है. आपको प्यार करने वाली वह अकेली नहीं है. वह नाराज़ नहीं होगी.
मैं भी नशे में था, वासना मुझ पर हावी हो रही थी.
मैंने कहा- तुम मुझसे पाप करवा रही हो.
वह हंसी और बोली- मुझे चोदने से तुम पापी नहीं बनोगे, यह बात पक्की है.
जब उसने चुदाई की बात साफ साफ शब्दों में कही तो मेरा लंड भड़क गया.
मैंने धीरे धीरे एक एक करके उसके सभी कपड़े उतार दिए.
जब मैंने उसकी पैंटी को छुआ तो वह चूत रस में एकदम गीली थी.
मैं समझ गया कि इसको भी मेरे छूने से जोश आ रहा है.
लेकिन उसके पूरे कपड़े उतारते ही मेरा तो जैसे दारू का नशा ही उतर गया था.
मैंने धीरे से अपने भी सारे कपड़े उतार दिए.
फिर मैं अपने लंड को शराब से नहला कर उसके मुँह के पास ले गया और उससे बोला- लो लॉलीपॉप चूस लो.
वह भी नशे की हालत में मेरे एक बार कहने से ही मान गई और मेरे लंड को पूरा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं बोतल से बूंद बूंद करके शराब अपने लंड पर टपकाता गया और वह मेरे लौड़े को चूसती हुई शराब को भी पीती गई.
नीचे से मैं उसकी गीली एकदम व गर्म चूत में उंगली कर रहा था.
धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो उसको बहुत दर्द होने लगा और वह ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी.
मैं समझ गया कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी है और आज में पहली बार उसकी चूत का भेदन करूँगा.
उसके लंड चूसने से जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया और सारा वीर्य एक ग्लास में निकाल दिया.
फिर उसी ग्लास में एक और पैग बनाकर मानसी को पिला दिया.
वह बड़े मज़े लेकर पी गई और मैं उसकी चूत चाटने लगा.
थोड़ी ही देर में पूरी गर्म हो गई और उसकी चूत से पानी भी निकल रहा था.
उसको जरा सा भी होश नहीं था कि उसके साथ क्या क्या हो रहा है.
मैंने थोड़ी देर बाद उसे एक पैग बनाकर और पिला दिया और उसे अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में ले आया, उसे बेड पर लेटा दिया.
उसकी कमर के नीचे मैंने एक तकिया रख दिया.
इससे उसकी चूत का मुँह थोड़ा खुल गया और मुझे उसकी चूत का दाना साफ साफ दिखने लगा.
फिर मैंने अपना लंड उसकी गर्म चूत पर रखा और अन्दर डालने लगा.
लेकिन मेरा लंड उसकी टाईट चूत के अन्दर नहीं जा रहा था.
मैंने उसकी कमर को अच्छी तरह कसकर पकड़ा और लंड को चूत के मुँह पर रखकर एक ज़ोर का धक्का दे मारा.
मेरा पूरा लंड उसकी चूत में फिसलता हुआ अन्दर चला गया और मानसी के मुँह से एकदम ज़ोर से चिल्लाने की आवाज बाहर आ गई.
उसका भी दारू का सारा नशा उतर गया.
जब मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत से खून निकल रहा था.
मानसी की आंखों से आंसू निकल रहे थे, सांसें ज़ोर ज़ोर से चल रही थीं.
वह पूरी पसीने से गीली हो चुकी थी और अब उसके मुँह से गाली भी निकलने लगी थी.
मानसी बोली- मादरचोद धीरे पेल साले … लुगाई हूँ तेरी … कोई रंडी नहीं हूँ.
उसकी गाली से मुझे और जोश आ गया और मैंने उसकी एक चूची को जोर से भींच दिया.
‘साली है तू मेरी. अभी बीवी नहीं हुई है.’
मानसी- आज से मैं भी आपकी हुई. अब हम दोनों आपकी पत्नी हैं और आप भी हम दोनों को एक जैसे ही चाहेंगे.
मैंने भगवान से कहा- एक छोड़ कर गई तो आपने दो दो प्यार करने वाली दे दीं.
मन में यह बोलते हुए मैं धीरे धीरे लंड को धक्के देकर उसे चोदने लगा.
वह कुछ बोलना चाह रही थी लेकिन अपनी चुदाई के दर्द के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी.
मानसी बोल रही थी- अह्ह्ह उह्ह्हह्ह बाहर मत निकालो इसे प्लीज … अह्ह्ह अब से मैं आपकी ही हूँ मेरे पतिदेव प्लीज मिसेज राज समझ कर ही मुझे चोदिए … अह्ह्ह्ह.
वह मादक सिसकारियां ले रही थी और मैं लगातार ताबड़तोड़ धक्के दिए जा रहा था.
मेरे लंड के चूत के अन्दर बाहर होने से पूरे कमरे में फच फच की आवाजें आ रही थीं.
कुछ मिनट के धक्कों के बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी.
मैं- क्यों मिसेज राज, अब तो आपको मेरे लंड से चुदाई करने में मज़ा आ रहा है ना?
मानसी- हां पतिदेव अह्ह उह्ह और चोदो मुझे और चोदो … पूरी फाड़ दो आज मेरी चूत को … अह्ह हां और ज़ोर से … भोसड़ा बना दो मेरी चूत का.
मैं तो जैसे उसकी कामुक आवाजों को सुनकर पागल सा हुआ जा रहा था.
मैंने हचक कर चुदाई चालू कर दी.
‘आईईइ अह्ह्ह हां और तेज चोदो मुझे जानेमन चोदो … और तेज़ चोदो … मुझे आज चोदकर एक औरत बना दो.’
मैंने पास में रखी दारू की बोतल से एक लंबा घूंट नीट दारू का लिया और अपनी चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी.
इसी बीच वह झड़ चुकी थी.
दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने पूछा- वीर्य कहां पर निकालूँ?
मानसी- मेरी प्यासी चूत में ही डाल दो और आज इसकी आग बुझा दो.
मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया और थककर बेड पर लेट गया.
हमने उस रात को खूब दारू पी और एक बार चुदाई की.
फिर थककर ऐसे ही नंगे सो गए.
दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर मैंने एक बार और उसकी चूत में लंड डाला और उसे चोदा.
अब वह बड़े आराम से पड़ी रही और मेरे लंड का मज़ा लेती रही क्योंकि रात भर चुदाई से उसकी चूत फट चुकी थी जिसकी वजह से मेरा लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था.
उस दिन हम दोनों कहीं भी नहीं गए और पूरे दिन नंगे ही पड़े रहे.
दोस्तो, अब मानसी और सौम्या हम तीनों पति पत्नी की तरह रहते हैं.
डर्टी Xxx फॅमिली स्टोरी मेरी मम्मी की है. मैं दीदी की चुदाई करता था पर मम्मी को शक हुआ तो उसने दीदी की शादी करवा दी। मैंने अपनी वासना का हल कैसे किया?
नमस्कार दोस्तो, मैं एक बार फिर से आपके सामने अपनी नई सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूं।
मेरी पिछली कहानी
बड़ी सगी दीदी की फुद्दी और गांड का मजा
में मैंने आपको बताया था कि कैसे मैंने अपनी दीदी की चूत चुदाई की और उसकी गांड मारी थी।
आज मैं आपको अपनी मम्मी की डर्टी Xxx फॅमिली स्टोरी बताने जा रहा हूं।
आपको बता दूं कि मेरी मम्मी विधवा है और उसे हम भाई-बहन की चुदाई के बारे में शक हो गया था।
जल्दी ही मम्मी ने दीदी की शादी करवा दी।
अब मुझे चूत और गांड चुदाई के लिए तरसना पड़ रहा था।
जब कभी साल-छह महीने में दीदी घर आती थी तो तभी चूत मिल पाती थी।
उसमें भी मम्मी हम दोनों पर नजर रखती थी इसलिए मजा तो जैसे खत्म ही हो गया था।
ऐसे ही दिन गुजर रहे थे और मेरे अंदर सेक्स की जो आग दबी थी उसमें रोज इंतजार का पेट्रोल गिरता जा रहा था जिससे वो रोज ज्यादा भड़कती जा रही थी।
जब मुझसे रहा न गया तो मैंने सोचा कि मम्मी पर ही ट्राई किया जाए। मेरा डर्टी Xxx विचार था पर मैं वासना से अँधा हो गया था.
मैं अपनी मम्मी के फिगर के बारे में बताऊं तो उसका साइज 36-32-38 का है।
आप सोच सकते हैं कि मेरी मम्मी देखने में कैसी सेक्स माल लगती होगी।
वो अक्सर घर में सूट सलवार और कुर्ता-पजामी या पजामा पहनती है। जिसमें उसकी बाहर को निकली हुई गांड मुझमें बहुत हवस जगाती थी।
एक दिन ऐसा हुआ कि मम्मी किचन में खाना बना रही थी।
मैं बाहर मार्केट से जब वापस आया तो पानी पीने के लिए किचन में गया और जानबूझ कर मम्मी के पीछे खड़ा होकर पूछने लगा- मम्मी क्या बना रही हो तुम?
उस समय वो कुर्ता पजामा पहने खड़ी थी।
मैं थोड़ा आगे को खिसका तो मेरा लंड मम्मी की गान्ड से टच हो गया।
इससे एकदम से लन्ड तनाव में आ गया और मम्मी को भी महसूस हुआ।
वो एकदम से वह वहां से दूर होकर चली गई लेकिन उन्होंने मुझे कुछ नहीं बोला।
उस दिन के बाद से मेरा भी हौंसला बढ़ने लगा और मैं अक्सर उनकी बॉडी को टच करने का मौका देखता रहता।
ऐसे करते करते दो महीने निकल गए और मेरी हवस बढ़ती जा रही थी।
एक दिन मम्मी को बाहर थोड़ा काम था तो मैं मम्मी को बाइक पर ले गया।
आते समय बहुत तेजी से बारिश शुरू हो गई और मैं और मम्मी बारिश से भीग गए।
जब हम घर पहुंचे तो दोनों भीग चुके थे।
मम्मी ने उस समय लाल रंग का प्लाजो और ब्लू कुर्ता पहना हुआ था और गीला होने से उनके कपड़े एकदम उनके शरीर से चिपक गए थे।
इससे उनकी व्हाइट ब्रा पूरी साफ दिखाई दे रही थी।
मम्मी की गांड की शेप देखकर मेरा कंट्रोल छूट गया और मैंने मम्मी को पीछे से जाकर पकड़ लिया और उनकी गान्ड पर अपना लन्ड का दबाव बनाते हुए धक्के लगाने लगा जैसे मैं मम्मी की गांड चोद रहा हूं।
वो बोली- क्या कर रहे हो ये?
मुझ पर हवस सवार थी और मैं कुछ भी नहीं सोच पा रहा था।
मैं सीधे बोला- उस दिन जो किचन में जो अधूरा काम रह गया था, वो पूरा करना है। मैं बहुत प्यासा हूं। मैं रोक नहीं सकता अपने आपको।
ये कहते हुए मैंने मैंने सीधे एक हाथ उनके बूब्स पर रख दिया और आराम आराम से कुर्ते के ऊपर से दबाने लगा।
मम्मी पहले तो थोड़ी छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन बाद में वो गर्म होने लगी।
इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैंने उनका कुर्ता ऊपर किया और प्लाजो के ऊपर से फुदी को मसलने लगा।
अब वो आह … अह … करके थोड़ी थोड़ी सिसकारियां लेने लगी।
यह देखकर मेरा जोश और ज्यादा बढ़ने लगा।
मैंने उनके प्लाजो का नाड़ा खोल दिया। प्लाजो मैंने नीचे किया और निकलवा दिया।
अब वो ऊपर से कुर्ते में रह गई थी और नीचे से केवल पैंटी में।
फिर मैंने कुर्ता हटाकर पैंटी भी नीचे कर दी।
मम्मी की मोटी गांड देखकर मेरा लंड तो फटने को हो गया।
जल्दी से मैंने भी अपने कपड़े उतार फेंके और मम्मी की नंगी गांड पर लंड को रगड़ने लगा।
अब मम्मी ने मेरे हाथों को अपने कुर्ते के ऊपर से अपने बूब्स पर रखवाया और अपने हाथों से दबवाने लगी।
नीचे मेरा लंड कभी मम्मी की चूत तो कभी गांड पर रगड़ खा रहा था।
मजे में मम्मी की आंखें बंद हो चुकी थीं; वो मेरे लंड की पूरी फीलिंग ले रही थी।
उसके मुंह से उम्म … आह्ह … करके सिसकारियां निकल रही थीं।
फिर धीरे धीरे मम्मी का मूड पूरा चुदाई के लिए बन गया और उसने पीछे हाथ लाकर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया।
अभी भी मेरा लंड उनकी गांड से टकरा रहा था।
मैंने पूछा- कैसा लग रहा है मम्मी?
वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है, बरसों की प्यास है, आज बुझवाने का मन कर रहा है; मेरी प्यास मिटा दो।
ये सुनते ही मैं भी मम्मी की चुदाई करने के लिए तैयार हो गया।
मुझे भी बहुत दिनों से चूत नहीं मिली थी इसलिए चुदाई के अलावा मन में कोई दूसरा ख्याल नहीं आ रहा था।
मैंने उनकी गांड पर हाथ टिका दिए और जोर जोर से दबाने लगा।
उस वक्त इतना मजा आ रहा था कि बस बता नहीं सकता।
मम्मी की 36 साइज की चूचियों को दबाते हुए मैं जोर जोर से उनकी चूत के होंठों पर लंड को रगड़ रहा था।
इससे मम्मी की चूत से पानी निकलने लगा था और वो चिकनी हो गई थी।
मम्मी की चूत का गीलापन मैं अपने लौड़े पर लगता हुआ महसूस कर सकता था।
अब मैंने मम्मी को अपनी साइड घुमाया और स्मूच करने लगा।
साथ में नीचे से मैं हाथ से उनकी चूत को भी रगड़ रहा था।
मम्मी की चूत की आग अब हर पल बढ़ती जा रही थी।
मॉम ने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसकी मुठ मारने लगी।
कभी उसको अपनी चूत पर लगाकर मेरे कूल्हे पर टांग चढ़ा लेती थी ताकि मैं उनकी चूत में लंड घुसेड़ने पर मजबूर हो जाऊं।
मगर मैंने लंड की बजाय उनकी चूत में उंगली दे दी।
मैं एक उंगली देकर तेजी से अंदर बाहर करने लगा जिससे मॉम और ज्यादा तड़पने लगी।
मम्मी की पूरी बॉडी कांप रही थी।
मैंने और तेजी से उंगली करना शुरू कर दिया।
कुछ देर के बाद मॉम की चूत ने पानी का फव्वारा छोड़ते हुए मेरे हाथ को भिगो दिया।
उनकी चूत पूरी पानी में गीली हो गई।
मैंने उनको बेड के किनारे पर बैठाया और उनकी चूत में मुंह लगाकर चाटने लगा।
उनको गुदगुदी हो रही थी लेकिन मजा भी आ रहा था।
मैं अंदर तक जीभ घुसाकर उनकी चूत को चाट रहा था।
उनकी चूत के नमकीन पानी का स्वाद मेरे मुंह में आ रहा था।
मॉम दोबारा से गर्म होने लगी और मेरे मुंह को चूत में दबाने लगी।
मैंने उनको बेड के किनारे पर ही घोड़ी बना दिया और लंड को चूत पर सेट कर दिया। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और चूत के मुख पर लंड को ऊपर नीचे करते हुए रगड़ने लगा।
इससे मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं।
मॉम की चूत में मैंने पीछे से लौड़ा पेल दिया।
उनकी चीख निकल गई और आईई … उईई … आह्ह … मर गई … करके वो चिल्लाने लगी।
शायद बहुत समय से मम्मी ने चूत में कुछ नहीं लिया था।
मैंने पूरा लंड अंदर पेलकर उनकी चूत को चोदना शुरू कर दिया।
कुछ देर तक तो मॉम ऐसे ही दर्द में छटपटाती रही।
वो बार बार छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने उनको साइड से पकड़ा हुआ था।
मेरे दोनों हाथ मॉम की गांड पर दोनों तरफ कसे हुए थे।
मैंने फिर गांड को ऐसे ही पकड़े हुए मॉम की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।
मेरा लंड मॉम की चूत में अब स्पीड से अंदर बाहर होने लगा।
पांच मिनट के बाद मॉम को चुदाई में मजा आने लगा।
वो आराम से आह्ह … आह्ह … करते हुए चुदने लगी।
फिर मॉम ने मुझे रुकने का इशारा किया।
मैंने लंड के धक्के लगाने बंद किए और मॉम ने आगे सरक कर लंड को अपनी खुल चुकी चूत से पक् … से बाहर निकलवा लिया।
मैं समझ नहीं पाया मॉम ने ऐसा क्यों किया।
वो पलट गई और फिर मेरे सामने टांगें खोलकर लेट गई।
मुझे समझ आया कि मॉम आगे से चुदवाना चाहती है।
फिर उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मैंने फिर से उनकी टांगें फैलाते हुए लंड को चूत में पेल दिया।
अब मैं मम्मी के जिस्म के ऊपर लेट गया और चोदने लगा।
उनकी टांगों ने मेरी गांड को जकड़ लिया और मुझे नीचे खींचकर मेरे होंठों को चूसने लगी।
नीचे से मेरा लंड पूरी तेजी से मॉम की चूत में अंदर बाहर हो रहा था।
अब मॉम की चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी।
काफी देर तक मैं इसी पोज में उनकी चुदाई करता रहा।
फिर उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और खुद मेरे ऊपर बैठकर मेरे लंड की सवारी करने लगी।
वो बहुत चुदासी लग रही थी, उनकी चूचियों के निप्पल एकदम से तनकर खड़े हो चुके थे।
नीचे से धक्के लगाते हुए मैंने उनकी चूचियों को भी भींच रहा था।
अगले पांच मिनट तक मॉम मेरे लंड पर उछलती रही।
फिर मेरा माल निकलने को हो गया।
मैंने कहा- मॉम, मेरा होने वाला है।
वो बोली- तुम देख लो, कहां निकालना चाहते हो!
मैंने उनको उठने के लिए कहा और बेड पर घुटनों के बल कर लिया।
कुतिया वाली पोजीशन में मैंने मम्मी के मुंह में अपना लंड दे दिया और चुसवाने लगा।
वो भी भूखी रंडी की तरह मेरे लंड को चूसने लगी।
मॉम मेरी बहन से भी ज्यादा अच्छी तरह से लंड चूस रही थी।
मुझे लंड चुसवाने में बहुत मजा रहा था लेकिन ये मजा देर तक टिक नहीं पाया।
2-3 मिनट की चुसाई के बाद मेरे लंड ने माल मॉम के मुंह में गिराना शुरू कर दिया।
मैंने सारा माल उनके मुंह में उड़ेल दिया जिसे मॉम पूरा अंदर निगल गई।
कुछ देर तक हम दोनों वहीं बेड पर पड़े रहे।
हमें सामान्य होने में 10 मिनट का समय लग गया।
उसके बाद मॉम उठकर वॉशरूम में गई और मैं भी मॉम के पीछे वॉशरूम में चला गया।
अंदर जाकर मैंने मॉम को फिर से बांहों में भर लिया।
मैं उनकी चूचियों को चूसने लगा और चूत को रगड़ने लगा।
हम दोनों फिर से गर्म हो गए।
उसके बाद मैंने मॉम को वहीं सीट पर बिठा लिया और उनकी चूत को चूसने लगा।
मम्मी की चूत फिर से गर्म हो गई और उनकी चूत से नमकीन रस का स्वाद आने लगा।
अब मैंने उनको खड़ी किया और दीवार के साथ सटा दिया।
उनका मुंह दीवार की तरफ था और गांड मेरी तरफ।
मैंने पीछे से टांगों को फैलाते हुए उनकी चूत में लंड को पेल दिया और दीवार की तरफ धक्के लगाते हुए चूत को चोदने लगा।
मैं जोर जोर से झटके देने लगा।
वो भी मेरा पूरा साथ देते हुए गांड को लंड की तरफ उछाल रही थी।
लगभग 5 मिनट तक मैंने मॉम की चुदाई दीवार से सटाकर ही की।
फिर मैंने उनको नीचे फर्श पर लिटा लिया और खुद ऊपर आकर चोदने लगा।
अब मॉम को चुदते हुए मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था।
वो मेरी पीठ को नोंचते हुए चुद रही थी।
उनकी आंखों में संतुष्टि आती साफ दिख रही थी।
इस तरह मैंने वॉशरूम में मम्मी को बहुत देर तक अलग अलग आसनों में बहुत चोदा और पूरा माल उनके बूब्स पर डाल दिया।
मम्मी भी उस चुदाई में 2 बार झड़ गई।
फिर हम दोनों नहाकर बाहर आ गए और उस दिन के बाद हमारे बीच चुदाई का रिश्ता भी बन गया।
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