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अन्तर्वासना के सभी साथियों को अभिवादन !Hindi Sex Stories

अन्तर्वासना पर ज्यादातर कहानियो में यह लिखा होता है कि शेष कहानी अगली बार बताऊंगा !Hindi Sex Storiesअरे यार ! क्या अगली बार तक कोई व्यक्ति उसी मूड में रह सकता है?

क्या तब तक आदमी अपना लंड पकड़ कर या औरत अपनी चूत में उंगली डाल कर बैठी रहेगी?

जो लिखना है वो उसी वक्त पढ़ने के काम आएगा और उसी वक्त मजा देगा !

आप लोगों का प्यार मुझको वास्तविक और साइंस आधारित कहानियाँ और लोगों के अनुभव लिखने को प्रेरित करता है। यह भी इसी तरह एक और जानकार के जीवन के कुछ अंश हैं।

मैं एक बात बता दूँ कि मैं स्वयं सेक्स में बहुत रूचि रखता हूँ, एवं घनिष्टता जिस किसी से भी बढ़ी, हम लोग सेक्स की बातों में बहुत रूचि लेते हैं और आपस में वार्तालाप भी करते हैं।

मैंने साइंस से पढ़ाई की और कई बायोलोजी की एवं सेक्स से सम्बंधित अन्य किताबों को मिलने पर उनको अच्छी तरह से पढ़ा। इससे कई तरह के फंडे क्लिअर हुए।

इसका फायदा ये होता है कि हम सेक्स के ज्ञान को तो बढाते ही हैं, नया अनुभव भी जानने को मिलता है और मनोरंजक सेक्स को और भी आनंदित बनाने में मदद भी मिलती है.

एक लड़का मोहित मेरे संस्थान में पढ़ने आया, यह उसकी कथा है !

मेरी जिस से भी पटरी बैठी वो सब बोलने में मेरी तरह तमीजदार और अपने रिश्तों में विश्वास रखने वाले रहे हैं, अर्थात माँ के पेट से बने रिश्तों की इज्जत करने वाले। गन्दी भाषा में बात करने वालो को मैं पास भी नहीं फटकने देता हूँ।

जब मोहित पढ़ाई कर रहा था तो इसके साथ इसके मामा का लड़का और लड़की तीनो होस्टल में रह कर पढ़ाई करते थे। तीनों को अलग अलग कमरे मिले हुए थे। इसके मामा की लड़की का नाम हम रीटा मान लेते हैं। ख़ुद मोहित लगभग पांच फुट नौ इंच कद का है। सुता हुआ शरीर और बोलने में तमीजदार।

रीटा की एक सहेली भी होस्टल में ही थी। मोहित का दिल उस लड़की स्वाति पर था। धीरे धीरे दोनों में घनिष्टता बढ़ने लगी। जैसा कि विपरीत सेक्स वालों में होता है, फ़िर आपस में थोडी बहुत सेक्स से रिलेटेड बातें भी होने लगी।

जब भी दोनों अकेले मिलते हाथ फेरने का सिलसिला भी चलने लगा। और क्योंकि होस्टल में रहते थे इसलिए मौका भी काफी था। स्वाति को भी मजा आता था। वो भी एक ऐसे घर से सम्बंधित थी जो परम्परा में बंधा था। इसलिए स्वाति भी एक हद से ज्यादा बढ़ने में डरती थी। इसलिए हाथ फेरने में बोबे तक तो सब कुछ चलता था लेकिन जैसे ही मोहित नाभि से नीचे हाथ डालने लगता स्वाति उठकर कमरे से बाहर भाग कर ख़ुद के कमरे में आ जाती।

मोहित ने उसको पूछा भी कि मजा आता है तो उसने बताया कि हाँ सनसनाहट होती है। लेकिन आगे नहीं बढ़ेंगे। मोहित ने भी स्वाति को जाहिर कर दिया कि जब तक तू अपने मुह से सेक्स के लिए नहीं बोलेगी तब तक मैं सेक्स नहीं करूँगा।

अब मोहित ने नाभि से नीचे जब भी बढ़ना होता स्वाति को भींच के बैठता ताकि वो उठ कर यूँ न भाग जाए और उसके बोबे दबाता धीरे धीरे टोपर ऊपर करके ब्रा खोलकर उसके बोबों को मसलता। तो स्वाति की आहें निकल जाती और आँखें गुलाबी डोरों में लिपट जाती। लेकिन एक सीमा के बाद वो छुडा कर भाग जाती।

मोहित भी इरादे का एकदम पक्का था। वो लगा रहा कि कभी तो बहार आएगी। कोई भी मौका नहीं छोड़ता। मिलते ही मसलना, चूमना , जीभ चूसना बदस्तूर चलता।

क्रम से मोहित आगे बढ़ता रहा। स्वाति को भींच कर बैठता उसके बोबे नंगे करता, चूसता। आहों से कमरे में संगीत गूंजने लगता। होटों में होंट लेके चूसता, स्वाति भी साथ देती। लेकिन जब भी चूत की ओर बढ़ने की बारी आती स्वाति के मन में भारतीय परम्परा सर उठाती और जो उसने अपने पति के लिए इतने वर्ष सम्हाल कर रखा उसको यू किसी को सौंप देना उसको गवारा ना होता। जाने कैसे उसने अपने आपको कंट्रोल किया हुआ था।

अब मोहित उसको ज्यादा ध्यान से पकड़ कर रखता ताकि भागने का मौका कम से कम मिले। अब मोहित सलवार के ऊपर चूत पर हाथ फेरने लगा। उसकी चूत की दरार में भी मसलने लगा। स्वाति की हालत पहले से ज्यादा ख़राब होने लगी।

लेकिन मानना होगा स्वाति को। सच में ऐसी होती हैं भारतीय लड़कियां। उस ने चार महीने इसी तरह से कंट्रोल किया। जाने ख़ुद के कमरे में जाने के बाद वो कैसे अपनी चूत की खुजली को काबू करती होगी। लेकिन उस ने अपने मुंह से नहीं बोलना था तो नहीं बोली सेक्स के लिए.

मोहित भी पक्का डीठ। वो कसम खाए बैठा था। उसके मामे का लड़का उकसाता था कि गधे देख मैंने भी तेरे साथ ही मेरी दोस्त से सेटिंग की थी। मैं उसको चोद चुका और तू है कि तपस्या कर रहा है। लेकिन फ़िर भी मोहित ने बड़ी तसल्ली से अपनी जिद पकड़े रखी।

आख़िर एक शनिवार को स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई तो जो भी स्टुडेंट आसपास के गाँव से थे घर जाने वाले थे वो सब चले गए। लेकिन ये चारों और कुछ स्टुडेंट और भी थे जो नहीं गए। लेकिन होस्टल थोड़ा सूना हो गया।

रात को लगभग १० बजे जब रीटा और मामा का लड़का सो गए तो मोहित स्वाति के कमरे के दरवाजे पर थाप दे कर दरवाजा खुलने पर स्वाति के कमरे में आ कर दरवाजा बंद कर के स्वाति को लिए हुए उसके बिस्तर पर आ गया।

स्वाति को बाँहों में लिए उसके होटों को चूसना शुरू कर दिया। स्वाति ने भी साथ दिया। वो भी चूसने लगी। और अपनी जीभ निकाल कर मोहित के मुह में डाल दी। मोहित ने एक हाथ स्वाति के बोबों पर ले कर बोबे दबाने लगा और दूसरा हाथ स्वाति की गर्दन पर कस दिया।

धीरे धीरे दोनों की आँखे मदमस्त होने लगी। सेक्स का सुरूर स्वाति पर चढ़ने लगा। उसकी साँसे भारी होने लगी।

वो भी मोहित की जीभ चूसने लगी। मोहित ने स्वाति की कमीज के बटन खोल दिए फ़िर बोबे दबाने लगा। थोडी देर में हाथ स्वाति की पीठ के पीछे ले कर उसकी ब्रा के हुक को भी खोल दिया। और मुह नीचे लाकर स्वाति के बोबे चूसने लगा। स्वाति की आहें निकलने लगी। कमरे में इस नए संगीत के साथ सेक्स की गर्मी चढ़ने लगी। अब मोहित ने स्वाति के सलवार का नाडा खोलकर सलवार नीचे सरका दी और पैंटी के ऊपर से चूत पर हाथ फेरने लगा।

एक तो बोबे चूस रहा था फ़िर चूत भी सहला रहा था। स्वाति लम्बी लम्बी गरम साँसे लेने लगी और वो आँखें बंद किए लेटी थी।

आज स्वाति के पास कमरे से भाग जाने का कोई रास्ता नहीं था। वो ख़ुद के ही कमरे में थी। और मोहित के पास भरपूर टाइम था।

मोहित ने स्वाति की पैंटी और सलवार को उतार कर टांगो से बाहर किया। अब स्वाति नीचे से पूरी नंगी थी। फ़िर मोहित ने स्वाति की चूत की दरार में ऊँगली कर के धीरे धीरे सहलाने लगा। आज स्वाति हीटर की तरह तप गई।

अब उस से कंट्रोल नहीं हो रहा था। और वो इंतजार कर रही थी। कि काश उसको सेक्स के लिए नहीं बोलना पड़े और मोहित ख़ुद ही उस को चोद दे।

लेकिन मोहित फोरप्ले में लगा हुआ था। उसका लंड कड़क ठोस हो चुका था। मोहित ने अब अपनी पैंट और अंडरविअर उतार दिए और लंड को स्वाति को पकड़ा दिया और ख़ुद स्वाति कि नाभि की और झुक कर नाभि में जीभ डाल कर चूसने लगा। स्वाति की साँसे चढ़ गई। वो हिचकियाँ लेने लगी और मोहित को पकड़ कर अपने ऊपर लेने लगी। मोहित पक्का डीठ हो गया। वो फ़िर स्वाति के बोबे चूसने लगा।

स्वाति की चूत पानी छोड़ने लगी। बिस्तर गीला होने लग गया। आख़िर जब ऐसी हालत हो गई तब मोहित ने स्वाति को कहा कि देख अब सेक्स के लिए बोल दे नहीं तो आज मैं चला जाऊंगा।

आख़िर स्वाति ने मोहित को बोला कि प्लीज मेरे साथ सेक्स करो।

अब मोहित स्वाति की टांगे चौड़ी कर के बीच में घुटनों के बल बैठ गया और स्वाति की चूत पर हाथ लगा कर गीला छेद ढूंढ कर अपने लंड को उस छेद पर टिकाया और स्वाति की टांगो को घुटनों से मोड़ कर अपने घुटने स्वाति के घुटनों के नीचे देता गया इस कारण से मोहित का लंड स्वाति की चूत पर बहुत अच्छी तरह से सेट हो गया अब मोहित ने लंड पर जोर लगाया चूत में घुसा देने को।

लेकिन नहीं जा पाया और स्वाति का मुंह दर्द से लाल होने लगा। फ़िर एक बार मोहित ने जोर लगाया लेकिन फ़िर नहीं गया। तो एक जोर से धक्का लगा कर लंड को जबरदस्ती से थोड़ा घुसा दिया। अब स्वाति को खूब तेज ब्लेड से कटने जैसा एहसास हुआ और उसका मुंह लाल हो गया और उस पर पीड़ा की लकीरें आ गई, बहुत मुश्किल से उसने चीख निकलने से बचाया। स्वाति ने होंट दांतों के बीच दबा लिए। इधर मोहित का भी दर्द के मारे हाल अच्छा नहीं रहा। लेकिन अब चुदाई तो पूरी करनी थी ना। इसलिए और धक्के मार कर पूरा लंड स्वाति की चूत में उतार दिया और स्वाति के ऊपर लेटता गया।

स्वाति को धीरे धीरे किस किया अपने हाथ बोबों पर लेकर सहलाने लगा। और धीरे धीरे स्वाति के होंट चूसने लगा। पहले तो स्वाति ने कोई सहयोग नही दिया फ़िर जैसे जैसे उसका दर्द कम हुआ वो फ़िर गर्म होने लगी। लगभग १० मिनट बाद स्वाति क्रियाशील होने लगी। लेकिन अब भी सामान्य नहीं थी।

फ़िर धीरे धीरे धक्के लगा कर मोहित ने चोदना शुरू किया। उसने अपनी जीभ स्वाति के मुंह में दे दी और धीरे धीरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता गया जैसे जैसे ओर्गास्म नजदीक आता गया धक्के तेज लगने लगे। स्वाति को मजा और दर्द दोनों हो रहे थे और वो इन्तजार कर रही थी कि चुदाई कब पूरी हो। स्वाति को ओर्गास्म हुआ लेकिन मजा नहीं आया और दर्द को सहते हुए मोहित ने भी स्वाति की चूत की तराई कर दी।

थोडी देर में जब लंड ढीला होकर बाहर आया तो मोहित ने अपना लंड देखा तो सुपाड़े के पीछे का धागा कट चुका था, सुपाड़े के ऊपर की खाल भी पीछे होकर कर लंड पर आ गई थी और लंड ३-४ जगह से छिल गया था।

उधर स्वाति की चूत भी खून से लिप गई थी। दोनों ने नेपकिन से लंड और चूत साफ़ किए और कपड़े पहन लिए।

अगले दिन मोहित ने स्वाति को दर्द के लिए दवाई की दूकान से गोली लाकर दी।

बस गनीमत यह हुई कि इस चुदाई से स्वाति को गर्भ नहीं टिका। दोनों ही नादानी में बिना किसी साधन के काम कर गए।

एक बात और भी थी। कि स्वाति भी क्षत्रीय ही थी। एक दिन दोनों को आपस में एक दूसरे की आँखों में देखते रीटा ने देख लिया। लेकिन चुप रही और अकेले में स्वाति से पूछा तो स्वाति ने बता दिया कि वो मोहित को पसंद करती है। फ़िर रीटा ने मोहित से पूछा तो मोहित ने भी बता दिया कि स्वाति उसको पसंद है।

रीटा ने अपने फूफा यानि मोहित के पिता से और स्वाति की माताजी से बात की और स्वाति के पिताजी को मोहित के घर रिश्ता लेकर भेजा। दोनों की सगाई हो गई।

फ़िर एक दिन मौका पाकर रात को मोहित ढाणी में अपनी ससुराल मोटरसाईकिल पर १०:३० पर पहुँच गया। स्वाति को उसने मोबाइल पर बता दिया। मोटरसाइकिल उसने दूर खड़ी की। रात को ढाणी में लोग जल्दी सो जाते हैं और स्वाति ने धीरे से दरवाजा खोल कर मोहित को अन्दर लिया। दोनों रसोई में घुस गए। स्वाति ने बाकी पिता और भाई दोनों के कमरों के बाहर से धीरे से सांकल लगा दी।

फ़िर दोनों ने रसोई में जश्न किया। दो घंटे वो मजे करते रहे। दोनों ने ही खुल कर सेक्स का मजा लिया। इस बार भी स्वाति थोड़ा चिंतित थी लेकिन अब के दर्द नहीं हुआ तो खुल कर खेली। इस बार मोहित ने कंडोम काम लिया। फ़िर मोहित अपने गाँव चला आया।

मोहित बता रहा था कि सर चूमना, चूसना, दबाना, हाथ फिराना, जो जो मैं कर सकता था किया, और स्वाति ने खूब साथ दिया और मजे भी लिए ………

जब मैंने मोहित को कहा कि पगले पहली बार में इतना दर्द करने की क्या जरूरत थी। ऊँगली डाल कर ओ आकर में घुमा कर थोड़ा तो चूत का छेद चौड़ा कर सकता था न। ना तो स्वाति को दर्द होता न तुझको इतनी दिक्कत उठानी पड़ती। और थोड़ा तेल ही लगा लेता। तो मोहित बोला कि सर किसी ने बताया ही नहीं कि दर्द कम भी हो सकता है। ये तो अब आपने बताया। मेरे मामा के लड़के ने भी नहीं सिखाया।

सच में दूसरी बार में मजा आया। पहली बार में तो दर्द से मजा ही नहीं आया। पहली बार में तो चोदने की रस्म पूरी की बस………..

अब २ महीने बाद उनकी शादी है।

मोहित ने कहा कि सर मुझको क्या पता था जिस लड़की के साथ मैं मजे के लिए चुदाई कर रहा हूँ उसी के साथ शादी हो जायेगी।

तो मैंने कहा कि ये तो बहुत अच्छा है। कम से कम तुझको तो पता है न कि वो कुंवारी लड़की है। वरना खेली खाई मिलती तो भी तो सब्र करना पड़ता। फ़िर जिसको तूने चोदा वो भी तो किसी की पत्नी बनती ही न। फ़िर यार आदमी ही लड़की को चालू करता है तो लड़की को दोष देना बेकार है। फ़िर सेक्स पर किसी का जोर थोड़े ही है। सबको अच्छा लगता है। मजे कर, खुश रह।

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Antarvasna

मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार Antarvasna से हूँ, दो वर्ष शादी को हो चुके हैं, इस समय मेरी आयु सत्ताइस वर्ष है, मेरे पति की आयु उनतीस वर्ष है, वह एक बड़ी कंपनी में अच्छे पद पर हैं और अपने काम के सिलसिले में महीने में पंद्रह या बीस दिन शहर से बाहर रहते हैं.

मेरे पति एक सुन्दर और स्मार्ट व्यक्ति हैं, उनका व्यवहार भी अच्छा है. वे जब भी टूअर से लौटते हैं तो ढेर सारी अन्य चीजों के साथ विभिन्न तरह के सौंदर्य प्रसाधन आदि ले आते हैं, दरअसल वे एक कामुक व्यक्ति हैं, यौन में भी उन्हें हर बार कुछ नया ही चाहिये, वे एक ही जैसी क्रियाओं से बोर हो जाते हैं, उनके नये नये स्टाईलॉ और भांति भांति के आसनों से मुझे भी काफी आनन्द आता है और मैं उनके ऐसे क्रिया कलापों में ऐतराज नहीं करती हूँ.

मेरे पति ऑफिस गए हुए थे, कल ही वे टूअर से आये थे. आज मेरा छोटा भाई जिसकी आयु उन्नीस वर्ष है वह आ गया था. शाम का समय था, मैं और मेरा छोटा भाई बैडरूम में बैड पर बैठ कर टी.वी. देख रहे थे. टी.वी. पर एक हिंदी फिल्म आ रही थी, मैंने साडी-ब्लाउज पहना हुआ था और मेरा छोटा भाई पेंट-शर्ट में था. वह बिस्तर के एक कोने पर बैठा था जबकि मैं बैड की पुश्त से पीठ लगाये दोनों हाथों को सीने पर बांधे बैठी थी.
सात बजने जा रहे थे, तभी कॉल-बेल बजी!

मेरे उठने से पहले ही मेरा छोटा भाई उठा और दरवाजा खोल आया और बैड पर आकर बैठ गया, वहीं जहाँ पहले बैठा था.
कौन आया है- मैंने पूछा.
जीजाजी आये हैं… उसने सामान्य स्वर में उत्तर दिया.
मेरे पति बाहर के दरवाजे को लॉक कर के बैडरूम में आकर मेरे निकट बैड पर बैठ गए.

देर नहीं हो गई आज आपको आने में…? मैंने अपनी आँखों में कृत्रिम क्रोध लाकर कहा.
देर वाले काम ही में तो मजा आता है जानेमन…! मेरे पति ने मेरे गालों पर किस करते हुए कहा.

उनका एक हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर पहुँच गया था, ब्लाउज के ऊपर ही से उन्होंने मेरे स्तन पर चिकोटी काटी तो मेरे होंटों से हल्की सी कराह फ़ूट पड़ी.
मेरी कराह पर टी.वी. देखते मेरे भाई की दृष्टि मेरी ओर हुई और फिर टी.वी. की ओर हो गई.
मैंने अपने ब्लाउज से अपने पति का हाथ हटाया और आँखें तरेर कर बोली- आपको सब्र होना चाहिये! मेरा भाई भी बैठा है और आप उसकी उपस्थिति में भी ऐसी हरकतें कर रहें हैं? मेरा स्वर इतना धीमा था कि जो सिर्फ मुझे और मेरे पति को ही सुनाई दे सकता था.
ओ के… तुम जाओ और मेरे लिए एक बढ़िया सी चाय बनाओ! मैं हाथ मुँह धो कर आता हूँ. मेरे पति ने इतना कहा और फिर धोखे से मेरे होंठों को चूम कर मेरे निकट से उठ गये.

मैं बड़बड़ाती हुई उठी, मेरे भाई ने कनखियों से उनकी यह हरकत देख ली थी, इसी कारण उसके पतले पतले होंठों पर मुस्कान आ गई थी, थोड़ी देर बाद मैं चाय बना कर ले आई तो पति को बैड पर अपने स्थान पर बैठे पाया, मैंने चाय का कप उनको पकड़ा दिया और उनके निकट बैठ गई.

टी.वी. पर एक कैबरे गीत आ रहा था, जिसमें नायिका ने काफी कम कपड़े पहन रखे थे और वह उत्तेजक अंदाज में नाच रही थी.
हाय… क्या फिगर है…! कैसे पतली कमर को झटका देकर देखने वालों को हार्ट-अटैक दे रही है ये…! क्यों जानेमन…! क्या ऐसा डांस कर सकती हो तुम…? मेरे पति चाय पीते हुए बोले.
तुम चुप रहोगे या नहीं…!!! मैं धीमे स्वर में बोली.
“अमां… साले साब…! देख रहे हो तुम्हारी बहन हमें कुछ बोलने ही नहीं दे रही…! अब अगर हमने इस कैबरे डांस की तारीफ़ कर दी तो इसमें क्या गलत बात हो गई?” मेरे पति ने मेरे भाई से कहा.
मेरा भाई मुस्करा कर रह गया.

फिर चाय ख़त्म करने तक मेरे पति कुछ नहीं बोले किन्तु उनका हाथ मेरे ब्लाउज पर आ गया और वो मेरे स्तनों को मसलने लगे. मैं अपने भाई की उपस्थिति का ख्याल करके उनके हाथ अपने हाथों से हटाने का प्रयास करने लगी लेकिन फिर भी उन्होंने मेरे ब्लाउज के दो तीन बटन खोल कर मेरे ब्लाउज के भीतर हाथ डाल दिया और ब्रा के नीचे से मेरे निप्पल को इतनी सख्ती से मसला कि मैं तीव्र स्वर में कराह उठी.

मेरी कराह ने मेरे भाई का ध्यान हम दोनों की ओर खींचा, वह क्षण भर को हम दोनों को देखता रहा, उसकी जिज्ञासु दृष्टि मेरे ब्लाउज पर जम गई फिर वह अपनी आँखें नीची किये बैडरूम से बाहर जाने के लिये मुड़ने लगा तो मेरे पति ने उसका हाथ पकड़ कर उसे बेड पर अपने नजदीक बैठा लिया और अपना हाथ बिना मेरे ब्लाउज में से निकाले बोले- अरे यार… यह पति पत्नी की सामान्य नोंक झोंक है, तुम कहाँ चले! अच्छा मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ! जवाब सही सही देना!

मेरा भाई असमंजस के भाव से कभी उनकी आँखों में देखने लगता तो कभी मेरी आँखों में, वह कुछ बोल नहीं पाया.
“यह बताओ… क्या तुमने किसी जवान औरत के स्तन देखे हैं आज से पहले?” यह कहते हुए उनके हाथ ने मेरे ब्लाउज को थोड़ा और खोल कर मेरा स्तन ब्रा के कप में से बाहर ही निकाल दिया, मेरा भाई भी स्तब्ध था और मैं भी. हम दोनों ही इस स्थिति से सर्वथा अपरिचित थे.
“मुझे मालूम है… तुमने न तो अबसे पहले औरत का स्तन देखा है और न ही छुआ है… अपना हाथ इधर लाओ…!” मेरे पति उन्मुक्त भाव से उसके हाथ को पकड़ कर मेरे स्तन पर रख कर बोले- लो… देख लो.. कैसा होता है स्तन…! देखा कैसा होता है स्तन…? शर्माओ मत!

मेरे पति ने मेरे भाई का मुख मेरे बायें स्तन के बिल्कुल नजदीक कर दिया और गहरे गुलाबी रंग का निप्पल उसके होंठों के पास करके बोले- होंठ खोलो और इसे चूसो…!
लेकिन मेरे भाई ने होंठ नहीं खोले, वह तो फटी फटी आँखों से यह सब देख रहा था. तब मेरे पति ने मेरे दायें स्तन को भी मेरे ब्लाउज और ब्रा में से निकाल दिया और उसके निप्पल को चूसने लगे, मैं उत्तेजना में बहने लगी.
क्या तुम अपने भाई के होंठ नहीं चूम सकती…? मेरे पति ने मुझसे कहा तो मेरे मन में विचित्र प्रकार का प्यार उमड़ आया, यह सब मेरे लिये अनोखा था.

मैंने अपने भाई के गुलाबी होंठों को चूम लिया और उसके होंठों में अपने बायें स्तन का निप्पल भी दे दिया, अब उसने निप्पल ले लिया, मैंने कहा… चूसो इसे!
वह चूसने लगा वो भी इस तरह जैसे कोई शिशु स्तन में दूध खोजता है.

मैं अदभुत आनन्द से भरने लगी, मेरे हाथ उसके सर को सहलाने लगे थे, मेरे दोनों स्तनों को चूसा जा रहा था, मैं उत्तेजित होती जा रही थी, मेरे हाथ मेरे भाई की पीठ पर होकर उसकी पैन्ट पर पहुँच गये, मैंने उसकी पैन्ट की जिप खोल दी और उसमें हाथ डाल कर उसके अंडरवीयर के नीचे छिपे उसके अंगड़ाई भरते लिंग को अंडरवीयर के ऊपर से ही सहलाने लगी. मेरे पति ने मेरी साड़ी को पेटीकोट सहित मेरे घुटनों से ऊपर कर दिया था और मेरे दायें स्तन को चूसते चूसते मेरी चिकनी जाँघों को भी सहलाने लगे थे.

उनकी कोशिश देख कर मुझे करवट लेनी पड़ी और मैंने अपनी पीठ उनकी ओर कर ली, उन्होंने मेरा स्तन छोड़ दिया था, वे अब मेरी साड़ी और पेटीकोट को नितंबों तक पलट कर मेरे नितंबों को सहलाने लगे थे, मेरे नितंबों पर कसी पेंटी अभी उन्होंने उतारी नहीं थी, अभी तो वे जांघें सहला सहला कर ही मुझे उत्तेजित करते जा रहे थे.

मेरे आगे लेटा मेरा छोटा भाई मेरे स्तनों को ही चूसने में व्यस्त था, उसकी इस क्रिया ने भी मुझे तपा डाला था.
मैंने उसके अंडरवीयर में से उसका सात आठ इंच लंबा लिंग बाहर निकाल लिया था और उसे सहलाने लगी थी, मेरे भाई का लिंग अभी तक नया ही था, उसकी त्वचा लिंग-मुंड पर चढ़ी हुई थी, जिसे मैं धीरे-धीरे नीचे को उतार रही थी, मेरा एक हाथ उसकी पैंट को नीचे सरका चुका था.

अचानक मेरे पति ने मुझसे कहा- आज एक नये किस्म का मजा लेते हैं, तुम्हारे भाई का नया नया लिंग तुम्हारी योनि में नहीं बल्कि तुम्हारी गुदा (गांड) में डलवाते हैं… .तुम्हें तो मजा आयेगा ही… तुम्हारे भाई को भी आनन्द आयेगा… .तुम जानवर की भांति हाथ पांव बेड पर टिका कर अपने नितंब ऊँचे उठा लो!
मैंने ऐसा ही किया, मेरे नितंब ऊँचे उठ गये तो मेरे पति ने मेरे भाई को मेरे पीछे खड़ा करके उसके लिंग मुंड पर अपना ढेर सा थूक लगा कर उसे मेरे नितंबों के बीच जहाँ मेरी गुदा (गांड) थी, वहाँ टिकाया और मेरे भाई से कहा- धक्का मारो साले साब… लेकिन धीरे धीरे!

मेरे भाई ने मेरी कमर को पकड़ कर धक्का मारा तो लिंग ऊपर को फिसल गया,
“ओ… ओफ्फो.. यार… .रुको…! दोबारा कोशिश करते हैं!” मेरे पति ने मेरे भाई से कहा.

मैंने मुद्रा बदल कर करवट ले ली और अपने पति से बोली- ये पहली बार तो मैथुन (चुदाई) क्रिया कर रहा है और तुम ये उम्मीद कर रहे हो की एक ही बार में लिंग प्रवेश कर लेगा, वो भी बिना किसी चिकनाई के, जाओ जरा रसोई में से सरसों का तेल ले आओ, मैं तब तक इसके लिंग को और उत्तेजित करती हूँ!
तुम ठीक कहती हो… मेरे पति ने इतना कहा और चले गये.

मैंने अपने भाई को उसका हाथ पकड़ कर अपने सिरहाने बैठा लिया और उसकी टांगें फैला कर उसकी मजबूत जांघ पर अपना सर टिका कर उसके तने हुए लिंग की उपरी त्वचा लिंग मुंड से हटा कर उसे अपने मुंह में ले लिया, मैं उसे चूसने लगी.
वह मचल उठा, उसके कंठ से कामुक ध्वनि फूटने लगी- उफ..ओह… मेरे शरीर में चीटियाँ सी दौड़ रही हैं… उफ… वह टूटते शब्दों में कह उठा.

मैंने उसके हाथों को अपने स्तनों पर टिका दिया और बोली- इनसे खेलते रहो… और फिर उसके लिंग को अपनी जीभ से चाटने लगी.
मेरे पति एक कटोरी में सरसों का तेल ले आये और मेरी एक टांग को ऊँचा करके मेरी गुदा (गांड) में तेल लगाने लगे.
अब अपने जीजाजी के पास चले जाओ… मैंने अपने मुंह से अपने भाई का लिंग निकाल कर उससे कहा.
वह यंत्र की भांति चुपचाप मेरे पति के निकट जाकर बैठ गया.

मेरे पति ने मेरे नितंबों के नीचे एक तकिया लगा दिया, अब नितंब ऊँचे भी हो गए और उनके मध्य की खाई अधिक खुल गई.
तुम लेट जाओ.. मैं तुम्हारे लिंग को ठीक निशानें पर फंसा दूंगा, तुम जोर का धक्का मारना, और हाँ… पहली बार में थोड़ा दर्द होता है तुम घबरा मत जाना… उसके बाद खूब मजा आता है! मेरे पति ने मेरे भाई को समझाया.

मेरा भाई मेरे पीछे लेट गया, उसने मेरी बगलों में हाथ डाल कर मेरे पुष्ट स्तनों को पकड़ लिया, मेरे पति ने उसके लिंग पर तेल लगाया और मेरी टांग को ऊँचा करके उसके लिंग को मेरी गुदा पर रख दिया, मैंने भी अपने एक हाथ से लिंग मुंड को गुदा के तंग द्वार में फंसाने में उन दोनों की मदद की और बोली… मारो जोर का शाट! मैं तैयार हूँ…!
इतना कहते ही मैंने दांत भींच लिए क्योंकि गुदा में मुझे भी थोड़ी पीड़ा होनी थी, उतनी नहीं होनी थी जितनी पहली दफा में होती है, मेरे पति तो मेरी गुदा में अक्सर ही लिंग प्रवेश किया करते थे इसलिए मुझे आदत पड़ चुकी थी, उसी दम मुझे पीड़ा हुई और मेरे कंठ से कराह निकल गई.

मेरे भाई ने जोर का धक्का मारा था, उसका लिंग मुंड मेरी गुदा को फैलाता हुआ उसमें घुस गया था, मेरा भाई भी कराह उठा, वह जरा ज्यादा तड़प रहा था, उसके लिंग मुंड की सील टूट गई थी और हल्का हल्का सा रक्त स्राव भी हुआ था, किन्तु मेरे पति द्वारा उसका साहस बढ़ाये जाने पर उसने तड़पते तड़पते भी एक बार जरा पीछे हट कर एक और धक्का मारा, लिंग का आधा हिस्सा मेरी गुदा में समा गया.
“ओफ… मुझे बहुत दर्द हो रहा है… .मैं और आगे नहीं कर सकता, उफ… लगता है मेरा लिंग पिस जायेगा, दीदी के कूल्हे तो चक्की के पाट जैसे हैं.” यह कहते हुए मेरे भाई ने अपना लिंग मेरी गुदा से निकाल लिया तो मैं अपने पति से बोली- गुदा में तुम डाल दो और जल्दी करो, मेरे भीतर की आग अब भड़क उठी है, इसको मैं योनि का आनन्द देती हूँ! आ जाओ तुम इधर मेरे आगे!

मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ कर कहा और उसे अपने आगे लिटा लिया, मैंने उसका लिंग अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाते हुए अपनी योनि में फंसा कर कहा- अब धक्का मारो, इसमें दर्द नहीं होगा!
मैंने ऐसा कहा तो उसने डरते डरते हल्का सा धक्का मारा, लिंग मुंड आसानी से योनि में प्रविष्ट हो गया, वह आस्वस्त हो गया तो और धक्के मारने लगा, मैं आनन्दित होने लगी और उसके नितंबों को तो कभी उसके सिर को सहलाने लगी, वह मेरे होंठों को चूमने लगा तो मैंने उसके मुंह में अपने स्तन का निप्पल डाल कर कहा- इसे चूसो…!

वह निप्पल चूसते हुए योनि में लिंग का घर्षण करने लगा, उसके मुंह से भी कामुक ध्वनियाँ फूटने लगी थी तो मेरी भी गर्म साँसें तीव्र होती जा रही थी.
तभी मेरे पति ने अपना लिंग निकाल कर मेरी गुदा में प्रवेश करा दिया, वे आहिस्ता आहिस्ता उसे आगे बढाने लगे.

मैं तो काम-सुख का वह चरम पा रही थी कि जिसकी मिसाल नहीं दी जा सकती, मेरा युवा शरीर दो लिंगों के घर्षण से ऐसा आंदोलित हो उठा कि क्या कहूँ, ऐसा काम सुख मुझे पहले कभी नहीं मिला था, गुदा और योनि में आग सी लगती जा रही थी, मैं चरमोत्कर्ष पर पहुंची तो मेरा भाई भी स्खलित हो गया, मैंने उसका लिंग अपने मुंह में ले लिया और उसे अजीब किस्म का दुलार देने लगी.

वह भावावेश में मेरे शरीर से लिपट गया, मेरे पति ने मेरी गुदा में स्खलित होकर मुझे बांहों में भर लिया था.
इस तरह उस रात हम तीनों ने खूब शारीरिक सुख भोगा.

आपको मेरी मस्त कहानी में पढ़ने में मजा आ रहा है ना?
कहानी जारी रहेगी. Antarvasna

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मेरा नाम अजय है, मैं बहुत दिनों से Hindi Porn Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ता हूँ। आज मैं आप लोगों के लिए सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी उमर बीस साल थी और नेहा दीदी बाईस साल की थी। नेहा दीदी मेरे फ़ूफ़ा की लड़की है। फ़ूफ़ा बिज़नेस के सिलसिले में बाहर गए थे, घर में दीदी, फ़ूफ़ी और मैं ही थे।

गर्मी का महीना था, कोलकाता में गर्मी बहुत ज्यादा थी। रात को खाना खाकर हम लोग एक ही पलंग पर सो गए, दीदी बीच में फ़ूफ़ी फिर मै। मैं आप लोगो को बता दूँ कि नेहा दीदी को कभी मैंने ग़लत नजरो से नहीं देखा।

मैं गहरी नींद में सो रहा था और सपना देख रहा था करीना कपूर की चूची दबाने का, कि अचानक मेरे मुँह पर कुछ जोर से गिरा और नींद खुल गई, लाईट बंद थी और अँधेरा था मुझे लगा कि नेहा दीदी के दोनों पैर मेरे मुँह पर है। शायद फ़ूफ़ी को कोई परेशानी थी या गर्मी लग रही थी इसलिए वो नीचे चादर डाल कर सो गई थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के पैर हटाने चाहे तो पाया कि दीदी की टांगों पर कपड़ा नहीं था दरअसल रात को वो गर्मी के कारण पतली नाइटी पहन कर सोई थी, मैंने धीरे से उसके दोनों पैर अपने ऊपर से हटा कर बिस्तर पर कर दिए, करीना कपूर चूची दबाने का सपना ओर दीदी की नंगी टांगों के छूने से मेरा लंड में कसाव आने लगा और मेरी नीयत दीदी को छूने की होने लगी।

मैंने थोड़ी हिम्मत करके नेहा दीदी की टांगों पर हाथ रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर हाथों को सरकाने लगा। कमर तक पहुँचा तो पाया नाइटी नहीं है पर पैंटी पहनी हुई है। मैंने हिम्मत करके उसके पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबाने लगा। हाय क्या नरम मुलायम चीज़ थी और मुझे आनंद का अनुभव हो रहा था। मेरा लंड तो तन कर 8″ का हो गया।

मैं धीरे धीरे हाथ को ऊपर नाभि से लेकर छाती तक गया तो पाया कि नाइटी चूचियों के ऊपर ही है जिससे चूचियाँ ढकी है। मैंने धीरे से उंगलियों से नाइटी को हटाना शुरू किया और दीदी की चूचियाँ बाहर आ गई। मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू किया तो चूचियों के चुचूक कड़े होने लगे। मुझे लगा कि शायद दीदी की जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा है।

मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मन कर रहा था कि मैं दीदी की चूचियाँ पकड़ कर मसल दूं! लेकिन मैंने बड़े प्यार से दीदी के स्तन सहलाये… ओर नोकों को हौले हौले से पकड़ कर मसलते हुये घुमाया, अब मेरे इरादे बदलने लगे थे। मैंने अपनी टांगों से बार बार उसके चूतड़ों को छूना शुरू कर दिया। उसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिल रहे थे। फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में ले लिया और धीरे से चूसने लगा।

अचानक मुझे लगा कि दीदी की नींद खुल चुकी है और चुपके से सोने का बहाना कर रही हैं। मेरी हिम्मत बढ़ने लगी। मैं भी अंजान बन कर निप्पल को धीरे से चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैं अपना हाथ उसकी पैंटी पे ले आया। उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी और दीदी ने हलके से अपने पैरों को थोड़ा फैला दिया। मैंने दीदी की पैन्टी धीरे से नीचे खींच दी और पैन्टी को धीरे धीरे पैरों से अलग कर दिया और उसकी चूत पर हाथ रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा।

दीदी ने हलके से आपने पैरों को थोड़ा ओर फैला दिया। मैं उठ कर बैठा, उसने धीरे से खुद अपनी टांगें ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। उसकी चूत देख कर मैं खुश हो गया । गुलाबी रस भरी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी। उसकी चूत एक दम गुलाबी थी और चूत पर एक भी बाल नहीं था, उसकी चूत एक दम लाल सुर्ख हो गई थी ऐसी इच्छा हो रही थी कि उसकी चूत खा जाऊं।

मेरे मुंह में पानी आ गया। मैं उसकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये वो तिलमिला उठी मैने अपनी जीभ उसकी चूत के होठों पर रख दी। वो हल्के से सिसक पड़ी। होले होले मैं उसकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा।

उसकी सिसकियां बढ़ने लगी, वो अब बहाना छोड़ कर दोनों हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपने लगी और उसने अपने चूत का पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।
मैंने देखा कि वो हांफ रही है और मेरी तरफ़ देख रही है, मैं उसके कान के पास जाकर फुसफुसा के कहा- कैसा लगा तो दीदी?

तो उसने कहा- हटो यहाँ से! तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है? तुम्हें पता है कि तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारी दीदी हूँ और यह सब पाप है!
मुझसे रहा नहीं गया मैंने फिर कहा- इतनी देर मेरे साथ मज़ा लेकर अब कह रही हो कि यह सब पाप है! मुझे तुमसे प्यार करना है तुम चाहो या न चाहो!
बोल कर मैंने उसकी बांई चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा और अपनी लुंगी खोल कर दीदी के ऊपर लेट गया, अपना लंड उसके जांघों के बीच रख लिया।

मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ को नेहा के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को अपनी जांघों से बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।

दीदी ने धीरे से कहा -‘भाई धीरे धीरे से जो करना है करो! तुम तो मान ही नहीं रहे हो! मुझे तो डर है कि कही माँ जाग न जाए!

फिर उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे होंटों को वो बुरी तरह से चूमने लगी। मैं भी जोश में आ गया, उसको किस करने लगा और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। उसने मुझे बेड पे लिटा लिया और मेरी दोनो टांगो के बीच बैठ कर मेरा लन्ड चूसने लगी। मैं उसके मुलायम होठों को अच्छी तरह महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी और दुनिया में हूं। मेरे जिस्म में चींटियां रेंगने लगी। उसने अपनी गति बढ़ा दी और जल्दी जल्दी लन्ड को चूसने लगी। थोड़ी देर में लन्ड से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा जिसे उसने गड़प से पी लिया।

लन्ड कुछ देर शान्त बना रहा। मैं भी बेड पर निढाल सा पड़ा था।
वो उठ कर बोली- क्यों मर्द?… बस क्या?… या और कुछ करना है?
मैंने कहा- दीदी अभी तो पूरा रात बाकी है… बस एक मिनट… अभी तैयार हो जाता हूं!

वो हंसने लगी। मैं उससे लिपट गया, मैं उससे यूं लिपटा हुआ था जैसे उसके अन्दर ही समा जाउंगा। मैंने उसे बेड पे लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगे ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, अपनी नेहा दीदी को चोदो! दीदी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी।

मैंने पूछा- दीदी तैयार हो क्या जन्नत की सैर करने के लिए?
तो वो बोली- ‘हाँ मेरे राजा भाई! आज इस चूत की खुजली मिटा दो, साली रात भर सोने नहीं देती हैं।
उसने कहा- प्लीज़ जल्दी से अपना मोटा सा लण्ड मेरी चूत में डाल दो।

फिर अपने लण्ड उसकी चूत पे रख कर उसे रगड़ने लगा। वो तो मानो पागल हो उठी। उसने मेरे बॉल खींच लिए और धीरे से बोली प्लीज़ मुझे और मत तड़पाओ, और जल्दी से अपना लण्ड अंदर कर दो। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पे जा कर अटक गया। और वो दर्द से तड़प कर बोली- आ…ह… उ…ई… बाहर निकालो प्लीज़।

उसकी आँखों में आंसू आ टपके। लेकिन मैं तो पूरे जोश में था। मैंने उसे अपने बाजुओं में कस कर पकड़ा और धीरे से प्रेशर देने लगा। फिर मैं रुक गया क्योंकि उसकी चूत काफ़ी टाइट थी और मुझे भी महसूस हो रहा था। मैं बस उतना सा ही घुसा कर उसके स्तन को चाटने लगा। थोड़ी देर बाद वो खुद ही अपनी गांड धीरे धीरे उचकाने लगी।

मैं समझ गया कि अब उसका दर्द ख़त्म हो गया है और वो अब पूरा लण्ड अपनी चूत के अंदर चाहती है। मैंने कुछ सोचा और थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाल कर ज़ोर से धक्का मारा। फ़च्छ … की आवाज़ के साथ पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया था। और दीदी ने अपने होंटों को दबा कर रोना शुरू कर दिया। मैंने उसके मुँह को अपने एक हाथ से ज़ोर से बंद किया और कहा कि अगर वो ज़ोर से चिल्लाएगी तो फ़ूफ़ी उठ जाएँगी और सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा। उसकी आँखो से आंसू छलक पड़े, लेकिन उसने आवाज़ निकालनी कम कर दी।

मैंने लण्ड को थोड़ा सा बाहर खींचा और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। वो अब मस्ती से कराहने लगी. आ…ह उम्म…ह… हाँ… ऐसे ही ठीक है…

मैं लण्ड की अंदर बाहर करने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने लगा। उसे अब मज़ा आने लगा था। वो भी अब पूरा साथ दे रही थी अपनी गांड हिला हिला कर। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। १० मिनट के बाद उसका ऑर्गेज़्म हो गया था। मैं उसकी चूत की लहरें महसूस कर सकता था। उसकी चूत का पानी निकल कर पूरी बेड शीट पर फैल गया था। मैंने उसकी टाँगे और फैला ली और लंबे लंबे धक्के लगाने लगा। वो आँखें बंद करके कराह रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने भी उसकी चूत के अंदर ही ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनो इसी तरह आधे घंटे तक लेटे रहे। फिर मैंने धीरे से अपना लण्ड उसकी चूत से निकाला। वो काफ़ी टाइट से अटका था। फक्क की आवाज़ के साथ पूरा लण्ड बाहर आया तो उस पर मेरा वीर्य और थोड़ा खून भी लगा था। फिर दीदी धीरे से चुपचाप उठ कर चादर को लेकर बाथरूम चली गई।

दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Hindi Porn Stories
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एक बार मैं फिर Antarvasna Stories आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ।

मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है जो आप लोगों को एकदम अपने करीब लगेगी। मेरी शादी को आज लगभग 15 साल हो गए। मेरी शादी के बाद अपनी पत्नी के अलावा मेरा सबसे पहला सैक्सपिरियन्स मेरी साली कोमल के साथ था। मेरी पत्नी घर में सबसे बड़ी है। उसके बाद उसकी दो साल छोटी बहन कोमल तथा लगभग चार साल छोटा भाई है। घर में सब कोमल को प्यार के नाम से “बेबो” कहते हैं।

मेरी पत्नी को पहला बेटा हुआ। जब मैं अपनी पत्नी को अपनी ससुराल से लेने गया तो मेरी साली जो बी.ए.- द्वीतीय में पढ रही थी, की गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थी और लगभग एक महीने की छुट्टियाँ बाकी थी। मेरी पत्नी ने घरवालों से जिद करके, छोटे बच्चे की वजह से बेबो को भी साथ ले लिया। हम सब गुड़गाँव वापस आ गये। मेरी पत्नी और बेबो सारा दिन छोटे बच्चे की देखभाल में लगी रहती। मैंने 10 दिन की छुट्टियाँ ले ली। दिन में मैं और बेबो जब भी खाली होते तो लूडो या कैरम खेलते।

शाम को हम सब पार्क में जाते और अकसर रात का खाना बाहर खाते। मैं बेबो से पूछता कि खाने में क्या लेना है। फिर बेबो की ही पसंदीदा खाना आर्डर करता। हम सब जब भी मार्केट जाते तो मैं बेबो को जरूर से कुछ ना कुछ दिलवाता। बेबो मना करती मगर मैं जबरदस्ती उसे कभी गौगल, कभी पर्स वगैरा कुछ ना कुछ जरुर दिलवाता। चार दिनों में ही बेबो और मैं एक दूसरे से बहुत खुल गये थे। रात को जब मेरी पत्नी छोटे बच्चे को दूध पिलाते-पिलाते सो जाती तो मैं और बेबो देर रात तक बाते करते। खैर…

एक दिन मेरी पत्नी दोपहर में बच्चे को दूध पिलाते-पिलाते सो गई और बेबो नहाने के लिये चली गई। मैं गैरेज में गाड़ी साफ करने लगा। बाथरुम की छोटी सी खिड़की गैरेज में खुलती थी। खिड़की कुछ उँचाई पर थी। इसलिये आसानी से कुछ देख नहीं सकते थे। मैं जब गाड़ी के टायर पर चढ़ कर गाड़ी की छत साफ कर रहा था तभी मेरी नजर बाथरुम की खिड़की पर पड़ी। बाथरुम में बेबो बिलकुल नंगी शावर के नीचे नहा रही थी। उसका जवान नंगा जिस्म शावर में मेरी तरफ पीठ किये था। उसके नंगे और गोरे बदन पर शावर से पानी की बूंदें गिरकर चमक रही थी।

उसके चूतड़ों की गोलाईयां और गहराइयाँ मेरे नजरों के सामने थी। उस समय मेरे बदन में सनसनी फ़ैल रही थी। फिर वो पलटी और उसने अपना बदन अब मेरे सामने कर दिया। अब मुझे उसके बड़े-बड़े स्तनों पर पानी की बूँदें चमक रही थी, छोटे-छोटे भूरे चुचूक मुझे और उत्तेजित कर रहे थे। उसकी चूत के घने बाल पानी की वजह से चिपके हुऐ थे और लटक रहे थे। शावर का ठंडा- ठंडा पानी उसके शरीर पर पड़ कर बह रहा था। वो कभी अपनी चुंचियाँ मलती, तो कभी अपनी चूत साफ़ करती। मैं उसे देख-देख कर और उत्तेजित होने लगा था।

जब वो नहा चुकी तो अपना बदन तौलिये से पौंछने लगी। वो तौलिये से अपनी चुचियाँ मल-मल कर पौंछने लगी। उसकी चुंचियाँ कड़ी होने लगी थी। फिर वो तौलिये से अपनी चूत साफ़ करने लगी। उसकी चूत के काले घने बाल तौलिये से पोंछते ही घुँघराले हो गये और उनमें एक चमक नजर आने लगी। उसने अपना बदन तौलिये से पोछ कर कपड़े पहनने शुरू किए। सबसे पहले उसने अपने वक्ष को सफेद ब्रा में कैद किया। फिर अपनी चूत को गुलाबी कच्छी से ढका। फिर उसने सफेद मगर रंगबिरंगा लोअर पहना। फिर वो जैसे ही अपना टॉप पहनने लगी तभी उसकी नजर खिड़की की तरफ पड़ी और उसने मुझे देख लिया। मैं फौरन नीचे हो गया।

वो बाथरूम से बाहर आई और तौलिया सुखाने के बहाने गैराज में आई और अनजान बनते हुए बोली,”अरे… जीजू, आप अभी तक गाड़ी ही साफ कर रहे हैं?”

उसकी नजरें मेरी हाफ पैंट के ऊपर थी। जहां मेरा लण्ड हाफ पैंट के ऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था और एक टैंट सा बना रहा था।

मैंने कहा,”बस गाड़ी साफ हो गई। चलो चलें।”

और गाड़ी साफ करने का कपड़ा अपनी हाफ पैंट के ऊपर से उफनते हुऐ लण्ड के आगे कर लिया। हम दोनों अन्दर आ गये। मैं आते ही टॉयलेट में घुस गया और अपने उफनते हुए लण्ड को मुठ मार कर शांत किया।

उस दिन से मेरा रोजाना का नियम बन गया, बेबो को खिड़की से झाक कर बाथरुम में नहाते देखने का। जब भी बेबो बाथरुम में नहाने जाती मैं गैराज में किसी ना किसी बहाने चला जाता। बेबो को पता होता था कि मैं उसे छुप-छुप कर देख रहा हूँ। मगर अब वो ओर दिखा-दिखा कर देर तक नहाती। चोरी से खिड़की की तरफ देख कर मुझे अपने को देखते हुए देखती। अब वो जिस समय बाथरूम में नहाने घुसती तो जोर से चिल्ला कर कहती,”दीदी, मैं नहाने जा रही हूँ।”

फिर जब मैं बाथरूम की खिड़की के छेद में से झांक कर देखने लगता तो वो बाथरूम में अपने कपड़े उतारने लगती।

अगर मुझे किसी वजह से गैरेज में आने में देर हो जाती तो वो बाथरुम ऐसे ही टाईम पास करती रहती। जब वो गैरेज के गेट खुलने की आवाज सुन लेती तभी वो बाथरुम में अपने कपड़े उतारना शुरु करती। मुझे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वो अनजान बनते हुए सबसे पहले अपना टॉप उतारती। फिर खिड़की की तरफ मुँह करके अपनी ब्रा उतारती। ब्रा उतरते ही जब उसके स्तन उछल कर बाहर आ जाते तो वो उन स्तनों को धीरे-धीरे से सहलाती और अपने चुचुकों को मसलती।

फिर अपनी पीठ करते हुए अपना लोअर उतार देती। फिर खिड़की की तरफ पलट कर अपनी पेंटी भी उतार देती। फिर अपनी चूत को रगड़ती और चूत के बालों में हाथ फिराती और फिर उन बालों को पकड़ कर ऊपर खींचती। फिर पलट कर अपने चूतड़ों की गोलाईयां और गहराइयाँ मेरी नजरों के सामने करती। ऐसा मुझे लगा। खैर…

उसके ऐसा करने से मेरे बदन में सनसनी फ़ैल जाती और मेरा लण्ड तन कर खडा होकर हाफ पैंट के अन्दर उफन जाता और एक टैंट सा बना देता। फिर जब वो शावर खोल कर पानी अपने बदन पर डालने लगती तो मैं हाफ पैंट के अन्दर से अपना लण्ड बाहर निकाल लेता और बेबो को नहाते देखते हुऐ अपने उफनते हुए लण्ड को मुठ मार कर शांत किया करता। फिर जब वो शांत हो जाता और बेबो अपना बदन तौलिये से पोंछ कर कपड़े पहनने शुरू करती तो मैं खिड़की से अलग़ हो जाता।

कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। मेरी छुट्टियाँ खत्म होने वाली थी। बस दो छुट्टियाँ बची थी।

एक दिन मेरी पत्नी पड़ोस की अपनी सहेली के साथ बच्चे के लिये कुछ कपड़े लेने मार्केट चली गई। जाते-जाते वो मुझ से कहने लगी कि आप यहीं रहो। मैं अपनी फ्रैंड के साथ जा रही हूँ। बेबो सो रही है। रात को छोटे ने काफी परेशान किया। वो बेचारी सारी रात छोटे को खिलाती रही। उसे सोने दो। जब वो उठ जाये तो उसे खाना गर्म करके दे देना।

जब वो चली गई तो मैंने चुपके से देखा कि बेबो स्कर्ट और टी-शर्ट पहन कर सो रही है। मैं बाथरूम में नहाने चला गया। फिर नहा के आकर मैंने फिर बेबो की तरफ देखा तो मैं हैरान रह गया। बेबो सो रही थी। मगर उसकी टी-शर्ट अन्दर ब्रा तक अपर उठी हुई थी और उसकी सफेद ब्रा दिख रही थी। उसकी स्कर्ट उसकी जांघों के उपर तक उठी हुई थी और उसकी जांघों के बीच में उसकी लाल पैंटी दिख रही थी। उसकी लाल पैंटी के उपर उसकी फूली हुई चूत का उभार भी नजर आ रहा था।

मैंने उसे आवाज लगाई- बेबो ! बेबो ! ताकि वो अगर उठे या करवट ले तो उसकी स्कर्ट ठीक हो जाये। मगर वो ना तो उठी ना ही उसने करवट ली। मैं कुछ देर तक उसे निहारता रहा। उसका गोरा-गोरा पेट, चिकनी-चकनी टांगें, भरी-भरी जांघे और जांघों के बीच में उसकी लाल पैंटी के ऊपर उसकी फूली हुई चूत मुझे उत्तेजित कर रहे थे।

मैं कमरे से बाहर आकर सौफे पे बैठ गया। मेरा दिलो-दिमाग बेबो की ही तरफ था। मन उसको देखने और छूने को कर रहा था। मैं फिर से उठ कर कमरे की तरफ गया। मैंने फिर बेबो की तरफ देखा। बेबो सो रही थी। मैं दरवाज़े पर खडा उसे कुछ देर तक निहारता रहा। उसकी भरी-भरी चिकनी जांघे और जांघों के बीच में उसकी लाल पैंटी के उपर उसकी फूली हुई चूत मुझे बहुत उत्तेजित कर रहे थे।

मैं कमरे के अन्दर जा कर बेबो के पास बैठ गया। मैंने हल्के से उसे आवाज लगाई- बेबो-बेबो…

मगर वो ना तो उठी ना ही उसने करवट ली। मैं फिर कुछ देर तक उसे निहारता रहा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी चिकनी जांघ पर रख दिया। कुछ देर बाद मैं उसकी भरी-भरी मासंल जांघ पर हाथ फिराने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी लाल पैंटी के ऊपर उसकी फूली हुई चूत पर रख दिया। उसकी फूली हुई चूत मेरी हथेली के गड्डे में सैट हो गई। फिर मैं अपनी हथेली से उसकी फूली हुई को चूत हल्के-हलके से दबाने लगा। बेबो उसी तरह से सो रही थी या सोने का नाटक कर रही थी। खैर…

मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी। मैं उसकी पैन्टी के अन्दर हाथ डालने की कोशिश करने लगा। मगर उसकी स्कर्ट की वजह से पैन्टी के अन्दर हाथ घुस नहीं पा रहा था। मैंने सावधानी से उसकी स्कर्ट का हुक और साईड चेन खोल दी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। बेबो उसी तरह से सो रही थी या सोने का नाटक कर रही थी और मेरी हिम्मत लगातार बढ़ती जा रही थी।

फिर मैं बेबो की चूत के बालों में हाथ फिराते-फिराते अपनी उँगली बेबो की चूत के फाँक के ऊपर फेरने लगा। फिर उंगलियों से बेबो की चूत के फाँक को खोलने और बन्द करने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपनी एक उँगली बेबो की चूत के फाँक के अन्दर घुसा कर बेबो की चूत के जी पॉयंट को हल्के-हल्के रगड़ने लगा।

उसकी पैन्टी की वजह से मुझे अपनी उँगली बेबो की चूत के अन्दर डालने और बेबो की चूत के जी-पॉयंट को रगड़ने में दिक्कत हो रही थी। इसलिये मैंने उसकी पैन्टी को धीरे-धीरे से नीचे खींच कर उसके घुटनों पर कर दी। फिर मैंने अपनी एक उँगली बेबो की चूत के अन्दर घुसा उसकी चूत को हल्के-हल्के रगड़ने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी पैन्टी भी उसकी टांगों से जुदा कर दी और सावधानी से उसकी दोनों टांगों को अलग कर दिया। अब मैं उसकी बगल में लेट कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा।

फिर मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा। फिर मैं बेबो की चूत की फांक पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँबेबो की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों को बेबो की चूत के फाँको में डाल कर रगडने लगा और उसकी चूत के जी-पॉयंट को अपनी उंगलियों से दबाने और हल्के-हल्के रगड़ने लगा। लगभग 5-7 मिनट बाद बेबो की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा।

अचानक बेबो के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और उसने अपनी आँखें खोल दी और अनजान बनते हुए बोली, “अरे… जीजू कब आए .. और ये क्या कर रहे हैं?”

मैंने कहा “बस अभी ही आया हूँ… और सोचा कि आज बेबो को कुछ मजा कराया जाये। सच बताओ, क्या मजा नहीं आ रहा हैं? मुझे पता है तुम जाग रही थी और मजे ले रही थी। वरना तुम्हारे नीचे से चिकना-चिकना सा नहीं निकलता।”

बेबो मुस्कुराईं और बोली,”नहीं, सच मैं तो सो रही थी। मुझे नहीं पता आप क्या कर रहे थे। और आपने मेरी चड्डी क्यो उतार रखी है।”

उसका झूठ पकड़ में आ रहा था। मैं बोला,”प्लीज़ ! बेबो मजाक मत करो। प्लीज़ ! मेरा साथ दो। हम दोनों मिलकर खूब मजा करेंगे।”

बेबो फिर मुस्कुराईं और बोली,”क्या आपका साथ दूँ और क्या दोनों मिलकर मजा करेंगे। बताईये ना। और मेरी चड्डी क्यो उतार रखी है। आप क्या मजा कर रहे थे। और मेरी चड्डी के अन्दर क्या मजा ढूंढ रहे थे।”

मैंने कहा,”बताऊँ कि मैं तुम्हारी चड्डी के अन्दर क्या मजा ढूंढ रहा था।” कह कर मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया और फिर मैंने अपने जलते हुऐ होंठ बेबो के होंठों पर रख दिए।

फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। बेबो ने भी मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। फिर मैं बेबो को किस करते-करते अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट के उपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। फिर कुछ देर बाद मैं उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके वक्ष को दबाने लगा।

फिर मैं उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो बेबो बोली,”जीजू, क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी।”

मैंने कहा,”चिंता मत करो। वो मार्केट गई और दो-तीन घंटे तक नहीं आँएगी।”

यह कह कर मैं फिर उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा। अब बेबो ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार कर बैड पर फैंक दी। बेबो के बड़े-बड़े और गोरे-गोरे स्तन सफेद ब्रा में फँसे हुए थे। मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। बेबो ने अपनी आंखे बंद कर ली।

कुछ देर बाद मैं उसकी ब्रा के हुक खोल कर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा। फिर कुछ देर मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी और दोनों कबूतरों को आज़ाद कर दिया और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा। मैं उसके गोरे-गोरे सख्त स्तनों को दबाने लगा और साथ-साथ उसके भूरे चुचूकों को हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। बेबो के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने उसकी खुली पड़ी स्कर्ट को भी उतार कर फैंक दिया। बेबो का नंगा, गोरा और चिकना बदन मेरे सामने था।

फिर मैंने बेबो से अलग हो कर अपने सारे कपड़े उतार दिये और पूरी नंगा होकर बेबो से लिपट गया और मैंने बेबो को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड तन कर बेबो की चिकनी टांगों से टकरा रहा था। मैं बेबो की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। उसकी पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। फिर कुछ देर तक उसकी चूत पर हाथ फेरने के बाद मैं अपनी हथेली से उसकी चूत को दबाने लगा।

वो बहुत गरम हो चुकी और जोर-जोर से सिस्कारियां ले रही थी और मेरे बालों पर हाथ फेर रही थी और अपने होंठ चूस रही थी। मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी बगल में लेट कर मैं बेबो की चूत के कट पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ बेबो की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से बेबो की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर मैं बेबो की चूत के जी पॉयंट को रगड़ने लगा। बेबो के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। बेबो ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। कुछ देर बाद बेबो की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था।

मेरा लण्ड बेबो की जांघों से रगड़ खा रहा था। मैंने बेबो का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। बेबो ने बिना झिझके मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। बेबो मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर आगे-पीछे करने लगी। फिर वो मेरा लण्ड पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगी।

अब मैं बेबो की चूत मारने को बेताब हो रहा था। मैं बेबो के ऊपर आकर लेट गया। बेबो का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दब गया। मेरा लण्ड बेबो की जांघों के बीच में रगड़ खा रहा था।

मैं उसके उपर लेट कर उसके चुचूक को चूसने लगा। वो बस सिस्करियां ले रही थी। फिर मैं एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हाथों से मेरा लण्ड को टटोलने लगी। मेरा लण्ड पूरे जोश में आ गया था और पूरा तरह खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था।

बेबो मेरे कान के पास फुसफसा कर बोली,”ओह जीजू। प्लीज़ ! कुछ करो ना। मेरे तन-बदन में आग सी लग रही हैं।”

ये सुन कर अब मैंने उसकी टांगें थोड़ी ओर चौड़ी की और उसके ऊपर चढ़ गया।

फिर अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा। फिर मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा जिससे लण्ड का सुपाड़ा बेबो की कुंवारी चूत के हुआ अन्दर चला गया। लण्ड के अन्दर जाते ही बेबो के मुँह से चीख निकल गई और वो अपने हाथ पाँव बैड पर पटकने लगी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ा था।

वो मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी, “प्लीज़ जीजू, मुझे छोड़ दीजिए, मैं मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने कहा “बेबो तुम ही तो कह रही थी कि जीजू, प्लीज़ ! कुछ करो ना। मेरे तन-बदन में आग सी लग रही हैं। मैंने इसलिये ही तो तुम्हारे अन्दर डाला है। बेबो तुम चिन्ता मत करो, पहली बार में ऐसा होता है, एक बार पूरा अन्दर जाने के बाद तुम्हें मज़ा ही मज़ा आएगा। पहली बार तुम्हारी दीदी को भी ऐसा ही दर्द हुआ था और अब मैं और तुम्हारी दीदी रोज ये करते हैं और तुम्हारी दीदी अब खूब एनजाय करती है।”

फ़िर मैंने एक और धक्का लगा कर उसकी चूत में अपना आधा लण्ड घुसा दिया। बेबो तड़पने लगी। मैं उसके ऊपर लेट कर उसके उरोज़ों को दबाने लगा और उसके होठों को अपने होठों से रगड़ने लगा। इससे बेबो की तकलीफ़ कुछ कम हुई। अब मैंने एक जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर कर दिया। मेरा 8″ लम्बा और ३” मोटा लण्ड उसके कौमार्य को चीरता हुआ उसकी कुँवारी चूत में समा गया।

इस पर वो चिल्लाने लगी “आहह्ह, मर गई। ओह प्लीज़ जीजू इसे बाहर निकालिये, मैं मर जाउंगी।” उसकी चूत से खून टपकने लगा था।

मैं रुक गया और बेबो से बोला “प्लीज़ ! बेबो, मेरी जान, अब और दर्द नहीं होगा।”

बेबो का यह पहला सैक्सपिरियन्स था। इसलिऐ मैं वही रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा और उसके माथे को और आँखो को चूमने लगा । उसकी आंख से आंसू निकल आये थे और वो सिस्कारियां भरने लगी थी। यह देख कर मैंने बेबो को अपनी बाँहो में भर लिया।

फिर मैंने अपने जलते हुऐ होंठ बेबो के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा, ताकि वो अपना सारा दर्द भूल जाये। कुछ देर बाद उसका दर्द भी कम हो गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में से कस लिया। मैंने भी बेबो को अपनी बाँहों में भर लिया। मेरा पूरा लण्ड बेबो की चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। फिर मैं अपने होंठों से उसके नरम-नरम होंठों को चूसने लगा। कुछ देर तक हम दोनो ऐसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे और एक-दूसरे के होंठों को चूसते रहे।

फिर मैं अपने लण्ड को उसकी चूत में धीरे-धीरे अन्दर बाहर करने लगा। बेबो ने कोई विरोध नहीं किया। अब शायद उसका दर्द भी खत्म होने लगा था और वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर को भी हिलाने लगी थी। उसकी चूत में से थोडा सा खून बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और आज ही मैंने उसकी सील तोड़ी है।

उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरा लण्ड बहुत मोटा था, इसलिए मुझे बेबो को चोदने में बहुत मजा आ रहा था। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से बेबो की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। फिर कुछ देर बाद बेबो ने अपनी टांगें उपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को लगातार धीरे-धीरे बेबो की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी। अब मेरा लण्ड बेबो की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं बेबो की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मारने लगा था।

थोड़ी देर में बेबो भी नीचे से अपनी कमर उचका कर मेरे धक्कों का ज़वाब देने लगी और मज़े में बोलने लगी ” सी … सी… और जोररर से जीजुजुजु… येसस्स अरररऽऽ बहुत मज़ा आ रहा है और अन्दर डालो और जीजू और अन्दर येस्स्स् जोर से करो। प्लीज़ ! जीजू तेज-तेज करो ना। आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।”

बेबो को सचमुच में मजा आने लगा था। वो जोर जोर से अपने कूल्हे हिला रही थी और मैं तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने मेरे कूल्हों को अपने हाथों में थाम लिया। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने कूल्हे पीछे खींच लेती। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी जांघें उपर उठा देती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर बेबो को चोदने लगा। फिर मैं बैड पर हाथ रख कर बेबो के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड बेबो की चिकनी चूत में आसानी और तेजी से आ-जा रहा था। बेबो भी अब चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। वो मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर बेबो से कहा, “बेबो अच्छा लग रहा है ?”

बेबो बोली,”हाँ जीजू बहुत अच्छा लग रहा है। प्लीज़ ! रुको मत। तेज-तेज करते रहो। हाँ प्लीज़ ! तेज-तेज करो। मैं अन्दर से डिस्चार्ज होने वाली हूँ। प्लीज़ ! चलो करो। अब रुको मत। तेज-तेज करते रहो।”

बेबो के मुहँ से ये सुन कर मैंने फिर से बेबो को चोदने शुरु कर दिया और अपनी रफ्तार को और बढ़ा दिया। मैंने बेबो के बड़े-बड़े हिप्स को अपने हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर बेबो को चोदने लगा। बेबो के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह्ह्हो होहोह सिस्स्स ह्ह्ह्ह हाह्ह्ह आआ आआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ ! जीजू तेज-तेज करो।”

करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ने वाली थी तभी हम दोनों एक साथ अकड़ गये और एक साथ जोर-जोर से धक्के मारने लगे। फिर अचानक बेबो ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया और बोली “जीजू मेरा काम होने वाला है। प्लीज़ ! जोर-जोर से करो येस-येस अररर् और जोर से य…य…यस यससस मैं हो गईईईईई…! इसके साथ ही बेबो की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। उसने एक जोर से आह भरी और फिर वो ढीली पड़ गई।

मैं समझ गया कि बेबो डिस्चार्ज हो गई है। लेकिन मेरा काम अभी नहीं हुआ था इसलिए मैं जोर-जोर से अपने लण्ड से बेबो की चूत को पेलने लगा। मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं तेज-तेज धक्के मारने लगा। बेबो रोने सी लगी और मेरे लण्ड को अपनी चूत में से बाहर निकालने के लिए बोलने लगी। लेकिन मैंने उसकी बातों को अनसुना कर धक्के लगाना जारी रखा।

करीब 2-3 मिनट तक बेबो को तेज-तेज चोदने के बाद जब मैं डिस्चार्ज होने लगा तो मैंने अपना लण्ड बेबो की चूत से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के झांटों उपर डिस्चार्ज हो गया और उसके ऊपर गिर गया। फिर मैं उसके उपर लेट कर अपनी तेज-तेज चलती हुई सांसों को नार्मल होने का इन्तज़ार करता रहा। फिर मैं बेबो की बगल में लेट गया। बेबो भी मेरे साथ लेटी हुई अपनी सांसों को काबू में आने का इंतजार कर रही थी।

बेबो की चूत के काले घने घुंघराले बालों में मेरे वीर्य की सफेद बून्दे चमक रही थी। मैंने अपने अन्डरवियर से बेबो की चूत के ऊपर पड़े अपने वीर्य को साफ कर दिया। कुछ देर तक ऐसे ही पड़े रहने के थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और अपने कपड़े पहनने लगे। बैड की चादर पर बेबो की चूत से निकला हल्का सा खून पडा था। बेबो ने तुरन्त डस्टिग़ वाला कपड़ा लेकर गीला करके चादर से खून साफ कर दिया और पंखा चला दिया ताकि चादर जल्दी से सूख जाए।

मैंने बेबो से पूछा कि कैसा लगा तो वो बोली “जीजू ! शुरु-शुरू में तो मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन बाद में बहुत मजा आया। इतना मज़ा तो मुझे कभी किसी चीज़ में नहीं आया। सचमुच आज से मैं आपकी दीवानी बन गई हूँ। अब आप जब चाहें ये सब कर सकते हैं। मुझे कोई एतराज नहीं होगा।”

ये सुन कर मैंने खीच कर उसे अपने सीने से चिपका लिया। फिर मैंने अपने जलते हुऐ होंठ बेबो के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। बेबो भी मुझ से लिपट गई और उसने भी मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। फिर मैं बेबो को किस करते-करते उस के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा।

फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट के उपर से उसके स्तनों को दबाने लगा और बेबो से बोला “एक बार फिर हो जाए। तुम्हें कोई एतराज नहीं।”

वो एकदम छटक कर अलग हो गई और बोली,”क्या करते हो जीजू। बड़े गन्दे हो आप। इतना सब कुछ हो गया। फिर भी चैन नहीं पड़ा है। अब सब्र रखो। दीदी आने वाली होंगी।”

मैंने बेबो से कहा “अभी तो तुम कह रही थी कि मैं आपकी दीवानी बन गई हूँ। अब आप जब चाहें ये सब कर सकते हैं। मुझे कोई एतराज नहीं होगा और अब तुम मना कर रही हो।”

बेबो बोली “जीजू। मैंने कहा है और एक बार फिर कह रही हूँ कि सचमुच मैं आपकी दीवानी बन गई हूँ और अब आप जब चाहें ये सब मेरे साथ कर सकते हैं। मुझे कोई एतराज नहीं होगा। लेकिन आज अब और नहीं। आपने इतना ज्यादा किया है ना कि मेरे नीचे दर्द हो रहा, शायद कट भी लग गया है। नीचे चीस सी मच रही है। इसलिये आज नहीं। अब कल करेंगे। कल तक मेरे नीचे का मामला भी ठीक हो जाएगा। अब मैं नहाने जा रही हूँ। गर्म-गर्म पानी से नहाऊगी और गर्म पानी से नीचे की थोड़ी सिकाई करुँगी तो कुछ ठीक हो जाऊँगी। वरना मेरी चाल देख कर दीदी को शक हो जाऐगा। अब कल तक के लिये सब्र रखिये। वैसे भी दीदी भी आने वाली होंगी।”

इतना कह कर उसने हाथ हिला कर शरारत से बाय किया और फिर वो तेजी से बाथरुम की ओर जाने लगी। मैं खड़ा-खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा। उस दिन मैं बहुत खुश था क्योंकि बेबो को जम कर चोदने की मेरे मन की इच्छा पूरी हो गई थी।

इसके बाद मौका मिलने पर लगभग दो साल में हमने कुल 9 बार अपने घर में, 3 बार बेबो के घर में और एक ही रात में 3 बार होटल के कमरे में बेबो के साथ खुलकर सैक्स किया। हर बार सैक्स करने का अन्दाज और मजा अलग ही था। अगर समय मिला तो अपने यहां सोफे पर और एक रात को अपनी पत्नी को नींद की गोली देकर स्टोर में बेबो के साथ सैक्सपिरियस के बारे में भी जरुर बताऊँगा। फिर एक बार शाम को बेबो के ही घर में छत पर बेबो के साथ सैक्सपिरियस के बारे में भी जरुर बताऊँगा। और एक पूरी रात बेबो के साथ होटल के कमरे में तीन बार सैक्स करना तो मैं भूल ही नहीं सकता। वो किस्सा भी अगर समय मिला तो जरुर बताऊँगा। खैर…

दो साल बाद बेबो की शादी हो गई और आज वो दो बच्चों की माँ हैं। बेबो और उसके परिवार से हर साल दो या तीन बार मुलाकात जरुर होती है। फोन पर तो अकसर बात होती रहती है। लेकिन हम भूल कर भी अपने पुराने सैक्सपिरियंस के बारे में बात नहीं करते हैं। बेबो की शादी के बाद हमने मौका मिलने पर भी कभी सैक्स नहीं किया और शायद यही वजह है कि हमारे दिल में एक दूसरे के लिये प्यार आज भी है। खैर …

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी। Antarvasna Stories

Sex Stories

हाय ! मेरा नाम अजय है Sex Stories और मेरी उम्र 21 साल है, मैं मुम्बई में रहने वाला एक सुन्दर लड़का हूँ। मैं अन्तर्वासना के माध्यम से अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।

मेरा मन कामुक कथाएं पढ़ने का बहुत करता है इसलिए मैं बहुत सारी सेक्स-कहानियों की किताबें अपने साथ रखता हूँ।

अब कहानी शुरू करता हूँ..

यह करीब एक साल पहले की बात है, मेरी कक्षा में एक सेक्सी लड़की ने प्रवेश लिया। वो एक सेक्सी शरीर की मालकिन थी।
सारे लड़के उसे देखते तो उनके मुंह से आह निकलती थी।
उसके स्तन तो ऐसे थे कि ब्रा में समाते ही नहीं थे और हमेशा उसके अन्दर चहकते रहते..और काजल की टाईट जींस के अन्दर उसकी तरबूज़ जैसी गाण्ड ऐसी लगती थी कि अभी इसकी चुदाई कर दूँ…

क्लास के सभी लड़के काजल के पीछे पड़े थे..मैं एक शर्मीला लड़का हूँ इसलिए मैं दूर रहता था। लेकिन क्लास में होने की वज़ह से हमारी दोस्ती हो गई। लेकिन मैं भी उसे चोदना चाहता था और मुझे मौका मिल ही गया।

वो मेरे घर की तरफ़ ही रहती थी, इस वज़ह से वो मेरे साथ ही आती जाती थी। मैं रिक्शे में हमेशा हमेशा चांस मारता था, कभी उसके बूब्स पे हाथ मार देता तो कभी मज़ाक में उसकी गाण्ड पे हाथ मार देता। वो भी कुछ नहीं बोलती थी।

बारिश का मौसम था। उस दिन बारिश की वज़ह से हम काफ़ी भीग चुके थे। गीले कपड़ों में उसके स्तन पूरे आकार में दिख रहे थे और मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।
मैंने उसे आज ही चोदने का मन बना लिया था।

वो मुझे अपने घर ले गई। हम दोनों को ठण्ड लग रही थी, वो अपने कपड़े बदल कर आई, तब तक मैं अपना शर्ट निकाल चुका था..

काजल जैसे ही बाहर आई तो मैं उसे पकड़ के किस करने लगा। वो कुछ समझी ही नहीं पाई या फ़िर ना समझने का नाटक कर रही थी।
मैं किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा, वो कुछ नहीं बोली।

मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने उसकी ब्रा के अन्दर हाथ डाल दिया। अब तक वो भी पूरी आपे से बाहर हो चुकी थी, उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया, मैं समझ गया कि काजल को मेरा लण्ड चाहिए।

मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैं अपना लण्ड उसके मुँह में देने लगा, पहले तो उसने मना किया लेकिन बाद में वो राज़ी हो गई। वो मेरे लण्ड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए। मैं उसकी गुलाबी चूत को जीभ से चाटने लगा। उसके मुंह से ..ऊह या पंकज़ याह ऊऊह प्लीज़ चोदो मुझे… मुझे तुम्हारा… बड़ा सा लण्ड चाहिए ओ येस की आवाज़ निकाल रही थी।

हम दोनों बेकाबू हो गए और एक दूसरे के मुँह में झड़ गए।

15 मिनट तक हम एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे, उसके बाद वो फ़िर से चुदाई के लिए तैयार हो गई, लेकिन इस बार जीभ से नहीं मेरे लण्ड से चुदाने के लिए तैयार थी।

मैं उसे कुतिया स्टाईल में चोदने के लिए तैयार हो गया लेकिन वो पहली बार चुदाने जा रही थी इसलिए उसकी चूत काफ़ी टाईट थी।
मैंने उसे क्रीम लाने को बोला, और उस पे लगाया, फ़िर एक जोर का झटका दिया और वो चिल्लाने लगी- निकालो-निकालो !

फ़िर मैं रुक गया, थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी मचलने लगी।
फ़िर मैंने और एक झटका दिया और मेरा लण्ड पूरी तरह उसकी चूत के अन्दर हो गया और उसके मुँह से अजीब आवाज़ें निकलने लगी- ओह अजय ! प्लीज़ मेरी चूत को फ़ाड़ दो प्लीज़ ओ ओह यस… मैं ज़न्नत में हूँ… तुम पहले क्यों नहीं मिले..आई लव यू पंकज़ !

और मैं तो जैसे स्वर्ग में था, अब हम दोनों पूरे जोर से एक दूसरे को चोद रहे थे।

अब हम दोनों झड़ने वाले थे, वो बोली-अन्दर मत गिराना… मैं तुम्हारे पानी को पीना चाहती हूँ..

मैंने बाहर निकाल के उसके मुंह में गिरा दिया… वो सारा पानी पी गई… उसके बाद हम दोनों ने अलग अलग ढंग से दो बार और चुदाई की।

वो मेरे साथ एक साल रही, लेकिन अब वो कोलकाता चली गई है.. और मैं अकेला पड़ गया हूँ..

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