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गुरूजी आपने मेरी सही Hindi Porn Stories अनुभव वाली कहानी स्वर्ग का अनुभव प्रस्तुत की, उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ।
मैंने कभी सोचा भी नहीं था किमुझे इतने सारे मेल आयेंगे, खास करके लड़कियों और औरतो के मुझे बहुत मेल आए। आपका इतना प्यार देखकर मुझे एक और सही अनुभव वाली कहानी प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिली है। इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है बल्कि मेरे साथ जो हो चुका है वो ही मैं आपको बता रहा हूँ।कहानी को रसदार बनाने के लिए मैंने इसमें कोई बात भी अपनी तरफ़ से नहीं जोड़ी है।
कहानी प्रस्तुत करने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मैं अहमदाबाद में रहने वाला लड़का हूँ, मेरी उम्र ३५ साल की है। दिखने में स्मार्ट हूँ। मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट एक्जीक्यूटिव की जॉब करता हूँ। मैं जिस कंपनी में काम करता हूँ, उसकी मैडम के साथ मेरा सम्बंध है। उसकी उम्र ४५ साल है। वो दिखने में बहुत खूबसूरत है। उसको मेरे पर बहुत भरोसा है और वो भरोसा मैं कभी नहीं तोडूंगा। यह उसी की कहानी है।
एक दिन छुट्टी से पहले वाले दिन हमने छुट्टी के दिन कहीं पर मिलने का नक्की किया(कार्यक्रम बनाया)।
उसने कहा- घर मे मिलने से कोई न कोई आता जाता रहता है, इसलिए हम किसी होटल में मिलते हैं। तुम कोई अच्छा सा ए सी कमरा बुक करना।
फ़िर दूसरे दिन मैं सुबह होटल का कमरा खोजने निकल गया। मैंने एक अच्छे होटल में ए सी कमरे का रेट पूछा, उसने मुझे ४ घंटे के ७०० रूपए बताये, मैंने कमरा बुक कर लिया फ़िर मैंने मैडम को बताया के मैंने एसी कमरा बुक कर लिया है। मैंने होटल का पता मैडम को दे दिया और कहा- मैंने यहाँ पर अपने नाम बदल कर कमरा बुक किया है। आप यहाँ आ कर अपना नाम पूजा बताना और कहना कि मुझे अनिल से मिलना है जो २०३ नम्बर के कमरा में ठहरे हैं। तो उसने सब बात समझ ली और मुझे दोपहर को २ बजे वहाँ आने का बोल दिया।
मैंने तो १ बजे कमरे में जा कर स्नान कर लिया।
अब वो करीब २ बजे मेरे कमरे में आ गई। उसने भी ‘मैं फ्रेश होकर आती हूँ’ कह के स्नान कर लिया, क्योकि जब हम स्नान कर के सेक्स करते हैं तो मजा दुगना हो जाता है। फ़िर वो स्नान कर के सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर आ गई। मैं तो उसको देख कर देखता ही रह गया। वो तौलिये में बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैं तो पहले से ही तौलिये में था।
फ़िर हम दोनों पलंग पर आ गए। हमने कुछ बीते हुए पलों के बारे में बात की। फ़िर मैंने उसके गाल पर और होठों पर किस किया, उसका तौलिया निकाला, उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। मैंने उसे एक बार कहा था कि तुम पर लाल रंग की ब्रा और पैंटी खूब जमती है। उसने वो याद रख लिया था और ऐसा ही किया था। वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
फ़िर मैंने उसके सारे बदन पे चुम्मी ली। उसकी पैंटी के साथ में ही उसके चूतड़ को भी चूमा, उसके पैर के अंगूठे को भी चूमा, उसके कान को भी चूमा। उसका कोई अंग ऐसा नहीं रहा था कि मैंने उसे वहाँ चूमा न हो। फ़िर मैंने उसके होठों को अपने होठों से लगा लिया। हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूसरे के मुँह में मुँह रख कर चूमते रहे। उसकी जीभ से अपनी जीभ लगा कर हम दोनों ने एक दूसरे का रसपान किया। हम दोनों दो नहीं बल्कि एक ही हैं ऐसा हमको महसूस होता था।
फ़िर मैंने उसकी ब्रा को निकाला। उसके स्तन बहुत बड़े और रसीले थे। मैं करीब ५ मिनट तक उनको चूसता रहा। मैं किसी जन्नत की सैर कर रहा हूँ ऐसा मुझे महसूस होने लगा। अब वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। फ़िर उसने मेरे तौलिए को निकाला और मेरी छाती को चूसने लगी। फ़िर उसने मेरे होठों को चूमा, वो चूमते चूमते नीचे तक आई। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था, वो उसने निकाल दिया।
मैं भी बहुत उत्तेजित हो चुका था, उसने मेरे ७” लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह वो तो उसे चूसने लगी। अब मैं आपे में नहीं रह पाया। वो करीब ५ मिनट तक मेरा लंड चूसती रही। उसके ऐसा करने से मैं झड़ गया। मैंने बाथरूम में जा कर साफ़ कर लिया। फ़िर मैं वापिस आ गया, मैंने उसे बोला- अभी तो शुरूआत है, अब मेरा सेक्स लम्बी देर तक चलता रहेगा।
फ़िर मैंने उसकी पैंटी को निकाला, उसने अपनी चूत के सारे बाल हटा के रखे थे। फ़िर मैंने उसकी चूत को चाटने का शुरू किया, उसकी चूत में से अजीब सा पानी निकल रहा था, मैं वो सारा पानी निगल गया। वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और लम्बी लम्बी आहें भरने लगी थी। हम दोनों कहीं स्वर्ग में पहुँच गए हो और आनंद लूट रहे हों, ऐसा हम दोनों को महसूस हो रहा था। मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में बहुत अन्दर तक ले जाता था।
फ़िर मैंने अपना ७” का लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। फ़िर मैं उसे धीरे धीरे पेलने लगा. करीब २० मिनट तक मैं ऐसे ही पेलता रहा। मैं एक बार झड़ चुका था इसलिए दूसरी बार जल्दी झड़ जाने की कोई गुन्जायिश नहीं थी। अब मैं बहुत जोरों से धक्के देने लगा। वो भी उसमें धक्के दे कर मुझे साथ देने लगी। हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फ़िर हम दोनों साथ में ही झड़ चुके।
फ़िर थोड़ी बात हमने की और हम दोबारा शुरू हो गए। मैंने उसके साथ फ़ोर-प्ले शुरू कर दिया इसलिए वो दुबारा तैयार हो गई। मैंने उसकी चूतड़ को बहुत चाटा और फ़िर मैंने अपना लण्ड उसमें डाल दिया। फ़िर हम दोनों साथ में झड़ गए। यह झड़ना मेरा तीसरी बार का और उसका दूसरी बार का था। वो तो सोचते ही रह गई कि मैं एक ही साथ में तीन बार सेक्स कर सकते हूँ। उसने मुझे कहा- तुम्हारी पत्नी बहुत खुशकिस्मत है जिसे तुम जैसा पति मिला है। मेरे हसबंड बिज़नस के टेंशन में ही रहते हैं। और ६ महीने में एक बार सेक्स करते है और उसमें भी मुझे तो मजा नहीं आता। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ सकती।
फ़िर मैंने भी उसे ऐसा वादा करके अपने गले से लगा लिया। हमने करीब ३ घंटे तक सेक्स किया। उसने कहा कि तुम्हारे साथ तो पूरी रात हो तो भी कम है। ऐसा स्वर्ग का अनुभव हम दोनों ने कभी नहीं किया. मैं अपने बारे में कम और उसके बारे में ज्यादा सोचता हूँ कि उसको ज्यादा से ज्यादा आनंद कैसे मिल पाये।
हम ऐसे ही होटल में एक ही बार नहीं बल्कि बहुत बार मिल चुके हैं।
ऑफिस से निकलते हैं तो रात को उसकी गाड़ी में भी अंधेरे में मिलते रहते हैं।
मैं कोई कथाकार नहीं हूँ, पर यह मेरे सही अनुभव की कहानी है इसीलिए मैं कहानी में जान डाल सकता हूँ।
मेरी सही अनुभव वाली दूसरी कहानी मैं बाद में बताऊंगा अगर तुम्हारे मेल मुझको आते रहेंगे तो ! ख़ास करके लड़की और औरत के। Hindi Porn Stories
इसके पहले की कहानी को Hindi Sex Stories आप लोगों ने बहुत सराहा तो मैंने सोचा कि अपना अगला अनुभव भी आप लोगों को बताया जाए। तो अब मेरी कहानी पढ़िये !
एक बार फिर बता दूँ, मै एक जवान लड़का हूँ। मैं जब पटना में रह कर पढ़ता था तो मेरे कमरे के नीचे एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक आरती नाम की औरत और उसके पति रहते थे। उसके दो छोटे लड़के भी थे। उसके पति सुबह छः बजे काम पर चले जाते थे, बच्चे पास के ही एक स्कूल में पढ़ने जाते थे, तो आठ बजे के बाद बच्चे भी चले जाते थे। आरती का कमरा नीचे था और मेरा कमरा ऊपर था। आरती देखने में काफी सुंदर थी, मैं उसे भाभी कहकर बुलाता था। बात करने में वो काफी माहिर थी, ऊपर मेरे कमरे में आकर बात करने लगती थी, वो छत पर कपड़े पसारने आती थी तो उसकी चूचियाँ ब्लाऊज़ को फाड़ने पर तुली रहती थी। देखने में वो दो बच्चो की माँ कभी नहीं लगती थी। मै तो बार बार उसकी चूची को ही देखता था। शाय्द उसका पति उसको मन से कभी नहीं चोदता था इसलिए वो प्यासी प्यासी निगाहों से देखती रहती थी।
मै कभी कभी उसके कमरे में टी.वी देखने चला जाता था। दिन में अकसर वो अकेली ही रहती थी। मुझे पूरा मन रहता कि उसे चोदूँ पर मैं उसे बोल नहीं पाता था, डर लगता था।
एक दिन की बात है, मैं दोपहर में उसके कमरे में गया तो दरवाजा से आवाज दी तो कोई नहीं बोला। तो मैंने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो देखा कि दरवाजा नहीं लगा हुआ है।
मैं अन्दर घुस गया और सीधे भाभी के टी.वी. वाले कमरे में चला गया।
जब वहाँ पहुँचा तो देखा कि भाभी पलंग पर सोई हुई हैं और टीवी चल रहा है।
वो उस समय साड़ी में थी, उनकी साड़ी उनके घुटने तक आई हुई थी। यह देखकर मेरी नीयत खराब हो गई। अब मुझे लगा कि मैं उनकी बुर में सीधे लंड पेल दूँ पर मुझे डर लग रहा था कि भाभी जग जायेगी तो शोर न मचाने लगे !
मैं बहुत हिम्मत करके उनके पास गया और उनकी साड़ी को ऊपर सरकाया। जैसे ही साड़ी को ऊपर किया, उनकी काली काली झांट नजर आने लगी। मै तो उनकी लम्बी-लम्बी झांटों को देखकर दंग रह गया।
धीरे-धीरे मैंने उनकी साड़ी को और ऊपर कर दिया, फिर उनके चेहरे पर देखा तो वो आराम से सो रही थी। मेरा साहस बढ़ गया। उनकी बुर को देख कर ऐसा लग रहा था कि काले जंगल में कोई घाटी हो। अब मुझसे रहा नहीं गया, मैं झट से अपना लंड सहलाने लगा।
इतने में भाभी जग गई और मेरे लंड को पकड़कर बोली- लाओ इसको मेरे हवाले कर दो ! कब से इस साले को मैं खोज रही थी, तुमने इसे कहाँ छुपा रखा था।
जब भाभी ने ऐसा कहा तो मेरा सब डर दूर भाग गया।
भाभी ने कहा- मैं सोई थोड़े ही थी, सब देख रही थी कि तुम क्या करने वाले हो !
भाभी ने कहा- साला मेरा पति मुझे चोदता ही नहीं है, वो बहुत थका रहता है।
भाभी मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। फिर मैंने भाभी को जमकर चोदा।
तब से दो साल लगातार मैंने भाभी को चोदा, हर रोज़ दिन में उनको चोद कर मस्त कर देता।
एक बार भाभी की छोटी बहन उनके घर आई थी। भाभी ने उसको चोनने में मेरी मदद की।
इस बात को मैं अपनी अगली कहानी में लिखूंगा।
यह कहानी आपको कैसी लगी, मुझे जरुर लिखिएगा। Hindi Sex Stories
रोज की तरह मैं और Antarvasna दिव्या अपने ऑफ़िस में बैठे हुये काम रहे थे। दिव्या हमेशा अपने कम कपड़ों में मुझे उत्तेजित करने का प्रयास करती रहती थी। उसे देख कर मैं भड़क भी जाता था और फिर वो चुद भी जाती थी पर अब असमय भी चुदाई करने में मजा नहीं आता था। पर आज मुझे ताऊजी फोन आया कि विक्की और सोफिया गोआ घूमने आ रहे हैं। दिव्या विक्की को नहीं जानती थी। उसके आने की सूचना पाकर मुझे बहुत ही खुशी हुई।
ठीक समय पर मैं अपनी कार लेकर दिव्या के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच गया। ट्रेन आ चुकी थी। मैंने मोबाईल पर सोफिया को बता दिया था कि मैं और दिव्या बाहर खड़े इन्तज़ार कर रहे हैं। कुछ ही देर में एक बेहद खूबसूरत लड़की और एक सुन्दर सा हीरो जैसा लगने वाला लड़का दिखाई दिया। मेरा अनुमान सही था। वही दोनों सोफिया और विक्की थे। पहले तो वो दोनों बाहर खड़े हो कर यहाँ-वहाँ देखते रहे। दिव्या ने मुझे कहा,”शायद वो ही है … लड़का तो बड़ा मस्त है यार … “
“तुझे तो बस लण्ड ही देखता है … जा कर पता कर … ” दिव्या को तो मौका चाहिये था। कार से उतर कर सीधे उस लड़के पास गई। लड़का दिव्या को देखता ही रह गया। सोचने लगा कि ये अचानक एक जवान सी सुन्दरी उसके सामने कौन आ गई। मैं कार से उतर चुका था और उनकी तरफ़ देखा, वो आपस में कुछ बाते कर रहे थे और सोफिया का हाथ मेरी ओर लहरा उठा। आते ही सोफिया ने मुझे औपचारिक तौर पर किस किया, पर शरारत के साथ … अपनी चूचियाँ मेरी छाती से लगा कर मेरे बदन में सिरहन पैदा कर दी। मुझे तुरन्त मालूम हो गया कि ये खूबसूरत सी मेरी कजिन शरारती टाईप की है। विक्की और दिव्या साथ बैठ गये और सोफिया मेरे साथ आगे बैठ गई। मुझे लगने लगा कि कुछ समय तो बड़ा मजेदार निकलेगा।
घर पहुंचने पर शाम को हम घूमने का कार्यक्रम बनाने लगे। कुछ ही समय ने दिव्या ने विक्की से अच्छी दोस्ती कर ली। विक्की भी खुश था। इधर सोफिया भी मेरे साथ बहुत ही इनफ़ॉर्मल हो गई थी। कुछ ही समय में मुझसे खुल कर बातें करने लगी थी। दिव्या से मेरे सम्बंध के बारे में पूछने लगी थी। मैंने उसे खुलने पर स्पष्ट बता दिया था कि वो मेरी दोस्त है, आज कल वो मेरे साथ ही रह रही है, और इसमे कोई बुराई नहीं है। सोफिया भी मेरे खुलेपन से बहुत खुश थी … शायद वो अपनी इस यात्रा को मजेदार और मस्त बनाना चाहती थी। घर पहुंचने पर हमने लन्च लिया और वो दोनों आराम करने लगे। दिव्या मेरे साथ लेटी हुई सोफिया की बातें ही कर रही थी और मेरे मन की टोह ले रही थी।
शाम को हमने समुद्र के किनारे जाने का प्रोग्राम बना लिया और लगभग छः बजे हम चारों बीच की ओर रवाना हो गये। रास्ते में हमने दो-दो पेग काजू फ़ेनी के भी लिये और कुछ फ़्राई की हुई फ़िश और चिकन रख लिया था।
कुछ ही देर में हम बेनौलिम बीच पर पहुंच गये। लम्बा सा बीच था। कुछ और भी लोग वहाँ पर थे। हम लोग बीच के पास ही चादर बिछा कर बैठ गये। दिव्या तो अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ ब्रा और पेण्टी में ही समुद्र की ओर भाग ली, विक्की भी अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ अंडरवियर में दिव्या के पीछे हो लिया।
सोफिया ने मुझसे कहा,”आप नहीं चलोगे क्या ?”
“आप साथ चलोगी … ?”
“मुझे शरम आती है दिव्या जैसे कपड़ों में … “
“मुझे तो नहीं आती है, ये देखो … ” मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये … बस अंडरवियर में था। पर ये भूल गया था कि मेरा लण्ड उस छोटे से अंडरवियर में साफ़ उठा हुआ नजर आ रहा था। सोफिया ने मेरे लण्ड के उभार को अच्छी तरह से निहारा और कुछ उत्तेजित हो गई।
“फिर तुम उधर देखो … मैं कपड़े उतार लेती हूँ … ” उसने भी शर्माते हुये अपने कपड़े उतार दिये। उसका गोरा बदन दमक उठा। ब्रा में से चूचियां जैसे उछल कर बाहर आने को बेताब हो रही थी। मेरा मन विचलित हो उठा। लण्ड और कड़ा हो गया।
उसकी बहुत ही छोटी सी पेण्टी में से उसके तराशे हुये चूतड़ और उसकी गोलाईयाँ मेरी जान निकाल रही थी। पतली कमर, उभरे हुये कामुक कूल्हे, तराशी हुई जांघें मुझे मदमस्त कर रही थी। जाने कब मेरे दोनों बाहें उठ गई उसे अपनी आलिंगन में लेने के लिये। और सोफिया भी मंत्र मुग्ध सी मेरी बाहों में सिमट आई। हमारे नंगे बदन आपस में छूते ही ही जैसे आग बनने लगे। सोफिया के होंठ मेरे गर्दन और होंठ के पास रगड़ खाने लगे। अपने चूतड़ों को दबा कर जैसे मेरे लण्ड का स्पर्श अपनी चूत से करने लगी। हम दोनों अब वही दरी पर लेट गये और एक दूसरे से लिपट कर जैसे लोट लगाने लगे। हम लोट लगाते हुये रेत पर आ गये हमें पता ही नहीं चला। मेरे हाथों ने ब्रा के ऊपर से ही उसकी एक चूची दबा दी … सोफिया सिसक उठी। दूसरी लोट में सोफिया मेरे ऊपर सवार थी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी थी। मुझे उसकी चूत के पास कुछ कड़ा सा लगा। शायद इसी हालत में काफ़ी देर तक आनन्द में प्यार करते रहे थे।
“बस करो भई … ये एक समुद्र का तट है … कोई कमरा नहीं ” दिव्या की खनकती हंसी सुनाई दी। हमें समय का ध्यान ही नहीं रहा … वो दोनों वापस आ चुके थे। सोफिया को तो पहले कुछ समझ में नहीं आया फिर जैसे एक दम होश में आई। इतनी देर में विक्की की उत्तेजना बढ़ गई। उसने हमारी हालत देख कर दिव्या को दबोच लिया और उसकी गीली पेण्टी उतार दी। उधर दिव्या ने भी बेशर्मी से विक्की का लण्ड पकड़ लिया। अब विक्की और दिव्या भी नीचे दरी पर एक दूसरे को दबाये हुये चोदने की कोशिश कर रहे थे। सोफिया मेरे उपर से हट चुकी थी और मैं भी उठ खड़ा हुआ था। दोनों को बड़ी मुश्किल से खींच कर अलग किया।
अरे ये सब यहां नहीं … यहां से चलो अभी … दिव्या … चलो कपड़े पहनो, गश्ती जीप आ रही है।
“घर चलो ना … तुम्हें तो बस करने की लगी है … और ये सार्वजनिक स्थल है … ” विक्की को सोफिया ने समझाया, दिव्या अपने बदन पर से रेत साफ़ कर रही थी। मैंने यहाँ-वहाँ देखा … अधिकतर लोग जा चुके थे और एक गश्ती जीप की रोशनी नजर आ रही थी, जो पास आती जा रही थी। कपड़े पहन कर हम कार में बैठे ही थे कि वो गश्ती जीप पास में आकर रुकी,”ओह जो साहब … गुड इवनिंग … कैसे हो … “
“क्या यार … गोआ में रहो तो पूरे समय … रिश्तेदारो को घुमाते ही रहो … “
“हां यार ये तो गोआ में रहने की सजा है … ” और हंसता हुआ आगे बढ़ गया।
हम लोग रेत से निकल कर बाहर आये और कार में बैठ कर वापस मडगांव रवाना हो गये।
घर पर आते ही पोर्ट वाईन का एक एक पेग बनाया और सभी सोफ़े पर बैठ कर सिप लेने लगे। दिव्या और विक्की की शरारतें बढती जा रही थी। वो सब चुपके से कर रहे थे, पर मेरी तेज निगाहें उसकी हर हरकत देख रही थी। सोफिया भी मुझे चोरी चोरी देख रही थी। मैंने सोफिया का हाथ जान कर के दबाया। पर अप्रत्याशित रूप से उसने अपना हाथ खींच लिया। मुझे झटका सा लगा।
“क्या हुआ … ?”
“अपना हाथ दूर रखो … “
“पर वहां समुद्र के किनारे तो … “
“वो तो बस मुझे कुछ हो गया था … सॉरी … जो … ” सोफिया उठ कर चली गई। मैं निराशा से उसे देखता रह गया। दिव्या ने पलक झपकते ही सारा मामला समझ लिया। वो तुरन्त मेरे पास आ गई।
“जो … मैं तो हू ना … उससे अधिक सुन्दर … उससे अधिक मजा दूंगी … ” विक्की भी उठ कर मेरे पास आ गया।
“जो मैं दीदी को समझाता हूँ … ” विक्की को अपना कार्यक्रम भी बिगड़ता नजर आया।
“नहीं विक्की … ये दिल के सौदे है … तुम दोनों मस्ती करो … जाओ … ” मैंने उठते हुये कहा।
“चलो दिव्या … अन्दर चलते हैं … “विक्की ने दिव्या का हाथ पकड़ा … दिव्या ने उसे देखा और गुस्से में बोली,”मेरा जो दुखी है और तुम्हें … जाओ , अब सो जाओ … मैं जो के साथ रहूंगी।” दिव्या ने अपना फ़ैसला सुना दिया।
“दिव्या प्लीज … विक्की को ऐसा मत कहो … उसे खुशी दो … जाओ, दोनों मजे लो और दो !” मैंने कहा और अपने कमरे में चला आया।
मन में थोड़ी सी बैचेनी सी लगी। यूं तो मैंने कई लड़कियों को चोदा था सो आज सोफिया चुदने को नहीं मिली, तो इतना बुरा नहीं लगा। कुछ ही देर में सब कुछ भूल कर मैं गहरी नींद में सो गया। अचानक रात को मेरी नींद किसी की आहट से खुल गई। उसी समय कमरे की बत्ती भी जल गई। देखा तो सोफिया सामने खड़ी थी।
“जो … बुरा लग गया ना … मुझे माफ़ कर दो … ” नींद में अलसाया सा भी उसकी सूरत देख कर मुझे हंसी आ गई।
“अरे नहीं नहीं … ये सब कुछ नहीं … मुझे आपकी फ़ीलिंग्स का ध्यान रखना चहिये था … ” मैंने उस बात को हवा उड़ाते हुये कहा।
“नहीं … मैं सच में बीच पर आप पर मोहित हो उठी थी … और मेरे मन में भावनायें जाग उठी थी … “
“मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था … पर भूल जाईये उस बात को … “
“कैसे भूल जाऊँ … विक्की और दिव्या तो मौज कर रहे है … पर मैं अभागी … हाय रे मैं माहवारी से हूँ … क्या करती … मुझे माफ़ कर दो … ” वो मेरे बिस्तर के सिरहाने आ कर बैठ गई … और मेरे बालों से खेलने लगी।
“सोफी … ऐसे समय में ये होता है … और असमंजस की स्थिति होती है … ” मैंने उसे सामान्य करने की कोशिश की … । पर उसका चेहरा मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ता ही गया और अब उसके नरम होंठ मेरे होंठों से प्यार कर रहे थे। एक व्हिस्की का भभका मेरे नाक के नथुनों से आ टकराया। पर वो अपने पूरे होश में थी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और अधरपान का आनन्द लेने लगा। मैंने धीरे धीरे उसे कमर से पकड़ कर अपने शरीर से लिपटाना आरम्भ कर दिया। बिना कोई विरोध किये वो मेरे ऊपर आकर लेट गई और अब अब हम एक दूसरे की आगोश में थे। उसकी चूत ऊपर से ही मेरे लण्ड के ऊपर जोर मार रही थी … पर अब मुझे उसके लगाये गये नेपकिन का अहसास होने लगा था। मुझे कुछ भी करते हुये डर लग रहा था कि कहीं मेरी किसी भी हरकत से नाराज ना हो जाये।
सोफिया की बैचेनी बढ़ने लगी, उसने मेरे हाथ खींच कर अपने स्तनों पर रख दिये। साधारण साईज़ के स्तन थे … पर निपल कठोर और तने हुये थे … कुछ बड़े से लग रहे थे। मैंने उसकी चूंचियाँ धीरे धीरे सहलाना और गुदगुदाना आरम्भ कर दिया। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी …
अब वो मेरे बिस्तर पर मेरी बगल में लेट गई थी। वो मुझे बहुत ही प्यार से देख रही थी … उसकी चूंचियों के सहलाने और निपल को हल्के से मलने पर उसे बहुत आनन्द आ रहा था। उसने मुझे देखा और नजरें दबा कर इशारा किया … और उसका हाथ धीरे से मेरी चड्डी के ऊपर आ गया और हौले से मेरे लण्ड को दबा दिया। कुछ अजीब सी स्थिति थी … चूत पर लाल पट्टा चढ़ा था और उसका मन चुदने को कर रहा था … या कुछ ओर ही … । उसके पतले से सफ़ेद पाजामे पर हाथ घुमाते ही मालूम हो गया कि … पट्टा लगा हुआ था। वो मेरे लण्ड को अब दबाने और सहलाने लगी थी। मेरी छोटी सी चड्डी में से अब मेरा लण्ड नहीं समा रहा था। साईड से सोफिया ने मेरा लण्ड खींच कर निकाल लिया और अब उसके साथ खेलने लगी। कभी वो मुठ मारती और कभी वो लण्ड को अपने शरीर से रगड़ती। उसके निपल और सारे उभारों को मैं सहला कर दबा रहा था। उसकी सिसकारियाँ बढ़ रही थी। मेरा लण्ड भी उत्तेजना के मारे फ़ूल रहा था। सोफिया के आंखो में वासना के गुलाबी डोरे उसकी उत्तेजना को दर्शा रहे थे।
मैंने अपनी सहन शीलता खो दी और सोफिया की चूत दबा डाली। वो एकदम से सिमट गई और एक जोर से सिसकारी भरी और झड़ने लगी। मुझे अहसास हुआ कि शायद वो यही चाह रही थी। अपनी आंखें बंद किये वो झड़ने का आनन्द लेने लगी। मैंने भी उसका शरीर को सहलाना और दबाना जारी रखा। धीरे धीरे सोफिया सामान्य होने लगी। उसका हाथ मेरे लण्ड पर कस गया। मेरे लण्ड में उसके हाथों से मीठी सी सुरसुराहट जागने लगी। मैंने सोफिया को प्यार से अपने शरीर से लिपटा लिया और प्यार करने लगा।
मुठ मारते मारते मेरा लण्ड भी कड़कने लगा … मुझे लगने लगा कि अन्दर से माल अब निकला ही चाहता है। मेरे चूतड़ हिल हिल कर उसके मुठ मारने में सहायता करने लगे … और मेरे उफ़नते हुये लण्ड ने अपनी सीमा तोड़ते हुये अपना रस उसके हाथों में निकाल दिया। उसका हाथ मेरे वीर्य से भर गया। पर उसका हाथ चलता रहा और मेरे लण्ड से रस रह रह कर छलकता रहा। मेरा पूरा लण्ड वीर्य से भर गया … सोफिया का हाथ भी मेरे लसलसे वीर्य से भर गया था। उसने मेरे नाभि के आस पास वीर्य रस को फ़ैला दिया और अपना गीला हाथ मेरे गालो पर रख कर मुझे चूम लिया। उसने जल्दी से अपना पजामा उतारा और नेपकिन को उतार दिया। मैंने तुरन्त अपना मुख दूसरी ओर कर लिया। उसने मुझे देखा और मुस्करा उठी।
“जो … अपना लण्ड तो चड्डी में छिपा लो वर्ना नजर लग जायेगी … ।” दिव्या की हंसी सुनाई दी और नया नेपकिन सोफिया की ओर उछाल दिया।
“अरे रात के दो बज रहे है … तुम सोये नहीं … ?”
“आज की रात कौन सोता है … पर जो, आखिर आपने सोफिया को पटा ही लिया ना … ” दिव्या ने कटाक्ष किया।
“नहीं सोफिया ने मुझे पटा लिया … उसे देखो, उसकी मजबूरी … उसकी सादगी … उसका अन्दाज़” मैंने सोफिया की तारीफ़ की।
“नहीं, जो बहुत समझदार और प्यारा है … उसने मेरे साथ बहुत प्यार किया , मेरी रजामन्दी से !”
दिव्या और विक्की दोनों खुश हो गये। सारा मामला ठीक हो गया था। सोफिया ने मुझे प्यार से चूमा और मुझे अकेला छोड़ कर इठलाते हुये अपने कमरे में चली गई। दिव्या भी विक्की के साथ चली गई। मैं अब ये सोचता हुआ सो गया कि जब सोफिया की माहवारी समाप्त होगी तो मैं उसे किस किस तरह से चोदूंगा। ये सोचते सोचते कुछ समय में ही मैं निंद्रा के आगोश में खो गया। Antarvasna
हाय मैं राजेशमेरी उम्र २० वर्ष है आपके लिये मै एक ऐसे स्टोरी Antarvasna लेकर आया हूँ जिसे पढकर आपका मन चोदने और चुदवाने का करने लगेगा
मेरे घर में चार भाई है और मेरे पिताजी है माँ का देहांत तब ही हो गया था जब मेरी उम्र ९ साल की थी। मेरे दो भाई मुंबई में सॉफ्टवेर इन्जिनेअर है जबकि सबसे बड़ा
भाई हमारे साथ ही जालंधर में रहता है। मेरे भाई की शादी हुई तो मैं बड़ा खुश हुआ कि जो माँ का प्यार माँ से नहीं मिला वह भाभी से मिल जायेगा। शादी के बाद भाभी
हमारे साथ ही रहने लगी हम गाँव के सबसे बड़े परिवार से ह। पिताजी का धयान रखने के लिए नौकर तो था पर नौकर और घर के सदस्य में रात दिन का अंतर था। भाभी
भी मुझसे मजाक किया करती।
एक दिन की बात है मैं बाथरूम में नहाने जा रहा था तो मेने भाभी से मेरी अंडरवियर और बनियान मांगी। भाभी बोली कि देवर जी आप नहाना तो शुरू करो मैं ढूँढकर
लाती हूँ मेने कहा ठीक है जब मैं नहा लिया और मैं केवल एक पतला सा टॉवेल लपेटकर खडा था तभी भाभी आई और बोली कि लो अपने अंडरवियर लो यह कहकर वो
दरवाजे के बहार खड़ी होकर दूर से अपना हाथ दिखा रही मेने भाभी से अंडरवियर लेने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला भाभी ने दरवाजे में जोर से धक्का दिया और मेरे
बाथरूम में घुस आई और मेरी कमर पर गुदगुदी करने लगी्।
इस मजाक में वह हो ही गया जिसका मुझे डर था मेरा टॉवेल खुल गया और भाभी के हाथ में मेरा लिंग आ गया.
इसी बीच मैं शर्म के मारे बाथरूम से नंगा बाहर निकल कर भाग गया क्यूंकि उस समय घर पर मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं था.
इस बात पर मैं भाभी से इतना नाराज़ हुआ कि पूरा दिन बोला नहीं।
पर शाम को वह मुझसे बोली कि राजेशतुम मुझसे नाराज़ हो क्या?
तो मेने अपनी नाराजगी तोड़ते हुए न कहा दिया। अगले दिन जब मैं पढ़ाई कर रहा था तभी भाभी मुझसे बोली कि राजेशमैं
नहाने जा रही हूँ तुम कल की बात का बदला लेने की कोशिश मत करना,
तो मैं बोला- नहीं भाभी, मैं तो उस बात को कब का भूल चूका हूँ।
तभी नहाते हुए भाभी बोली कि राजेशमुझे एक साबुन लाकर दो मेरा साबुन खत्म हो गया है मैं बोला अभी तो मैं दुकान जाकर साबुन नहीं ला सकता। भाभी बोली कि
दुकान से लाने को थोड़े ही कह रही हूँ, मेरे ड्रोर में रखा वहीं से ला दो। जैसे मैं साबुन लेकर आया तो भाभी दरवाजे में से मुह निकालकर झांक रही थी तो जैसे ही मैंने जैसे
ही हाथ बढाया तो भाभी ने साबुन लेने के बहाने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया और मैं बाथरूम में गिरने लगा तो भाभी ने हाथ पकड़कर मुझे संभाला तभी मेरा हाथ उनकी
चूत पर पड़ गया। मैंने देखा कि भाभी बिलकुल नंगी खड़ी थी और उनके बूब्स बहुत बड़े थे और उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे और उनकी चूत पर बहुत बड़े बाल थे और उन
बालो के कारण चूत भी ठीक से नहीं दिख रही थी।
तभी मुझे अपन पेंट में कुछ रेंगने का अनुभव हुआ मैंने देखा जब तक तो भाभी मेरे पूरे कपडे (पेंट, अंडरवियर) दोनों उतार चुकी थी। मैं भाभी के सामने बिलकुल निवस्त्र खडा था और भाभी मेरे लंड को बड़े मजे से चूस रही थी तभी भाभी ने नीचे लेट कर पोसिशन ६९ में आ गयी और अब वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उनकी न चाह कर भी उनकी बालो वाली चूत चाट रहा था थोडी देर बाद वह उठी और मुझसे अपना 7″ लंबा लंड मेरी चूत में डालने को कहने लगी
मैंने जैसे ही अपना लंड भाभी की चूत पर रख कर जोर से धक्का दिया वह भाभी की चूत में न जाकर वहां से फिसलकर पीछे की और सरक गया फिर भाभी बोली जानू ऐसे नहीं और फिर वह साबुन उठाकर अपने हाथ पर लगाकर मेरे लंड पर रगड़ने लगी फिर उसके बाद उन्होंने उतना ही साबुन अपनी चूत पर लगा दिया और फिर बोलीं कि जान अब धक्का दो जैसे ही मैंने जोर से एक धक्का दिया वह चिल्ला पड़ी आआह्ह्ह् ईईइह्ह् ऊऊह्ह् फिर मैंने एक और झटका देकर पूरा लंड भाभी की चूत में समां दिया और अब उनका और मेरा शरीर आपस में रगड़ने लगे उस दिन भाभी ने मुझे जिन्दगी मैं पहली बार सेक्स करना सिखाया
लेकिन उस सेक्स के बाद मुझे उस गलती पर बड़ा पछतावा हुआ और मैंने भाभी के कितना भी उकसाने पर ये गलती न दोहराने का संकल्प लिया। एक दिन जब मैं बाज़ार सामान लेने गया तो मुझे रास्ते जाकर ध्यान आया कि मैं पैसे लाना तो भूल गया हूँ। जैसे ही मैं घर पैसे लेने वापस आया तो देखा कि भाभी एक नौकर के साथ चिपकी हुई थी मुझे देख कर वह दूर हट गयी और फिर नौकर मुझे देख कर चला गया तभी मैंने भाभी से पूंछा तो वह कहने लगी कि तुम्हारे भैया तो बस काम के कारण बाहर ही रहते है उन्हें तो मुझे संतुष्ट करने का तो उन्हें कोई ख्याल नहीं रहता और तुम भी मेरे साथ एक बार सेक्स करके ही रह गए अब तुम ही बताओ ऐसे में मैं क्या करूं
वह बोली तुम्हे तो मेरे साथ … ऐतराज़ है मै बोला ऐतराज नहीं है मैं इस काम को पाप समझता हूँ वह बोली कि तुम मुझे इस तरह खु्श करो कि तुमसे पाप भी न हो और मुझे मजा भी आ जाये। मैं बोला क्या सच में ऐसा हो सकता हैं वह बोली कि हाँ क्यूँ नहीं तो मैंने कह दिया ठीक है वो मुझे कमरे मैं ले गयी और मेरे होठ चूमने लगी तो मैंने मना किया तो वह बोली कि मैं तुमसे तुम्हारा लंड अपनी चूत में डालने को तो नहीं कह रही हूँ फ़िर उन्होंने मेरे पूरे कपडे उतार दिए फिर अपने कपडे भी उतार कर बैठ गयी और मेरा लंड जोर जोर से चूसने लगी तभी मेरी नज़र उनकी चूत पर गयी आज वह बड़ी सुंदर और चिकनी दिख रही थी अब मुझसे नहीं रहा गया और मैं अपना संकल्प भूलकर पोसिशन ६९ में आकर भाभी की चूत चाटने लगा।
फिर भाभी ने मुझे उठाकर मेरा मुंह अपने बूब्स पर रख दिया फिर मैंने दोनों स्तनों से नीचोड़ नीचोड़ कर स्तनपान किया और कुछ देर बाद भाभी की दोनों टांगें विपरीत दिशा में करके उनकी चूत पर लंड फेरने लगा भाभी के मुह से आआह्ह ऊऊउह्ह्ह् ईईह्ह्ह निकल पड़ा तभी मैंने भाभी की चूत पर एक जोर से झटका मारा तो भाभी और तेज़ और तेज़ कह कर मेरा साथ देने लगी मेरा जोश यह सुनकर दुगना हो गया फिर भाभी और मैं एक साथ स्खलित हो गए उस दिन मुझे पहली बार से भी ज्यादा आनंद आया अब भाभी और मैं जब भी हमें मौका मिलता है तब यह खेल खेलते है Antarvasna
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